सिलाई और घर की जिम्मेदारियों के साथ पूरी की पढ़ाई, एजुकेट गर्ल्स के प्रगति कार्यक्रम ने दिया सहयोग
10वीं के बाद आगे की पढ़ाई और रोजगार का लक्ष्य
जेबी लाइव, रिपोर्टर
मुंगेर : आर्थिक परिस्थितियों के कारण 12 वर्ष की उम्र में पढ़ाई छोड़ने वाली मिर्जापुर गांव की नाज़िया परबीन ने आठ साल बाद शिक्षा की राह पर लौटकर मिसाल पेश की है। नाज़िया ने बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (बीबोस) से 10वीं की परीक्षा 81 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। चार बहनों में सबसे बड़ी नाज़िया को परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वर्ष 2017 में पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं होने के कारण उन्होंने घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए लुधियाना का रुख किया। वहां एक फैक्टरी में करीब सात हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करते हुए वह अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा माता-पिता और छोटी बहनों की जरूरतों के लिए भेजती थीं।
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आर्थिक मजबूरी में छूटी पढ़ाई, परिवार के लिए काम करने लगीं नाज़िया
नाज़िया के जीवन में बदलाव तब आया, जब वह छुट्टी के दौरान अपने गांव लौटी थीं। इसी दौरान उनके गांव में एजुकेट गर्ल्स का प्रगति कार्यक्रम शुरू हुआ। गांव की प्रेरक और सामुदायिक कार्यकर्ता ने नाज़िया की परिस्थितियों को समझते हुए उनके घर जाकर दोबारा पढ़ाई शुरू करने के विकल्प की जानकारी दी। शुरुआत में नाज़िया ने पढ़ाई के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी काफी हद तक उन्हीं पर थी। उन्हें चिंता थी कि नौकरी, घर की जिम्मेदारियों और पढ़ाई को एक साथ कैसे संभाल पाएंगी। प्रेरक ने उन्हें बताया कि प्रगति शिक्षण शिविर और मुक्त विद्यालय के माध्यम से नियमित स्कूल जाए बिना भी 10वीं की तैयारी की जा सकती है। पढ़ाई के खर्च का बोझ भी उन पर नहीं पड़ेगा।
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गांव की प्रेरक ने दिखाई दोबारा पढ़ाई शुरू करने की राह
प्रेरक की बात पर नाज़िया ने विचार किया और अपनी परिस्थितियों के अनुसार रास्ता तलाशा। उन्हें सिलाई का काम आता था। उन्होंने तय किया कि लुधियाना में नौकरी करने के बजाय गांव में रहकर सिलाई का काम करेंगी। इससे वह परिवार की आर्थिक मदद भी कर सकेंगी और पढ़ाई के लिए समय भी निकाल पाएंगी। वर्ष 2025 में उन्होंने आठ साल के अंतराल के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू की। दिन में सिलाई का काम करने के साथ वह प्रगति शिक्षण शिविर में पढ़ाई करतीं और घर के कामकाज में भी हाथ बंटाती रहीं। उन्होंने अपने दैनिक जीवन को इस तरह व्यवस्थित किया कि आर्थिक जिम्मेदारियों के साथ शिक्षा भी जारी रह सके। धीरे-धीरे पढ़ाई में उनकी रुचि बढ़ती गई और परीक्षा की तैयारी मजबूत होती गई।
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सिलाई के साथ पढ़ाई, जिम्मेदारियों के बीच बनाया समय
पढ़ाई के दौरान नाज़िया के परिवार में उनकी शादी की तैयारियां भी शुरू हो गईं और तारीख तय होने लगी। हालांकि नाज़िया ने स्पष्ट किया कि वह पहले 10वीं की परीक्षा की तैयारी पूरी करना चाहती हैं और परीक्षा के बाद ही शादी के विषय में आगे बढ़ेंगी। उनके होने वाले पति ने भी उनके फैसले का सम्मान किया और उनका साथ दिया। इसके बाद नाज़िया ने पढ़ाई पर अपना ध्यान बनाए रखा। प्रगति कार्यक्रम के सहयोग, शिक्षण शिविर में नियमित अध्ययन और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने 10वीं की परीक्षा में 81 प्रतिशत अंक हासिल किए। परीक्षा परिणाम सामने आने के बाद परिवार में खुशी का माहौल बना। उनकी उपलब्धि ने छोटी बहनों को भी अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
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शादी से पहले परीक्षा पूरी करने के फैसले पर मिली परिवार की सहमति
10वीं पास करने के बाद नाज़िया अब आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अच्छी शिक्षा हासिल कर बेहतर रोजगार का अवसर प्राप्त करना और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में योगदान देना है। नाज़िया की कहानी बताती है कि आर्थिक जिम्मेदारियों और लंबे अंतराल के बावजूद उपयुक्त अवसर मिलने पर शिक्षा की राह दोबारा पकड़ी जा सकती है। सिलाई उनके लिए केवल आय का साधन नहीं बनी, बल्कि इसी काम के साथ उन्होंने पढ़ाई के लिए समय भी निकाला। आठ साल बाद शिक्षा की दुनिया में लौटकर 81 प्रतिशत अंक हासिल करना उनके लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब वह आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं।
























