जेएचआरसी ने कहा- अपराध के बाद नहीं, अपराध होने से पहले पैदा हो कानून का भय
शहर में बढ़ते अपराध को लेकर जताई चिंता, अपराध नियंत्रण के लिए जवाबदेही तय करने की मांग
जेएचआरसी ने प्रशासन को सौंपी 90 दिनों की कार्ययोजना
अपराध नियंत्रण पर स्पष्ट समयसीमा की उठी मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : शहर में लगातार बढ़ रही हत्या, लूट, चेन स्नैचिंग, रंगदारी, हथियारबाजी और नशे से जुड़े मामलों को लेकर झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन (जेएचआरसी) ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से अपराध नियंत्रण के लिए 90 दिनों की ठोस कार्ययोजना लागू करने तथा जवाबदेही तय करने की मांग की है। जेएचआरसी के अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कहा कि केवल अपराध होने के बाद गिरफ्तारी और कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं है। जरूरत ऐसी प्रभावी पुलिस व्यवस्था की है, जिसमें अपराधी अपराध करने से पहले ही कानून और पुलिस की कार्रवाई से भयभीत हों। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रही घटनाओं ने आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ाई है, जिसे दूर करने के लिए ठोस और परिणाम आधारित रणनीति आवश्यक है।
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थाना प्रभारी से लेकर एसएसपी स्तर तक तय हो जवाबदेही
मनोज मिश्रा ने कहा कि अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल थाना प्रभारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि डीएसपी, एसपी और एसएसपी स्तर तक अपराध नियंत्रण के परिणामों की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तो उसके लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। संगठन का मानना है कि केवल तबादले कर देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अपराध नियंत्रण में अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। जेएचआरसी ने अपराध नियंत्रण की स्वतंत्र निगरानी के लिए आईजी और एडीजी स्तर पर मॉनिटरिंग व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण रिपोर्ट कार्ड जारी करने की भी मांग की है।
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तीन चरणों में लागू करने का दिया गया प्रस्ताव
संगठन ने पुलिस प्रशासन को तीन चरणों में विभाजित 90 दिनों की कार्ययोजना भी सौंपी है। पहले 30 दिनों में अपराधियों की निगरानी, अवैध हथियार और नशे के कारोबार के खिलाफ विशेष अभियान तथा अपराध प्रभावित क्षेत्रों में गहन पेट्रोलिंग का सुझाव दिया गया है। अगले 60 दिनों में लंबित गंभीर मामलों की समीक्षा, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी और संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करने की बात कही गई है। वहीं 90 दिनों के भीतर थाना-वार अपराध नियंत्रण रिपोर्ट सार्वजनिक करने और निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर पुलिस अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि ऐसी कार्ययोजना से अपराध नियंत्रण के प्रयासों को दिशा और पारदर्शिता मिलेगी।
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जनता के लिए नियम हैं तो पुलिस की भी तय हो डेडलाइन
मनोज मिश्रा ने कहा कि आम नागरिकों के वाहन का इंश्योरेंस, प्रदूषण प्रमाणपत्र या ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त होने पर कानून के तहत कार्रवाई और जुर्माना तय है, लेकिन अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस व्यवस्था के लिए कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से संचालित व्यवस्था में अपराध नियंत्रण की भी स्पष्ट डेडलाइन और जवाबदेही होनी चाहिए। यदि निर्धारित 90 दिनों के बाद भी गंभीर अपराधों पर प्रभावी अंकुश नहीं लगता है, तो केवल औपचारिक समीक्षा के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर की पहचान अपराध और भय से नहीं, बल्कि विकास, शांति और सुरक्षित वातावरण से होनी चाहिए। कार्यक्रम में श्याम लाल, जग्गानाथ महंथी, बिनोद कुमार, एस.के. बसु, अभिजीत चंदा, संतोष कुमार, हरदीप सिद्धू, सलावत महतो, रेणु सिंह, शिशिर डे, स्नेहा चंद्रवंशी समेत बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित थे।






















