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Manoharpur : मनोहरपुर में 77वाँ वन महोत्सव सम्पन्न, वृक्षारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का लिया गया संकल्प

  • स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : सारंडा वन प्रमंडल, चाईबासा के अंतर्गत कोयना वन प्रक्षेत्र की ओर से सोमवार को लाईट रेलवे मध्य विद्यालय, साइडिंग मनोहरपुर में 77वें वन महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों, स्कूली छात्र-छात्राओं तथा ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण का संकल्प लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मनोहरपुर विधायक जगत माझी, सारंडा वन प्रमंडल के प्रभागीय वन पदाधिकारी (डीएफओ) अभिरूप सिन्हा तथा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारी अनुराधा मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर एवं पौधारोपण के साथ किया। समारोह की शुरुआत अतिथियों के स्वागत से हुई, जहां उन्हें पुष्पगुच्छ और रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत और मनमोहक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में रंग भर दिया। वन विभाग द्वारा आयोजित चित्रांकन प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया।

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पर्यावरण संरक्षण और जलवायु जागरूकता पर दिया गया विशेष जोर

कार्यक्रम के दौरान वन संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। मुख्य अतिथि विधायक जगत माझी ने अपने संबोधन में कहा कि वन और पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने सभी लोगों से “एक पौधा माँ के नाम” अभियान से जुड़कर अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने कर्नाटक राज्य के मॉडल का उल्लेख करते हुए सारंडा क्षेत्र के लोगों को वन संपदा आधारित आजीविका, प्रशिक्षण और स्वरोजगार कार्यक्रमों से जुड़ने का आह्वान किया। उनका कहना था कि इससे स्थानीय समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त होगा और वन संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी। वक्ताओं ने आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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वन विभाग ने लाभुकों को वितरित की परिसंपत्तियां, योजनाओं की दी जानकारी

वन महोत्सव के अवसर पर वन विभाग की ओर से वन क्षेत्र के लाभुकों के बीच विभिन्न परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। साथ ही विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए अधिकाधिक लोगों से इनका लाभ उठाने की अपील की गई। कार्यक्रम में कोयना रेंज के अधिकारियों के अलावा रामनंदन राम, पूर्व रेंजर परमानंद रजक, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) दाऊद ए. डोडराई, वनरक्षियों, जनप्रतिनिधियों, स्कूली छात्र-छात्राओं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं था, बल्कि लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा कर हरित भविष्य की दिशा में सामूहिक प्रयास को बढ़ावा देना भी था।

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Manoharpur : विश्व कल्याण आश्रम ने छह मंदिरों के निर्माण के लिए भेजी सामग्री

बानो और जलडेगा के गांवों में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा जेबी लाइव, रिपोर्टर मनोहरपुर : ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक

  • बानो और जलडेगा के गांवों में धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में विश्व कल्याण आश्रम ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए छह मंदिरों के निर्माण के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई है। आश्रम की ओर से बानो प्रखंड के हूरसा, बेड़ा, बाकी, नीमटूर और सोरडा गांवों के साथ-साथ जलडेगा प्रखंड के हुटूटुआ एवं कुकुरभूखा गांव में मंदिर निर्माण के लिए सामग्री भेजी गई है। आश्रम के पदाधिकारियों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी बढ़ावा देना है। मंदिर निर्माण से ग्रामीणों को धार्मिक आयोजनों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर मंच उपलब्ध होगा, जिससे सामाजिक एकजुटता को भी बल मिलेगा।

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ग्रामीणों ने जताया आभार, निर्माण कार्य में सहयोग का दिया भरोसा

निर्माण सामग्री भेजे जाने के दौरान शिव प्रताप सिंह, उमेश रवानी, अभुज साहू, बालमुकुंद सिंह, राम किशोर सिंह एवं अमर साहू सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने विश्व कल्याण आश्रम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को नया आयाम मिलेगा। वहीं संबंधित गांवों के ग्रामीणों ने आश्रम के पदाधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए मंदिर निर्माण कार्य को सफल बनाने में हरसंभव सहयोग देने का भरोसा जताया। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं होगा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।

