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Gua : गुवा शहीद दिवस को लेकर प्रशासन अलर्ट, शहीद स्थल से पार्किंग व्यवस्था तक किया निरीक्षण

  • संभावित भीड़ और वीआईपी आगमन को देखते हुए सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था की तैयारियां तेज
  • कार्यक्रम से पहले सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा प्रशासन

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : आगामी 8 सितंबर को आयोजित होने वाले गुवा शहीद दिवस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मंगलवार को अधिकारियों की संयुक्त टीम ने गुवा शहीद स्थल, हेलीपैड, सेल फुटबॉल मैदान स्थित सभा स्थल के साथ-साथ लोहार बस्ती और हिरजीहाटिंग में प्रस्तावित पार्किंग स्थलों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए भोजन व्यवस्था से संबंधित स्थानों का भी जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, यातायात संचालन, पार्किंग प्रबंधन और आम लोगों की सुविधाओं पर विशेष चर्चा की गई। साथ ही संभावित हेलीकॉप्टर आगमन को ध्यान में रखते हुए हेलीपैड की स्थिति और आवश्यक तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने कार्यक्रम के दौरान आने-जाने वाले वाहनों और लोगों की आवाजाही को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

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मुख्यमंत्री सहित कई जनप्रतिनिधियों के आने की संभावना, सुरक्षा पर विशेष फोकस

गुवा शहीद दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अब तक किसी भी जनप्रतिनिधि की आधिकारिक उपस्थिति की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी प्रशासन संभावित भीड़ और वीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखकर व्यापक तैयारियों में जुटा है। निरीक्षण के दौरान एसडीओ अरुण उरांव, बीडीओ पप्पू रजक, किरीबुरू एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो, मनोहरपुर एसडीपीओ डेविड डोडराय, किरीबुरू इंस्पेक्टर वासुदेव मुंडा, गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार, नोवामुंडी थाना प्रभारी नयन कुमार सिंह तथा बड़ाजामदा ओपी प्रभारी बालेश्वर उरांव सहित कई पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे। प्रशासन का मुख्य फोकस सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, पार्किंग व्यवस्था और बाहर से आने वाले लोगों की सुविधा सुनिश्चित करने पर है। कार्यक्रम से पहले सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

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Seraikela : SIR-2026 के सफल क्रियान्वयन को लेकर प्रमंडलीय आयुक्त ने की समीक्षा, राजनीतिक दलों से मांगा सहयोग

विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रगति पर हुई चर्चा पारदर्शी एवं निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर 15 सितंबर

  • विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रगति पर हुई चर्चा
  • पारदर्शी एवं निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर जोर
  • 15 सितंबर तक दावा-आपत्ति दर्ज कराने का अवसर, 19 अक्टूबर को प्रकाशित होगी अंतिम सूची
  • BLO और BLA-2 की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण, योग्य मतदाता छूटे नहीं, अपात्र नाम सूची में शामिल न हों
  • जमीनी स्तर पर दावा-आपत्ति प्रक्रिया की निगरानी, समयबद्ध निष्पादन के निर्देश

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला-खरसावाँ : सिंहभूम (कोल्हान) के प्रमंडलीय आयुक्त एवं रोल ऑब्जर्वर रविरंजन कुमार विक्रम की अध्यक्षता में सरायकेला-खरसावाँ समाहरणालय सभागार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य निर्वाचक नामावली के पुनरीक्षण कार्य को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से संपन्न कराना था। इस अवसर पर सरायकेला विधानसभा के विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन, इचागढ़ विधायक सविता महतो, जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त नितिश कुमार सिंह, अपर उपायुक्त जयबर्धन कुमार, जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी पारुल सिंह सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चल रहे कार्यों की समीक्षा की गई तथा राजनीतिक दलों को पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का आग्रह किया गया।

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निर्वाचक नामावली पुनरीक्षण की समय-सीमा और प्रक्रिया की दी गई जानकारी

