रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप की मांग
विस्थापित परिवारों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की जगी उम्मीद
जेबी लाइव, रिपोर्टर
रांची/जमशेदपुर : पोटका विधायक संजीव सरदार ने यूसीआईएल की तुरामडीह, नरवा, जादूगोड़ा, बांदूहुड़ांग और बागजामदा माइंस से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों की लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करते हुए केंद्र सरकार के समक्ष विस्थापितों की समस्याओं को मजबूती से उठाएं और उन्हें उनका अधिकार दिलाने की दिशा में पहल करें। इस दौरान घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन और बहरागोड़ा विधायक समीर मोहंती भी मौजूद रहे। विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई परिवारों ने यूसीआईएल की परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दी और विस्थापन का दर्द झेला, लेकिन आज भी उन्हें रोजगार और अन्य सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि देने वाले परिवारों के साथ न्याय होना आवश्यक है।
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आश्रितों को नौकरी और बुनियादी सुविधाएं देने की उठी मांग
मुख्यमंत्री के समक्ष विधायक ने बताया कि कई विस्थापित परिवारों को अब तक नौकरी नहीं मिली है। वहीं नौकरी के दौरान जिन विस्थापित कर्मचारियों की मृत्यु हो गई, उनके आश्रितों को भी रोजगार से वंचित रखा गया है। कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके परिवार आज भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रभावित परिवारों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि वर्षों से विस्थापित परिवार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब उनके मुद्दों का स्थायी समाधान आवश्यक हो गया है। क्षेत्र के लोगों की अपेक्षा है कि सरकार इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।
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त्रिपक्षीय समझौतों के बावजूद नहीं हुआ पालन, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन
विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया कि यूसीआईएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और विस्थापित प्रतिनिधियों के बीच पूर्व में कई दौर की त्रिपक्षीय वार्ताएं हो चुकी हैं। इन बैठकों में विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बनने के बावजूद अधिकांश मामलों में समझौतों को धरातल पर लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी कागजों पर सहमति तो देती है, लेकिन बाद में वादों को पूरा नहीं करती, जिससे विस्थापित परिवारों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। विधायक ने कहा कि जिन लोगों ने देशहित और विकास के लिए अपनी जमीन दी, उनके साथ न्याय होना चाहिए तथा लंबित रोजगार और आश्रितों की नियुक्ति के मामलों का जल्द निष्पादन होना चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार जल्द ही इस विषय पर आवश्यक पहल करेगी और समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।
























