अच्छी बारिश और कृषि वर्ष की पूर्णता पर जानताड़ पूजा, सुख-समृद्धि के लिए चढ़ाई गई मुर्गा और बकरे की बलि
परंपरा के साथ सामाजिक एकता को भी मिलती है मजबूती
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डुमरिया : डुमरिया प्रखंड के केंदुआ पंचायत अंतर्गत बादलगोड़ा स्थित घाटदुवार में शुक्रवार को पारंपरिक जानताड़ पूजा का आयोजन श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर 12 मौजा के ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से भाग लेकर क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। ग्रामीणों के अनुसार इस वर्ष क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा होने से कृषि कार्य बेहतर रहा और किसानों को अच्छी उपज की उम्मीद है। इसी खुशी और कृषि वर्ष की पूर्णता के अवसर पर ग्रामीणों ने अपनी परंपरा के अनुरूप घाटदुवार में पूजा-अर्चना कर प्रकृति और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त किया। पूजा के दौरान विभिन्न गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पारंपरिक मान्यताओं के तहत मुर्गा और बकरे की बलि अर्पित कर अच्छी फसल, परिवार की खुशहाली और क्षेत्र के विकास की कामना की।
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अच्छी बारिश से उत्साहित किसानों ने जताया आभार
घाटदुवार जानताड़ पूजा की सबसे बड़ी विशेषता 12 मौजा के ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों की सामूहिक सहभागिता रही। धार्मिक अनुष्ठान पारंपरिक विधि-विधान और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया। सुबह से ही पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी और पूरे दिन लोगों की आवाजाही बनी रही। विभिन्न गांवों से आए ग्रामीणों ने पूजा में शामिल होकर अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त किया। आयोजन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक भागीदारी ने ग्रामीण संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।
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सामूहिक आस्था बनी आयोजन की सबसे बड़ी पहचान
पूजा-अर्चना में दिहरी बाबा भुपति नायेक, संतुष नायेक, करुणाकर नायेक, परशुराम नायेक, शिरू मुर्मू, धारमल मार्डी, दांदु मार्डी, टुकाई मार्डी और माधुराम मुर्मू सहित विभिन्न मौजा के ग्राम प्रधानों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। सभी ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की। ग्रामीणों का मानना है कि यह पूजा उनके पूर्वजों से चली आ रही परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। आयोजन में युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही, जिससे परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश मिला।
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ग्राम प्रधानों और युवाओं की रही सक्रिय भागीदारी
दिहरी बाबा भुपति नायेक ने कहा कि घाटदुवार जानताड़ पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का भी माध्यम है। ऐसे आयोजन ग्रामीण समाज को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और आपसी सहयोग तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिक पूजा-अर्चना से गांवों के बीच संबंध मजबूत होते हैं और परंपराओं को संरक्षित रखने की प्रेरणा मिलती है। घाटदुवार में आयोजित यह पूजा 12 मौजा के ग्रामीणों की साझा आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आई।
























