नशे से बच्चों की शिक्षा, पारिवारिक सुख-शांति और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
अभियान को मजबूत करने के लिए मांगा सहयोग
नशामुक्त लाखाईडीह के साथ शिक्षा और बेहतर भविष्य का लक्ष्य
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डुमरिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती लाखाईडीह गांव को नशामुक्त समाज के रूप में विकसित करने की दिशा में ग्राम प्रधान कान्हूराम टुडू लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत सरकार की केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी से मुलाकात कर नशामुक्ति अभियान को मजबूत बनाने और ग्रामीण समाज को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए सहयोग की मांग की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और उससे उत्पन्न सामाजिक समस्याओं की ओर मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया। उनका उद्देश्य गांव में जागरूकता बढ़ाकर लोगों को नशे से दूर करना और एक स्वस्थ, शिक्षित तथा बेहतर सामाजिक वातावरण तैयार करना है।
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नशे के खिलाफ ग्रामीणों को जागरूक करने की पहल, सहयोग की उम्मीद
कान्हूराम टुडू ने बताया कि नशे का दुष्प्रभाव केवल नशा करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरा परिवार प्रभावित होता है। नशे की लत के कारण कई परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ता है। आर्थिक परेशानियों के कारण अभिभावक कई बार अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में असमर्थ रह जाते हैं। इसके अलावा परिवारों में आपसी विवाद, अशांति और सामाजिक समस्याएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर जागरूकता अभियान चलाना होगा। उन्होंने अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की आवश्यकता जताई।
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नशे की लत से बच्चों की पढ़ाई और परिवारों की खुशहाली पर संकट
ग्राम प्रधान ने ग्रामीण समाज में प्रचलित अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नशे से जुड़ी समस्याओं के साथ डायन प्रथा जैसी कुप्रथाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में भय, भेदभाव और आपसी विवाद का कारण बनती हैं। ऐसी सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी जरूरी है। उनका मानना है कि जब ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक अधिकारों और नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा, तभी समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होगा। इसके लिए गांव-गांव में जागरूकता कार्यक्रम चलाने और युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है।
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अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता पर जोर
कान्हूराम टुडू की पहचान केवल लाखाईडीह गांव के ग्राम प्रधान के रूप में नहीं है, बल्कि वे ऑल इंडिया सरना धर्म चेमेद आसड़ा के अगुवा के रूप में भी सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। वे लंबे समय से नशामुक्ति अभियान के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रहने और बेहतर जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनके प्रयासों का उद्देश्य युवाओं को नशे की आदत से बचाकर शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक गतिविधियों की ओर अग्रसर करना है। वे चाहते हैं कि गांव में ऐसा वातावरण बने, जहां परिवारों में सुख-शांति रहे, युवा अपने भविष्य को लेकर जागरूक हों और सामाजिक एकता मजबूत हो। इस दिशा में वे ग्रामीणों को साथ लेकर निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
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सामाजिक बदलाव के लिए कान्हूराम टुडू चला रहे जागरूकता अभियान
लाखाईडीह को नशामुक्त गांव के रूप में पहचान दिलाने के साथ शिक्षा को बढ़ावा देना भी कान्हूराम टुडू की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके दिशा-निर्देश और पहल से नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय भी संचालित हो रहा है, जो शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयासों को दर्शाता है। उनका मानना है कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही आने वाली पीढ़ी को नशे तथा अंधविश्वास के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी से उनकी मुलाकात को नशामुक्ति अभियान के लिए सहयोग जुटाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिलने की उम्मीद है, ताकि ग्रामीण समाज में जागरूकता बढ़े और बच्चों तथा युवाओं के लिए बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो सके।
























