सांसद बिद्युत बरण महतो समेत चार जनप्रतिनिधियों ने गृह मंत्री को सौंपा मांग पत्र, सकारात्मक पहल का मिला भरोसा
कई राज्यों में बोली और समझी जाती है कुड़माली, आठवीं अनुसूची में शामिल होने से होंगे कई लाभ
जेबी लाइव, रिपोर्टर
नई दिल्ली : जमशेदपुर सांसद बिद्युत बरण महतो, पुरुलिया सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी तथा राज्यसभा सांसद खीरू महतो ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई। सांसदों ने गृह मंत्री को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए कहा कि कुड़माली भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक भाषा का प्रश्न नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और विरासत से जुड़ा विषय है। सांसदों ने बताया कि संसद सहित विभिन्न मंचों पर भी समय-समय पर यह मुद्दा उठाया जाता रहा है और अब इस दिशा में ठोस पहल की आवश्यकता है।
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पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में व्यापक है कुड़माली का दायरा
सांसदों ने गृह मंत्री को बताया कि कुड़माली भाषा पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण भाषा है। इसके अलावा झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी यह व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर में बड़ी संख्या में कुड़माली भाषी समुदाय निवास करता है। वहीं झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां सहित कई जिलों में इस भाषा का प्रचलन है। ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों में भी कुड़माली बोलने वालों की बड़ी आबादी है। सांसदों ने कहा कि यह भाषा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों को जोड़ने वाली जीवंत भाषायी विरासत है।
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लोक संस्कृति और साहित्य से गहराई से जुड़ी है भाषा
मांग पत्र में कुड़माली भाषा की सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समृद्धि का भी उल्लेख किया गया। सांसदों ने कहा कि कुड़माली का अपना समृद्ध लोक साहित्य, लोकगीत, कविता, लोककथाएं और मौखिक परंपराएं हैं। झुमर, टुसू, करम और छऊ जैसी प्रसिद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से भी इस भाषा का गहरा संबंध रहा है। वर्षों से सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों और शिक्षाविदों द्वारा कुड़माली भाषा एवं साहित्य के संरक्षण और विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि संवैधानिक मान्यता मिलने से इन प्रयासों को नई दिशा और मजबूती मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए इस सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सकेगा।
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मान्यता मिलने से शिक्षा, शोध और संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
सांसदों ने गृह मंत्री के समक्ष तर्क रखा कि कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने से भाषा और साहित्य के संरक्षण एवं विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही भाषा से संबंधित शैक्षणिक, अनुसंधान और प्रकाशन कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। कुड़माली भाषी समुदाय को संस्थागत सम्मान प्राप्त होगा तथा लोक साहित्य, लोक कला और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सहायता मिलेगी। सांसदों ने कहा कि यह कदम भारत की भाषायी और सांस्कृतिक विविधता को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने का आग्रह किया।
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गृह मंत्री ने कहा- सभी भारतीय भाषाओं के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मुलाकात के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सांसदों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि यह मांग जायज तथा व्यापक जनहित से जुड़ी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इस विषय पर सकारात्मक पहल करेगी। अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार सभी भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने यह भी बताया कि कुड़माली भाषा के साथ कुछ अन्य भाषाओं के प्रस्ताव भी लंबित हैं और सरकार उन पर विचार कर रही है। गृह मंत्री ने संकेत दिया कि जल्द ही कुड़माली सहित लंबित भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इस आश्वासन से कुड़माली भाषी समुदाय में उत्साह का माहौल है और इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।























