लाइसेंस के अभाव में अक्टूबर 2024 से रक्त सेवा बंद, जनप्रतिनिधियों ने जल्द शुरू कराने की मांग की
सारंडा में 100 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल बनाने की उठी मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : सेल के किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जेनरल अस्पताल में करीब दो वर्षों से ब्लड बैंक की सुविधा बंद रहने से सारंडा क्षेत्र के गरीब एवं गंभीर मरीजों के साथ सेल कर्मियों और आसपास की खदानों में काम करने वाले श्रमिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपात स्थिति में रक्त की जरूरत पड़ने पर मरीजों को टाटा स्टील नोवामुंडी अस्पताल या अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी ने बताया कि अस्पताल का ब्लड बैंक अक्टूबर 2024 से लाइसेंस के अभाव में बंद है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा का बंद रहना गंभीर चिंता का विषय है। रक्त के लिए मरीजों को दूर भेजे जाने से इलाज में देरी के साथ गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है।
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ब्लड बैंक बंद होने से आपातकालीन मरीजों को हो रही परेशानी
ब्लड बैंक को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर 12 सितंबर को जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने किरीबुरू के सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर तथा अस्पताल प्रबंधन से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल में किरीबुरू पश्चिम पंचायत की मुखिया पार्वती कीड़ो, मेघाहातुबुरु उत्तरी पंचायत की मुखिया लिपि मुंडा, मेघाहातुबुरु दक्षिण पंचायत की मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, सामाजिक कार्यकर्ता संतोष पंडा एवं सोनाराम गोप शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने ब्लड बैंक से संबंधित सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर रक्त सेवा बहाल करने की मांग रखी। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं भटकना पड़े, इसके लिए अस्पताल में रक्त की सुविधा बेहद जरूरी है।
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प्रतिनिधिमंडल ने सीजीएम से ब्लड बैंक बहाल करने की मांग की
अस्पताल प्रबंधन ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि ब्लड बैंक को दोबारा संचालित करने के लिए कुछ आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। इनमें एलिजा मशीन की व्यवस्था तथा ब्लड बैंक कक्ष में आवश्यक बदलाव प्रमुख हैं। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर ने इन कार्यों को बजट में शामिल कर अक्टूबर के अंत तक पूरा कराने का भरोसा दिया है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जेनरल अस्पताल सारंडा क्षेत्र का महत्वपूर्ण रेफरल अस्पताल है। आसपास संचालित खदानों में दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। ऐसे में गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल रक्त उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है।
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अक्टूबर के अंत तक जरूरी कार्य पूरा कराने का मिला भरोसा
जनप्रतिनिधियों ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त से भी मामले में हस्तक्षेप कर ब्लड बैंक को जल्द शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सारंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना बेहद जरूरी है। प्रतिनिधिमंडल ने डीएमएफटी समेत विभिन्न माध्यमों से क्षेत्र को मिलने वाले राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में करने की मांग की। साथ ही जरूरत पड़ने पर कम से कम 100 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया, जहां ब्लड बैंक, बेहतर आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध हो। इससे खदानों में होने वाली दुर्घटनाओं समेत गंभीर मरीजों को समय पर उपचार और रक्त उपलब्ध कराया जा सकेगा।




