बैठक में जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी पारुल सिंह ने SIR-2026 के निर्धारित कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रारूप निर्वाचक नामावली का प्रकाशन 5 अगस्त 2026 को किया जा चुका है तथा दावा एवं आपत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया 5 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी। अंतिम निर्वाचक नामावली का प्रकाशन 19 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। उन्होंने घर-घर सत्यापन अभियान, गणना प्रपत्र (Enumeration Form) संग्रहण, ASDDF सूची के सत्यापन तथा प्राप्त दावा-आपत्तियों के निष्पादन की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक आवेदन का नियमानुसार परीक्षण किया जा रहा है ताकि पात्र मतदाताओं का नाम सूची में शामिल हो सके और अपात्र व्यक्तियों के नाम हटाए जा सकें।

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राजनीतिक दलों की शंकाओं का समाधान, समन्वय बढ़ाने पर जोर

बैठक के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने निर्वाचन सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित कई सुझाव और शंकाएं प्रस्तुत कीं। संबंधित अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का समाधान करते हुए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई तथा प्राप्त सुझावों पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रमंडलीय आयुक्त रविरंजन कुमार विक्रम ने कहा कि SIR-2026 की सफलता में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA-2) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यों को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दावा एवं आपत्तियों के सत्यापन और निष्पादन में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए, ताकि मतदाताओं का विश्वास निर्वाचन प्रक्रिया में बना रहे।

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चम्पाई सोरेन ने शहरी क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की दी सलाह

बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधायक चम्पाई सोरेन ने विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में मतदाता सत्यापन के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निर्वाचन नामावली लोकतंत्र की आधारशिला है, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी पात्र मतदाता अपना नाम दर्ज कराने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमसम्मत ढंग से संचालित करने की आवश्यकता बताई। वहीं इचागढ़ विधायक सविता महतो ने भी मतदाता जागरूकता बढ़ाने तथा अधिकाधिक लोगों को सत्यापन प्रक्रिया में शामिल करने पर जोर दिया।

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मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर जनसुनवाई और हियरिंग कार्यों का लिया जायजा

समीक्षा बैठक के उपरांत प्रमंडलीय आयुक्त रविरंजन कुमार विक्रम ने सरायकेला विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दावा एवं आपत्ति से संबंधित हियरिंग और जनसुनवाई कार्यों की स्थिति का जायजा लिया तथा संबंधित बीएलओ, ईआरओ और निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त आवेदनों, उनके सत्यापन और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से निर्णय लिया जाए। साथ ही मतदाताओं को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि वे SIR-2026 में सक्रिय भागीदारी निभाएं और समय रहते अपने मतदाता संबंधी दावों एवं आपत्तियों का निपटारा सुनिश्चित करें।

Jamshedpur/Ranchi : सोन जल समझौते पर सरयू राय का सवाल, बोले- झारखंड को एक लोटा पानी भी अतिरिक्त नहीं मिला

1973 के बाणसागर समझौते में ही तय हो चुका था 20 लाख एकड़ फीट पानी का हिस्सा लंबित परियोजनाओं के

  • 1973 के बाणसागर समझौते में ही तय हो चुका था 20 लाख एकड़ फीट पानी का हिस्सा
  • लंबित परियोजनाओं के लिए केंद्र से विशेष पैकेज की मांग
  • अविभाजित बिहार को मिला था 7.75 एमएएफ पानी, उसी से तय हुआ था झारखंड का हिस्सा
  • जल उपलब्धता और उपयोग को लेकर रखे विस्तृत तथ्य
  • कदवन डैम, मंडल डैम और ओरंगा परियोजना अब भी अधूरी
  • दोनों राज्यों के साथ हुई नाइंसाफी, पुराने समझौते के क्रियान्वयन पर होनी चाहिए थी चर्चा

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर/रांची : बिहार और झारखंड के बीच 31 अगस्त को हुए सोन नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते को ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि झारखंड को इसमें एक लोटा पानी भी अतिरिक्त नहीं मिला है। सरयू राय ने कहा कि झारखंड के हिस्से का 20 लाख एकड़ फीट पानी वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते में ही निर्धारित कर दिया गया था। इसलिए हालिया समझौता किसी नए जल आवंटन का दस्तावेज नहीं, बल्कि पहले से तय हिस्सेदारी की पुनर्पुष्टि मात्र है। उन्होंने कहा कि जनता के सामने इस समझौते को नई उपलब्धि के रूप में पेश करना तथ्यों के अनुरूप नहीं है और इसके वास्तविक पहलुओं को सामने लाना आवश्यक है।

