रोजगार और स्थानीय मांगों को लेकर जारी आंदोलन के बीच प्रबंधन ने बुलाई बैठक
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : गुवा स्थित सेल की रांजाबुरु खदान में सारंडा विकास समिति जामकुंडिया-दुईया के बैनर तले चल रही अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी के बीच सोमवार को सेल प्रबंधन ने प्रभावित गांवों के मुंडा-मानकी और ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। आंदोलन स्थानीय रोजगार और पूर्व में हुए समझौतों के क्रियान्वयन की मांग को लेकर शुरू किया गया है। हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख ग्रामीण प्रतिनिधि, मुंडा-मानकी, लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू सांडिल समेत कई प्रमुख लोग बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके बावजूद 12 गांवों के मुंडा एवं ग्रामीण प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लेकर अपनी बात रखी। वार्ता के दौरान क्षेत्र में चल रहे आंदोलन और ग्रामीणों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसे भी पढ़ें : Potka : एक सप्ताह से अंधेरे में सीधाडीह के 30 परिवार, ट्रांसफार्मर नहीं बदलने पर ग्रामीणों का प्रदर्शन
दिसंबर तक रोजगार से जोड़ने का आश्वासन, ग्रामसभा से मांगी गई सूची
सीजीएम चंद्रभूषण कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में महाप्रबंधक (एचआर) प्रवीण कुमार सिंह, महाप्रबंधक (शिक्षा) अनर्व डे, महाप्रबंधक (ईएंडएल) डॉ. टीसी आनंद, उप महाप्रबंधक (सीएसआर) अनिल कुमार तथा मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि पूर्व में 50 बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार देने पर सहमति बनी थी और कंपनी अपने इस निर्णय पर कायम है। इसके लिए सभी संबंधित गांवों में ग्रामसभा आयोजित कर पात्र बेरोजगार युवाओं का चयन करने तथा सूची ग्रामसभा के पैड पर तैयार कर गुवा थाना प्रभारी को सौंपने का आग्रह किया गया। थाना प्रभारी को इस प्रक्रिया का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। प्रबंधन ने बताया कि सूची प्राप्त होने के बाद चयनित युवाओं को दिसंबर तक रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
इसे भी पढ़ें : Musabani : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जन्मदिन पर मुसाबनी में पौधारोपण, “एक पेड़ हेमंत दा के नाम” अभियान को मिला जनसमर्थन
12 युवाओं के नाम मिले, आंदोलनकारी बोले— ठोस कार्रवाई के बिना नहीं हटेगी नाकेबंदी
बैठक के दौरान प्रबंधन ने जानकारी दी कि अब तक 12 बेरोजगार युवाओं के नाम प्राप्त हुए हैं, जिनका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। शेष नाम ग्रामसभा की अनुशंसा के बाद थाना के माध्यम से भेजे जाएंगे। दूसरी ओर आंदोलनरत ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें वार्ता की सूचना मिली थी, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी कारण 10 अगस्त से शुरू की गई अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी जारी रखी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा और जब तक रोजगार तथा अन्य लंबित मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।























