आदिवासी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा को लेकर हुआ विचार-मंथन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : जादूगोड़ा के सिद्धू-कान्हू मोड़ चौक पर विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में माननीय देश परगना बैजू मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ आसपास के विभिन्न गांवों के ग्राम प्रधान, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के गणमान्य लोग भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और पहचान को सशक्त बनाए रखने पर विस्तृत चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जिसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में समाज के आर्थिक, शैक्षणिक, बौद्धिक और राजनीतिक विकास को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया तथा समाज को संगठित और जागरूक बनाने पर बल दिया गया।
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शिक्षा और जागरूकता को बताया विकास की कुंजी, समाज ने लिया एकजुट रहने का संकल्प
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश परगना बैजू मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों से होती है। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को संरक्षित रखते हुए समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत और अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित ग्राम प्रधानों और समाज के प्रतिनिधियों ने भी आदिवासी हितों की रक्षा तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से “जय झारखंड” का नारा लगाकर आदिवासी एकता, सामाजिक समरसता और झारखंडी पहचान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।























