- मनोहरपुर प्रखंड के पांच गांवों में अधूरी नल-जल योजनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
- कार्रवाई नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड अंतर्गत लाईलोर, जोजोगुटू, हाकागुई, रायकेरा एवं मकरण्डा गांवों में जल जीवन मिशन के तहत संचालित नल-जल योजनाओं को लेकर वित्तीय अनियमितता, विभागीय लापरवाही और राजकोषीय अपव्यय के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन गांवों में जलमीनार निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और जलापूर्ति से संबंधित कई कार्य लंबे समय से अधूरे अथवा अर्धनिर्मित अवस्था में पड़े हुए हैं। इसके कारण योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है और ग्रामीण आज भी नियमित एवं सुरक्षित पेयजल सुविधा से वंचित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार योजनाओं पर सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद धरातल पर अपेक्षित परिणाम नहीं दिखाई दे रहे हैं। इस मामले को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि संबंधित विभाग और कार्य एजेंसियों की उदासीनता के कारण करोड़ों रुपये की योजनाएं लोगों को लाभ पहुंचाने के बजाय विवाद का विषय बन गई हैं।
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अधूरी नल-जल योजनाओं से ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी
बताया गया कि इस मुद्दे को पहली बार 9 दिसंबर 2025 को पत्रांक BAP/JHD-21/2025 के माध्यम से झारखंड सरकार के मुख्य सचिव के समक्ष उठाया गया था। उस समय सौंपे गए ज्ञापन में जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच झारखंड उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की गई थी। साथ ही जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, एजेंसियों और संवेदकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की भी मांग रखी गई थी। आरोप है कि ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी मामले में कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसी कारण अब पुनः 29 अगस्त 2026 को पत्रांक 36/2026 के तहत मुख्य सचिव को स्मार पत्र भेजकर पुराने ज्ञापन पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग दोहराई गई है। स्मार पत्र में कहा गया है कि यदि समय रहते जांच नहीं कराई गई तो सरकारी धन के दुरुपयोग और योजनाओं में कथित गड़बड़ियों की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
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मुख्य सचिव से उच्चस्तरीय जांच कराने की दोहराई मांग
स्मार पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जल जीवन मिशन का मूल उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, लेकिन अधूरी योजनाओं के कारण ग्रामीणों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। मांग की गई है कि संबंधित गांवों में चल रही तथा अधूरी पड़ी सभी योजनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या निर्माण संबंधी अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों और संवेदकों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कर नियमित जलापूर्ति बहाल करने की भी मांग उठाई गई है। स्मार पत्र भेजने वालों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाते हैं तो ग्रामीणों के हित में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इन आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और जांच प्रक्रिया कब शुरू होती है।




