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बाणसागर समझौते में पहले से तय था झारखंड का जल हिस्सा

सरयू राय ने बताया कि 1973 के बाणसागर समझौते में अविभाजित बिहार को इंद्रपुरी बराज पर कुल 7.75 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी आवंटित किया गया था। इसमें से लगभग 5 एमएएफ पानी करीब 150 वर्ष पुराने सोन नहर क्षेत्र के लिए सुरक्षित रखा गया था। शेष 2.75 एमएएफ यानी लगभग 27.50 लाख एकड़ फीट पानी बिहार और झारखंड के बीच विभाजित होना था। इसी हिस्से में से झारखंड को 20 लाख एकड़ फीट पानी मिला था। उन्होंने सवाल किया कि जब यह आवंटन पहले से मौजूद था तो हालिया समझौते में नया क्या है। उनके अनुसार, झारखंड को मिलने वाला अधिकांश पानी कनहर और उत्तर कोयल नदी प्रणाली तथा उनकी सहायक नदियों से संबंधित है, जो अंततः सोन नदी में जाकर मिलती हैं। इसलिए इस हिस्सेदारी को नई उपलब्धि बताना भ्रामक है।

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कनहर और उत्तर कोयल बेसिन के पानी पर आधारित है झारखंड का दावा

विधायक सरयू राय ने कहा कि बाणसागर समझौते के समय कनहर नदी में लगभग 24 लाख एकड़ फीट और उत्तर कोयल नदी में करीब 21 लाख एकड़ फीट जल उपलब्धता आंकी गई थी। कनहर नदी से झारखंड को 4.32 लाख एकड़ फीट पानी का अधिकार मिला था, जिसके लिए छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा पर बाराडीह में बांध निर्माण की योजना बनाई गई थी। इसी तरह उत्तर कोयल नदी से 15.627 लाख एकड़ फीट पानी झारखंड के हिस्से में आया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मोहम्मदगंज बराज के माध्यम से इस जल का उपयोग पलामू के हुसैनाबाद, हरिहरगंज तथा बिहार के नवीनगर क्षेत्र की सिंचाई योजनाओं में किया जा रहा है। जबकि शेष 5.373 लाख एकड़ फीट पानी सीधे इंद्रपुरी बराज की ओर बह जाता है। उनका कहना है कि मंडल डैम के निर्माण के बाद इस जल संसाधन का बेहतर और साझा उपयोग संभव हो सकेगा।

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अधूरी परियोजनाओं के कारण नहीं मिल सका जल संसाधनों का पूरा लाभ

सरयू राय ने कहा कि बाणसागर समझौते के बाद झारखंड के कदवन गांव के पास एक बड़े डैम के निर्माण की योजना बनाई गई थी, जिसका शिलान्यास 1980 में तत्कालीन बिहार मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने किया था। लेकिन चार दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह परियोजना धरातल पर नहीं उतर सकी। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त के नए समझौते में संभवतः कदवन डैम निर्माण का उल्लेख है, लेकिन इससे झारखंड को मिलने वाले लाभ और बिहार को मिलने वाले प्रतिफल की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। साथ ही, प्रस्तावित जल विद्युत उत्पादन और उसके बंटवारे के बारे में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि मंडल डैम, ओरंगा परियोजना और पलामू क्षेत्र की कई जल संसाधन योजनाएं वर्षों से लंबित हैं, जिसके कारण झारखंड अपने हिस्से के पानी का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाया है।

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केंद्र से सहायता पैकेज मांगने की जरूरत, समझौते को बताया ‘नई बोतल में पुरानी शराब’

