धनबाद न्यायाधिकरण में 15 अक्टूबर को हुई सुनवाई
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ ने श्रम कानूनों की अनदेखी का लगाया आरोप
रमा पांडे बोले—नियमों के तहत लागू हो बायोमेट्रिक उपस्थिति सिस्टम
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : सेल की खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने को लेकर चल रहे विवाद में 15 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय सरकारी औद्योगिक न्यायाधिकरण (सीजीआईटी), धनबाद में सुनवाई हुई। झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के अनुसार, सुनवाई के दौरान सेल प्रबंधन आवश्यक साक्ष्य और प्रमाण संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि मामले की सुनवाई के दौरान प्रबंधन का कोई अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ। यह विवाद 15 जून 2026 से खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के प्रयास से जुड़ा है। संघ का कहना है कि प्रबंधन ने टाइम ऑफिस से कर्मचारियों के उपस्थिति कार्ड हटा दिए थे, जिससे कर्मचारियों को बायोमेट्रिक प्रणाली से हाजिरी बनाने के लिए कहा गया। इसके विरोध में कर्मचारियों ने पुरानी व्यवस्था से उपस्थिति दर्ज करने की मांग उठाई थी। हालांकि, सुनवाई और प्रबंधन की अनुपस्थिति को लेकर संघ के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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सेल की खदानों में बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर विवाद, धनबाद में सुनवाई
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के मुताबिक, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच विवाद के कारण चारों खदानों में उत्पादन प्रभावित हुआ। संघ ने इस वजह से सेल को करोड़ों रुपये के नुकसान होने का दावा भी किया है। संगठन ने औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की धारा 33 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कर्मचारियों की सेवा शर्तों में बदलाव करने की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। संघ का कहना है कि न्यायाधिकरण की ओर से प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसका जवाब दाखिल नहीं किया गया। संगठन ने यह भी दावा किया कि चार सुनवाइयों के दौरान प्रबंधन की ओर से अपेक्षित दस्तावेज पेश नहीं किए गए। इन आरोपों पर सेल प्रबंधन का पक्ष उपलब्ध नहीं है। मामले में वास्तविक स्थिति न्यायाधिकरण के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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बायोमेट्रिक विवाद में श्रम कानूनों के पालन पर मजदूर संघ ने उठाए सवाल
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रमा पांडे ने कहा कि कर्मचारी बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली के विरोधी नहीं हैं, लेकिन इसे निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन श्रम कानूनों की अनदेखी कर रहा है। रमा पांडे ने कहा कि कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था में बदलाव करते समय संबंधित नियमों और सेवा शर्तों का पालन करना आवश्यक है। संघ ने मामले में न्यायाधिकरण के समक्ष तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद जताई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई और न्यायाधिकरण के रुख पर कर्मचारियों की नजर बनी हुई है। प्रबंधन की ओर से जवाब और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने के बाद विवाद के कानूनी पहलुओं पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।