Jamshedpur : मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 का कार्यक्रम जारी, दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अपील

05 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची जेबी लाइव, रिपोर्टर जमशेदपुर : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची

  • 05 अगस्त को प्रकाशित होगी प्रारूप मतदाता सूची

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-2026) के तहत दावा एवं आपत्ति अवधि से संबंधित कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने सभी पात्र मतदाताओं से इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 05 अगस्त 2026 को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 08 एवं 09 अगस्त 2026 को दावा एवं आपत्ति प्राप्त करने के लिए प्रथम विशेष मतदान केंद्र शिविर आयोजित किए जाएंगे। निर्वाचन विभाग ने सभी मतदाताओं से अपने नाम एवं विवरण का सत्यापन करने तथा किसी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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ग्राम सभाओं और विशेष शिविरों के माध्यम से चलेगा पुनरीक्षण अभियान

निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के तहत 15 अगस्त 2026 को ग्राम सभाओं के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात 22 एवं 23 अगस्त 2026 को द्वितीय विशेष मतदान केंद्र शिविर लगाए जाएंगे, जहां मतदाता सूची से संबंधित दावा एवं आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इसके अलावा 25 अगस्त से 04 सितंबर 2026 तक होम-टू-रोल वेरिफिकेशन कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। इस दौरान अधिकारियों एवं बीएलओ द्वारा मतदाताओं के विवरण का सत्यापन किया जाएगा, ताकि मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाया जा सके। निर्वाचन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस अभियान के सफल संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

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समय पर आवेदन कर मतदाता सूची में सुधार कराने की अपील

जिला निर्वाचन पदाधिकारी नितिश कुमार सिंह ने कहा कि जिन नागरिकों का नाम अब तक मतदाता सूची में शामिल नहीं है या जिनके नाम, पता, आयु अथवा अन्य विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि है, वे निर्धारित अवधि के भीतर संबंधित मतदान केंद्र अथवा निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी कार्यालय में आवश्यक प्रपत्र के साथ दावा एवं आपत्ति दर्ज कराएं। उन्होंने सभी निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, बीएलओ तथा संबंधित कर्मियों को व्यापक प्रचार-प्रसार, समयबद्ध निष्पादन और मतदाताओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही प्रत्येक आवेदन का नियमानुसार त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

Jamshedpur : JFC बंद करने पर पहली बार बोली टाटा स्टील, कहा- बोर्ड का निर्णय, वित्तीय गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं

कंपनी ने सभी अटकलों पर लगाया विराम, खेल विकास को बताया प्राथमिकता जेबी लाइव, रिपोर्टर जमशेदपुर : जमशेदपुर फुटबॉल क्लब

  • कंपनी ने सभी अटकलों पर लगाया विराम, खेल विकास को बताया प्राथमिकता

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : जमशेदपुर फुटबॉल क्लब (जेएफसी) को बंद करने के फैसले के बाद शहर और खेल जगत में उठ रहे सवालों के बीच टाटा स्टील ने पहली बार आधिकारिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। सोमवार को कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदररामम ने कहा कि जेएफसी को बंद करने का निर्णय पूरी तरह टाटा स्टील के बोर्ड का है और इसका किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आर्थिक गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि खेलों में निवेश का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता, बल्कि खिलाड़ियों को मंच उपलब्ध कराना, खेल संस्कृति को बढ़ावा देना और भविष्य की प्रतिभाओं को तैयार करना होता है। इसी सोच के साथ टाटा स्टील ने वर्षों तक जमशेदपुर एफसी का संचालन किया और भारतीय फुटबॉल को नई दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि क्लब ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई, बल्कि जमशेदपुर को भारतीय फुटबॉल के मानचित्र पर भी मजबूत स्थान दिलाया।

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2017 से अब तक 320 करोड़ रुपये का निवेश, उपलब्धियों पर जताया गर्व

