सेरालडीह से ओडिशा सीमा तक सड़क की बदहाली पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल समेत कई समस्याएं उठीं, 90 गांवों की जीवनरेखा बनी सड़क बदहाल
वीरसिंह देवगम ने भी की मुलाकात, समाधान पर हुई चर्चा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डुमरिया : पोटका विधानसभा क्षेत्र के डुमरिया प्रखंड में सेरालडीह मुख्य सड़क से नरसिंहबहाल, सातबाकरा और बुरूनिया होते हुए ओडिशा सीमा तक जाने वाली लगभग 15 किलोमीटर लंबी सड़क इन दिनों गंभीर बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई सतह और जलजमाव के कारण ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से करीब 90 गांवों के लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं, लेकिन वर्षों से सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। बरसात के मौसम में हालात और भी चिंताजनक हो जाते हैं, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ता है।
इसे भी पढ़ें : New Delhi : कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज, अमित शाह से मिले चार सांसद
बारिश में बढ़ जाती है दुर्घटनाओं की आशंका, गड्ढों और जलजमाव से राहगीरों की बढ़ी मुश्किलें
ग्रामीणों के अनुसार सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता। इससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों, मजदूरों और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को झेलनी पड़ रही है। कई गांवों के लोगों ने बताया कि खराब सड़क के कारण समय पर अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो जाता है, जबकि किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क उनके लिए केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों की मुख्य कड़ी है।
इसे भी पढ़ें : Potka : अतिवृष्टि प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग, मुखिया ने सीओ को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों से मिलकर समस्याओं की जानकारी ली
क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी मिलने के बाद पोटका विधानसभा क्षेत्र की समाजसेवी एवं युवा नेत्री दुखनी सोरेन नरसिंहबहाल पहुंचीं। उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को सुना और सड़क की स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि लंबे समय से इस महत्वपूर्ण सड़क की मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। लोगों ने कहा कि सड़क खराब होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सेरालडीह से ओडिशा सीमा तक सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने की मांग दोहराई।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : सिदगोड़ा की विवादित जमीन पर प्रशासन-टाटा स्टील की कार्रवाई से बढ़ा विवाद
सड़क के साथ अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी उठा मुद्दा
दुखनी सोरेन के समक्ष ग्रामीणों ने सड़क के अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी रखीं। ग्रामीणों का कहना था कि खराब सड़क का सीधा असर क्षेत्र की अन्य सेवाओं पर भी पड़ता है। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाने में देरी होती है, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज आने-जाने में कठिनाई होती है और रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी प्रभावित होती है। दुखनी सोरेन ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाना आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीणों के साथ विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
इसे भी पढ़ें : Baharagoda : एनएच-49 पर बड़ा हादसा टला, फ्यूल कंपनी में लगी आग से मचा हड़कंप
जनसमस्याओं के समाधान को लेकर हुई विचार-विमर्श
डुमरिया दौरे के दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्वी सिंहभूम जिला महासचिव वीरसिंह देवगम ने भी दुखनी सोरेन से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। दोनों नेताओं ने क्षेत्र की समस्याओं को संबंधित स्तर पर उठाने और समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने पर चर्चा की। ग्रामीणों का कहना है कि सेरालडीह से ओडिशा सीमा तक जाने वाली यह सड़क 90 गांवों की जीवनरेखा है और इसके शीघ्र निर्माण या व्यापक मरम्मत से हजारों लोगों को राहत मिल सकेगी। ऐसे में सड़क सुधार की मांग अब और तेज होती जा रही है।