सरयू राय ने 31 अगस्त के समझौते को “नई बोतल में पुरानी शराब” करार देते हुए कहा कि बिहार और झारखंड की सरकारों को नए समझौते का प्रचार करने के बजाय लंबित जल संसाधन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहायता पैकेज की मांग करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के अधूरे रहने में केंद्र सरकार और केंद्रीय जल आयोग की भी भूमिका रही है। उनके अनुसार, वास्तव में बिहार और झारखंड दोनों ही 1973 के बाणसागर समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन से वंचित रहे हैं और दोनों राज्यों के साथ नाइंसाफी हुई है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री की उपस्थिति में हुई बैठक में पुराने समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित परियोजनाओं पर चर्चा होनी चाहिए थी, न कि पहले से तय जल हिस्सेदारी को नई उपलब्धि बताकर प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। हालांकि उन्होंने इस पहल के लिए बिहार और झारखंड के मुख्यमंत्रियों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में लंबित परियोजनाओं को पूरा कर दोनों राज्यों के किसानों और आम लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचाया जाएगा।

Badajamda/Gua : बड़ाजामदा में छात्रा से छेड़खानी और युवकों पर हमले का मामला गरमाया

पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने लिया जायजा, घायलों से अस्पताल में मिले भाजपा नेता आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और न्याय

  • पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने लिया जायजा, घायलों से अस्पताल में मिले भाजपा नेता
  • आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और न्याय की उठाई मांग
  • आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो होगा आंदोलन : बड़कुंवर गागराई

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बड़ाजामदा/गुवा : बड़ाजामदा में एक आदिवासी छात्रा के साथ कथित छेड़खानी और उसके विरोध में सामने आए स्थानीय युवाओं पर हुए हमले के मामले ने राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। भाजपा झारखंड प्रदेश के पूर्व उपाध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने मंगलवार को बड़ाजामदा पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। जानकारी के अनुसार, अमन लॉज में किराये पर रह रहे कुछ युवकों पर एक आदिवासी छात्रा के साथ कथित रूप से छेड़खानी और अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगा है। घटना के विरोध में स्थानीय युवाओं ने आवाज उठाई थी। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोगों ने सुनियोजित ढंग से धारदार हथियारों से युवकों पर हमला कर दिया, जिसमें कई युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज टाटा स्टील के नोवामुंडी अस्पताल में चल रहा है। मामले को लेकर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बना हुआ है और लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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स्थानीय युवाओं पर हमले से क्षेत्र में बढ़ा आक्रोश

घटना की जानकारी मिलने के बाद बड़कुंवर गागराई नोवामुंडी अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कहा कि भाजपा पीड़ित छात्रा, घायल युवकों और उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों की जल्द पहचान और गिरफ्तारी सुनिश्चित करने की मांग की। गागराई ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो भाजपा व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान भाजपा सारंडा मंडल अध्यक्ष महेंद्र महाकुड़, भाजपा नेता अजीत सिंह, राय भूमिज, राजा तिर्की, संजीव राय, अशोक पान सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने पीड़ितों को हर संभव सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

Jamshedpur : आपदा के बाद भी चुनौती खत्म नहीं होती, संपत्ति और संसाधनों को बचाना जरूरी – संतोष कुमार

ZRTI सिनी में तीन रेल जोन के दस मंडलों के 415 रेलकर्मियों को आपदा प्रबंधन और साल्वेज सेवा का प्रशिक्षण

  • ZRTI सिनी में तीन रेल जोन के दस मंडलों के 415 रेलकर्मियों को आपदा प्रबंधन और साल्वेज सेवा का प्रशिक्षण
  • प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के बाद संसाधनों की सुरक्षा पर जोर
  • CPR से लेकर अग्निशमन और रेस्क्यू तकनीकों तक दी गई जानकारी
  • स्टेशन मैनेजर से लेकर लोको पायलट तक प्रशिक्षण में हुए शामिल
  • सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों से प्रशिक्षणार्थी हुए लाभान्वित