डीबी सुंदररामम ने बताया कि वर्ष 2017 में स्थापित जमशेदपुर एफसी ने इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए फुटबॉल प्रेमियों के बीच अपनी विशेष पहचान बनाई। टाटा स्टील ने क्लब के संचालन पर प्रतिवर्ष लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये खर्च किए। अन्य प्रायोजकों और साझेदारों के सहयोग को जोड़कर क्लब में अब तक लगभग 320 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों के दौरान क्लब ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं और इस पूरे सफर पर टाटा स्टील को गर्व है। कंपनी का मानना है कि जेएफसी ने भारतीय फुटबॉल में पेशेवर संस्कृति को मजबूत करने और युवा खिलाड़ियों को अवसर देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि क्लब की उपलब्धियां और उससे जुड़ी यादें हमेशा टाटा स्टील और शहर के खेल इतिहास का हिस्सा रहेंगी।

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अब ग्रासरूट फुटबॉल और युवा खिलाड़ियों के विकास पर रहेगा फोकस

टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट ने कहा कि भविष्य में कंपनी अपनी खेल रणनीति में बदलाव करते हुए ग्रासरूट स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने बताया कि 7 से 19 वर्ष आयु वर्ग के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराना कंपनी की प्राथमिकता होगी। टाटा स्टील वर्तमान में 19 विभिन्न खेलों की अकादमियां संचालित कर रही है और आगे भी जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें निखारने का कार्य जारी रखेगी। उनका कहना था कि मजबूत ग्रासरूट व्यवस्था ही भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की नींव तैयार करती है। कंपनी का विश्वास है कि यदि शुरुआती स्तर पर प्रतिभाओं को सही प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वे आगे चलकर देश और राज्य का नाम रोशन कर सकते हैं।

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खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा का भरोसा, जमशेदपुर में जारी रहेंगी फुटबॉल गतिविधियां

कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी डीबी सुंदररामम ने कंपनी का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि क्लब से जुड़े सभी कोच, तकनीकी विशेषज्ञ और अन्य कर्मी अपनी योग्यता एवं अनुभव के आधार पर नियुक्त किए गए थे तथा उन्होंने क्लब के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कंपनी उनके कार्यों का सम्मान करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन खिलाड़ियों का अनुबंध अभी प्रभावी है, उन्हें अनुबंध की शर्तों के अनुसार पूरी राशि का भुगतान किया जाएगा। साथ ही टाटा स्टील यह प्रयास करेगी कि खिलाड़ियों को अन्य क्लबों में अवसर मिल सके, जिससे उनके करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि जेएफसी का संचालन बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि जमशेदपुर में फुटबॉल समाप्त हो जाएगी। टाटा स्टील आगे भी स्थानीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं, क्लबों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और युवा खिलाड़ियों को सहयोग देती रहेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि शहर की समृद्ध फुटबॉल परंपरा भविष्य में भी कायम रहेगी और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलते रहेंगे।

Gua : 110 वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहा बालिबा, आजादी के 78 साल बाद भी विकास से दूर वन ग्राम

सारंडा के ऐतिहासिक गांव तक पहुंचने के लिए आज भी 7 किलोमीटर कच्चे रास्ते पर निर्भर ग्रामीण जेबी लाइव, रिपोर्टर

  • सारंडा के ऐतिहासिक गांव तक पहुंचने के लिए आज भी 7 किलोमीटर कच्चे रास्ते पर निर्भर ग्रामीण

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल स्थित ऐतिहासिक वन ग्राम बालिबा आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। आजादी के 78 वर्ष बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच पाई है। ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1917 के आसपास बसाए गए इस गांव को करीब 110 वर्ष पूरे होने वाले हैं, लेकिन बालिबा चौक से गांव तक लगभग सात किलोमीटर का रास्ता आज भी कच्चा है। यही मार्ग ग्रामीणों की जीवनरेखा बना हुआ है। बरसात के दिनों में यह सड़क कीचड़ और दलदल में बदल जाती है, जिससे गांव का संपर्क बाजार, अस्पताल, स्कूल और सरकारी कार्यालयों से लगभग टूट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। इससे गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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अंग्रेजों ने बसाया था गांव, लेकिन विकास की दौड़ में पीछे रह गया बालिबा

