महंगाई भत्ता, ग्रेच्युटी, आवास भत्ता, लोन और यूनिफॉर्म भत्ते समेत विस्थापितों के मुद्दे उठाए
यूनिफॉर्म भत्ता और विस्थापितों के मुद्दे पर प्रबंधन से आर-पार की तैयारी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : यूसिल मजदूरों की लंबित मांगों पर प्रबंधन की कथित अनदेखी और मजदूर संगठनों के बीच संवादहीनता को लेकर कंपनी की मान्यता प्राप्त श्रमिक संगठन यूसिल लेबर यूनियन ने नाराजगी जताई है। यूनियन के महामंत्री प्रेम कुमार सिंह ने कहा कि विस्थापितों, रैयतों और यूसिल कर्मियों से जुड़ी लंबित मांगों पर यदि प्रबंधन जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेता है तो यूनियन आंदोलन करने को मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी यूसिल प्रबंधन की होगी। प्रेम कुमार सिंह ने बताया कि कंपनी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, लेकिन इसके अनुरूप सेवानिवृत्ति लाभ के रूप में मिलने वाली ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख करने का प्रावधान अब तक लंबित है।
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महंगाई भत्ता बढ़ने के बाद ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने की मांग तेज
यूनियन महामंत्री ने मकान भत्ता बढ़ाने की मांग पर भी प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 25 वर्ष का सेवाकाल पूरा करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली कलाई घड़ी के वितरण में भी अनियमितता की शिकायत है। कई सेवानिवृत्त मजदूरों को अब तक घड़ी नहीं मिली है, जिसे तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा वर्षों पुराने हाउस बिल्डिंग लोन और मोटरसाइकिल लोन की राशि में मौजूदा जरूरतों के अनुरूप वृद्धि करने की मांग भी उठाई गई। प्रेम कुमार सिंह ने नॉन-रिफंडेबल पीएफ राशि के भुगतान में सात बार की बाध्यता समाप्त करने की मांग की, ताकि कर्मचारियों को बच्चों की उच्च शिक्षा और मेडिकल जरूरतों के समय पीएफ राशि का उपयोग करने में सुविधा मिल सके।
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पीएफ और लोन की सुविधाओं में बदलाव की मांग, सेवानिवृत्त कर्मियों का मुद्दा भी उठा
यूनिफॉर्म भत्ते के मामले में भी यूनियन ने प्रबंधन के रवैये पर आपत्ति जताई। प्रेम कुमार सिंह ने कहा कि यूसिल कर्मियों का यूनिफॉर्म वर्ष 2018 से लंबित है और इसे कोर्ट के मामले का हवाला देकर लगातार टाला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला न्यायालय में था तो प्रबंधन ने यूनियन नेताओं के साथ समझौता किस आधार पर किया। उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान होना चाहिए। साथ ही यूसिल के विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों से संबंधित मांगों को भी प्राथमिकता के आधार पर हल करने की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि प्रबंधन इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है और क्या बातचीत से समाधान निकलता है या यूनियन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ता है।