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर/सिनी : आपदा के दौरान लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन राहत एवं बचाव कार्य के बाद क्षतिग्रस्त भवनों, रेलवे संपत्तियों, उपकरणों और अन्य महत्वपूर्ण संसाधनों को सुरक्षित करना भी बेहद जरूरी है। आपदा के बाद नुकसान को नियंत्रित करने और उपलब्ध संसाधनों को सुरक्षित रखने में साल्वेज सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह बात राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने जोनल प्रशिक्षण संस्थान (ZRTI), सिनी में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। कार्यक्रम में ईस्ट कोस्ट रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के दस मंडलों से आए कुल 415 रेलकर्मियों को आपदा प्रबंधन एवं साल्वेज सेवा के विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षणार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण कार्यक्रम को तीन सत्रों में संचालित किया गया। प्रार्थना सभा के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर संस्थान के प्राचार्य, उप प्राचार्य, मुख्य अनुदेशक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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साल्वेज सेवा को आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया

अतिथि व्याख्याता के रूप में संतोष कुमार ने रेलकर्मियों को आपदा के दौरान और उसके बाद अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात और आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं के अलावा मानव निर्मित दुर्घटनाओं का असर केवल जनजीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रेलवे के बुनियादी ढांचे, संपत्तियों और आवश्यक संसाधनों को भी व्यापक नुकसान पहुंचता है। ऐसी परिस्थितियों में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित करना और क्षतिग्रस्त संसाधनों को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय पर उचित योजना, प्रशिक्षित टीम और बेहतर समन्वय के साथ किया गया साल्वेज कार्य नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है। इससे महंगे और महत्वपूर्ण उपकरणों एवं रेलवे संपत्तियों को बचाने के साथ-साथ संक्रमण, महामारी और अन्य द्वितीयक खतरों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।

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गोल्डन आवर में त्वरित कार्रवाई और टीमवर्क को बताया अहम

प्रशिक्षण के दौरान रेलकर्मियों को आपदा की स्थिति में गोल्डन आवर के महत्व और इस दौरान त्वरित कार्रवाई की जानकारी दी गई। इसके साथ ही प्राथमिक सुरक्षा उपाय, बाढ़ एवं भूकंप के समय बचाव प्रक्रिया, एम्बुलेंस संचालन, ट्रायेज, प्राथमिक चिकित्सा एवं फर्स्ट एड, CPR, सर्पदंश और डॉग बाइट की स्थिति में प्राथमिक उपचार, अग्निशमन तथा विभिन्न रेस्क्यू तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियों में स्थिति का आकलन करने, उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग करने, तत्काल निर्णय लेने तथा टीम के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी ढंग से काम करने पर विशेष जोर दिया। प्रशिक्षण को सरल, सहज और व्यावहारिक बनाने के लिए पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन और डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया गया, जिससे प्रशिक्षणार्थियों को जटिल परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।

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विभिन्न मंडलों से पहुंचे रेलकर्मियों ने लिया विशेष प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिलासपुर, संबलपुर, खुर्दा, भुवनेश्वर, नागपुर, रायगढ़, रांची, आद्रा, चक्रधरपुर और खड़गपुर समेत विभिन्न मंडलों से रेलकर्मी शामिल हुए। प्रशिक्षणार्थियों में स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर, प्रोबेशनरी स्टेशन मैनेजर, प्रोबेशनरी पैसेंजर ट्रेन मैनेजर, प्रेसर लोको पायलट सहित अन्य रेलकर्मी शामिल थे। अधिकारियों का उद्देश्य विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को आपदा की स्थिति में अपनी जिम्मेदारी समझने और तत्काल प्रभावी कार्रवाई के लिए तैयार करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को यह भी बताया गया कि किसी आपदा के समय व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ यात्रियों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा उपलब्ध संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल करना कितना महत्वपूर्ण है। विभिन्न परिस्थितियों पर आधारित उदाहरणों और प्रस्तुतियों के माध्यम से कर्मचारियों की व्यावहारिक समझ विकसित करने का प्रयास किया गया।

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प्रशिक्षण से आपदा में सही निर्णय लेने का बढ़ा आत्मविश्वास