जानकारी के अनुसार ब्रिटिश शासन के दौरान सारंडा के घने जंगलों में वन संपदा के दोहन के उद्देश्य से थोलकोबाद, करमपदा, भनगांव, कुमड़ी, तिरिलपोसी, बिटकिलसोय, बालिबा, दीघा और नवागांव जैसे कई वन ग्राम बसाए गए थे। इन गांवों में आदिवासी परिवारों को बसाकर साल वृक्षों की कटाई, लोडिंग और परिवहन का कार्य कराया जाता था। समय के साथ अधिकांश वन ग्रामों तक पक्की सड़क पहुंच गई, लेकिन बालिबा अब भी विकास की मुख्यधारा से दूर है। छोटानागरा से कुदलीबाद होते हुए थोलकोबाद तक सड़क का निर्माण हो चुका है, जबकि बालिबा चौक से गांव तक का सात किलोमीटर हिस्सा अब भी कच्चा पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति क्षेत्रीय विकास के दावों की वास्तविक तस्वीर को सामने लाती है।

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बारिश में बढ़ जाती है परेशानी, मरीजों और छात्रों पर पड़ता है सबसे अधिक असर

ग्रामीणों के अनुसार बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति अत्यंत खराब हो जाती है। कई स्थानों पर जलभराव और फिसलन के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि दोपहिया वाहनों का आवागमन लगभग बंद हो जाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों पर पड़ता है। वर्ष 2006 में बालिबा उस समय राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था, जब यहां पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 30 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। इसके बाद सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां काफी हद तक समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन विकास की रफ्तार गांव तक नहीं पहुंच पाई है।

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सड़क निर्माण की मांग तेज, ग्रामीणों ने विकास योजनाओं पर उठाए सवाल

हाल ही में बालिबा के मुंडा बिनोद होनहागा ने बरायबुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू से गांव तक पक्की सड़क निर्माण की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि वे नियमित रूप से मतदान करते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी निभाते हैं, फिर भी उनका गांव उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि सारंडा क्षेत्र की सेल और निजी खदानों से सरकार को हर वर्ष अरबों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है तथा जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMFT) में भी पर्याप्त राशि उपलब्ध है। इसके बावजूद केवल सात किलोमीटर सड़क का निर्माण नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी और पक्की सड़क बनने से बालिबा के विकास, सम्मान और बेहतर भविष्य का रास्ता खुलेगा।

Ghatsila : परिसीमन को लेकर झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ की परिचर्चा, आरक्षित सीटों की सुरक्षा पर जताई चिंता

फुलडुंगरी में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग ने रखे विचार जेबी लाइव, रिपोर्टर घाटशिला : फुलडुंगरी स्थित

  • फुलडुंगरी में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग ने रखे विचार

जेबी लाइव, रिपोर्टर

घाटशिला : फुलडुंगरी स्थित बाबा तिलका माझी भवन में झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ की ओर से झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा-परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्र नेताओं, बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों तथा जागरूक नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने परिसीमन के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा के दौरान यह भी विचार किया गया कि परिसीमन का प्रभाव विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर किस प्रकार पड़ सकता है।

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राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन

परिचर्चा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ की ओर से राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की जाएगी कि परिसीमन से जुड़े किसी भी निर्णय में आरक्षित पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, विधायक, सांसद, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय, परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों तथा कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष संजय बेहरा ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्राप्त सुझावों को संकलित कर जल्द ही व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी तथा इस विषय पर आगे भी जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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आरक्षित सीटों में कमी हुई तो होगा विरोध : वक्ता

