20 अगस्त की सुनवाई से पहले उठे कई सवाल
न्यायालय में मामला लंबित होने के बीच बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कानूनी और प्रशासनिक बहस तेज
न्यायालयी सुनवाई के बीच विवादित जमीन का मामला बना चर्चा का केंद्र
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के शिव सिंह बागान सी रोड स्थित विवादित जमीन पर बुधवार को प्रशासन और टाटा स्टील की संयुक्त कार्रवाई के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कथित अतिक्रमण हटाने और जमीन को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की गई। इस दौरान विवादित स्थल पर बुलडोजर चलाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के बाद जमीन पर लंबे समय से निवास और कब्जे का दावा करने वाले लोगों ने इसका विरोध जताया है। प्रभावित पक्ष का कहना है कि यह जमीन कई वर्षों से न्यायालय में विवादित है और मामले की सुनवाई विभिन्न अदालतों में चल रही है। उनका दावा है कि वर्ष 2009 से चल रहे इस विवाद में कई अवसरों पर उनके पक्ष में आदेश भी पारित हुए हैं। साथ ही उनका कहना है कि उक्त भूमि पर करीब चार दशक से कई परिवार मकान बनाकर निवास कर रहे हैं।
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20 अगस्त की सुनवाई से पहले कार्रवाई पर उठे सवाल

विरोध कर रहे पक्ष के अनुसार, जमीन विवाद से संबंधित मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को सिविल कोर्ट में निर्धारित है। ऐसे में सुनवाई से कुछ दिन पहले विवादित स्थल पर प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सुनवाई की तिथि तय है, तब प्रशासन को कार्रवाई से पहले स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें पर्याप्त जानकारी दिए बिना बुलडोजर चलाया गया। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है तथा लोग कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं।
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अधिवक्ता ने मांगा कानूनी आधार, निष्पक्ष जांच की उठी मांग
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने प्रशासनिक कार्रवाई के कानूनी आधार पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तो उस दौरान की जाने वाली किसी भी कार्रवाई का स्पष्ट कानूनी आधार और आदेश सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन यह बताए कि किस आदेश, अधिसूचना या कानूनी प्रावधान के तहत यह कार्रवाई की गई। अधिवक्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि कार्रवाई में न्यायालय के आदेशों या कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसके खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया जा सकता है।
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पुराने प्रशासनिक आदेशों का हवाला देकर पक्ष ने जताई आपत्ति
विरोध कर रहे पक्ष ने एसडीओ और जिला प्रशासन स्तर से पूर्व में जारी आदेशों का हवाला देते हुए दावा किया है कि कई मामलों में उनके पक्ष में निर्णय दिए जा चुके हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसे आदेश मौजूद हैं, तो बुधवार को की गई कार्रवाई किस आधार पर की गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। प्रभावित लोगों ने कार्रवाई में टाटा स्टील की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। हालांकि जमीन के वास्तविक स्वामित्व, कब्जे की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधानिकता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और न्यायालयी आदेशों के आधार पर ही सामने आ सकेगा।
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सुनवाई से पहले बढ़ी कानूनी सरगर्मी, प्रशासन के पक्ष का इंतजार
विवादित जमीन पर हुई कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित है। यही कारण है कि कार्रवाई के समय और उसके कानूनी आधार को लेकर बहस और तेज हो गई है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति न्यायालय में उपलब्ध रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी। अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई के दौरान किन आदेशों का पालन किया गया और क्या यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थी। आने वाले दिनों में प्रशासन, टाटा स्टील और प्रभावित पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।






