प्रशिक्षण में शामिल रेलकर्मियों ने संतोष कुमार के व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि विषयों को सरल भाषा और वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाने से आपदा की स्थिति में घबराहट के बजाय सही निर्णय लेने और प्रभावी कार्रवाई करने का आत्मविश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण से आपात परिस्थितियों में बचाव कार्य को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी। समापन अवसर पर संस्थान के मुख्य अनुदेशक ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल सभी अधिकारियों, प्रशिक्षकों और रेलकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में नियमित प्रशिक्षण से कर्मचारियों की दक्षता और तत्परता बढ़ती है। भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने पर जोर दिया गया, ताकि रेलवे कर्मी किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में त्वरित, सुरक्षित और समन्वित तरीके से राहत एवं बचाव कार्य कर सकें।

Gua : सारंडा की मुख्य सड़क पर बढ़ा हादसे का खतरा, टूट रहे गार्डवाल और धंस रही सड़क

लगातार बारिश से सड़क किनारे कटाव तेज, कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच और तत्काल

  • लगातार बारिश से सड़क किनारे कटाव तेज, कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें क्षतिग्रस्त
  • स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच और तत्काल मरम्मत की उठाई मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : पिछले लगभग 15 दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने सारंडा जंगल से होकर गुजरने वाली मुख्य सड़क की स्थिति चिंताजनक बना दी है। सैडल गेट से छोटानागरा के बीच घाटी क्षेत्र में सड़क किनारे बने सुरक्षा गार्डवाल लगातार टूट रहे हैं। टोंटोगड़ा और झाड़बेड़ा के बीच गार्डवाल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह धराशायी हो चुका है, जबकि कई अन्य स्थानों पर भी गार्डवाल क्षतिग्रस्त होकर गिरने की स्थिति में पहुंच गए हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क किनारे की मिट्टी का कटाव तेज हो गया है, जिससे सड़क की मजबूती पर खतरा मंडराने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो सड़क का हिस्सा खाई में समा सकता है और किरीबुरू-बड़ाजामदा से मनोहरपुर के बीच महत्वपूर्ण सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है।

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तितलीघाट पुल में बड़ा होल और झाड़ियों से बढ़ रहा दुर्घटना का जोखिम

सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है। कुछ दिन पहले तितलीघाट के समीप मुख्य पुल में बड़ा होल होने से क्षेत्रवासियों की परेशानी और बढ़ गई है। गार्डवाल टूटने और पुल के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं किरीबुरू से बड़ाजामदा तक सड़क के दोनों किनारों पर उगी घनी झाड़ियां कई मोड़ों पर दृश्यता को बाधित कर रही हैं, जिससे भारी वाहनों और अन्य वाहनों के बीच दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से सड़क, पुल और गार्डवाल की तत्काल तकनीकी जांच कराने, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करने तथा सड़क किनारे उगी झाड़ियों की सफाई कराने की मांग की है, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके।

Jadugoda : जन्माष्टमी पर छोटा गोविंदपुर में सजेगा केदारनाथ धाम का भव्य स्वरूप, 4 सितंबर को होगा उद्घाटन

किशोर क्लब की अनूठी पहल, केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनेगी आकर्षण का केंद्र विधायक मंगल कालिंदी करेंगे पूजा पंडाल का

  • किशोर क्लब की अनूठी पहल, केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति बनेगी आकर्षण का केंद्र
  • विधायक मंगल कालिंदी करेंगे पूजा पंडाल का उद्घाटन

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जादूगोड़ा : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर छोटा गोविंदपुर के सुभाष नगर स्थित किशोर क्लब द्वारा इस वर्ष भव्य जन्माष्टमी पूजा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस बार पूजा पंडाल को उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम मंदिर की भव्य प्रतिकृति के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। क्लब के सदस्यों के अनुसार पंडाल निर्माण में केदारनाथ मंदिर की वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण को सजीव रूप देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को केदारनाथ धाम जैसा दिव्य अनुभव प्राप्त हो सके।

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विशेष विद्युत सज्जा और सांस्कृतिक एकता का संदेश देगा आयोजन

किशोर क्लब द्वारा पंडाल को आकर्षक विद्युत सज्जा और मनमोहक कलात्मक डिजाइन से सजाया जा रहा है। आगामी 4 सितंबर को जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी के हाथों पूजा पंडाल का भव्य उद्घाटन किया जाएगा। क्लब के पदाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव मनाना नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है और आयोजन को यादगार बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

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