संघ के केंद्रीय प्रवक्ता रामचन्द्र सोरेन ने कहा कि यदि परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में बढ़ती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि आरक्षित सीटों में कमी आती है तो इसे पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अधिकारों पर आघात माना जाएगा और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। वहीं माझी परगना महल के देश विचार सचिव बहादुर सोरेन ने कहा कि सरकार अब तक पेसा कानून के अनुरूप मानकी-मुंडा, ढोकलो पड़हा, माझी महाल सहित आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रशासनिक नियमावली लागू नहीं कर सकी है। झारखंड आंदोलनकारी सुराई बास्के ने कहा कि झारखंड आंदोलन के लंबे संघर्ष के बाद राज्य को आदिवासी नेतृत्व मिला है और परिसीमन के कारण आरक्षित सीटों में कमी आना आंदोलन की मूल भावना के विपरीत होगा।

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सभी प्रखंडों में चलाया जाएगा जनजागरण अभियान

संघ के जिला अध्यक्ष एवं पूर्व प्रत्याशी आनन्द हेम्ब्रम ने कहा कि परिसीमन को लेकर पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी प्रखंडों में चर्चा-परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि आम लोगों की राय लेकर आगे की रणनीति तय की जा सके। कार्यक्रम में समाजसेवी कृष्णा बास्के, पूर्व विधायक प्रत्याशी इंद्र मुर्मू, शिक्षक राम दुलार टुडू, आदिवासी छात्र संघ के पूर्व प्रत्याशी मनसा राम हांसदा, जिला अध्यक्ष अजीत मुर्मू सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुकेश कर्मकार, प्रकाश मुखी, संजय नायक, सुनील मुखी, मनोज मुखी, महेश करूवा, सुन्दर टुडू, सुजाता मंडी एवं मंगल टुडू सहित संघ के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक जनभागीदारी और संवाद ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बना सकता है।

Gua : किरीबुरू-बड़ाजामदा मुख्य मार्ग पर विशाल पेड़ गिरा, घंटों बाधित रहा यातायात

सैडल गेट और बराईबुरु के बीच सड़क जाम, वाहनों की लगी लंबी कतार जेबी लाइव, रिपोर्टर गुवा : किरीबुरू-बड़ाजामदा मुख्य

  • सैडल गेट और बराईबुरु के बीच सड़क जाम, वाहनों की लगी लंबी कतार

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : किरीबुरू-बड़ाजामदा मुख्य मार्ग पर सोमवार को सैडल गेट और बराईबुरु गांव के बीच एक विशाल पेड़ सड़क के बीचों-बीच गिर जाने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। पेड़ गिरने के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और कई यात्री, वाहन चालक तथा राहगीर घंटों तक फंसे रहे। इस घटना से चारपहिया और भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई, जबकि दोपहिया वाहन चालक भी काफी मशक्कत के बाद किसी तरह पेड़ के किनारे से निकलने में सफल हो सके। सड़क अवरुद्ध होने से किरीबुरू और बड़ाजामदा के बीच आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार अचानक पेड़ गिरने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई आवश्यक कार्यों से आने-जाने वाले लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके।

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सड़क बहाल करने की मांग, प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील

यातायात बाधित होने से रोजमर्रा के कामकाज, व्यवसाय और अन्य जरूरी कार्यों के लिए सफर कर रहे लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई यात्री घंटों तक सड़क खुलने की प्रतीक्षा करते रहे, जिससे उनका समय भी बर्बाद हुआ। स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों ने वन विभाग एवं जिला प्रशासन से सड़क पर गिरे पेड़ को तत्काल हटाने और यातायात व्यवस्था को जल्द सामान्य करने की मांग की है। उनका कहना है कि किरीबुरू और बड़ाजामदा को जोड़ने वाला यह क्षेत्र का प्रमुख मार्ग है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का लंबे समय तक बाधित रहना जनजीवन और आवागमन दोनों को प्रभावित करता है। लोगों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई कर मार्ग को सुरक्षित एवं सुचारु बनाने की अपील की है।

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