नरवा पहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों
छात्रों और ग्राम प्रधानों को दी गई वैज्ञानिक जानकारी
ग्रामीणों और छात्रों ने विशेषज्ञों से पूछे सवाल
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : जादूगोड़ा स्थित यूसिल की नरवा पहाड़ यूरेनियम प्रोजेक्ट के भाभा ऑडिटोरियम में यूरेनियम विकिरण एवं परमाणु ऊर्जा से जुड़ी जानकारियों को लेकर एक व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ग्रामीणों, स्कूली छात्रों, शिक्षकों, समुदाय के नेताओं, ग्राम प्रधानों और क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन यूसिल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) डॉ. कांचम आनंद राव, वित्त निदेशक विक्रम केशरी दास तथा बार्क (मुंबई) के एसोसिएट डायरेक्टर प्रबल चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। आयोजन का उद्देश्य यूरेनियम खनन और विकिरण को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना तथा लोगों को वैज्ञानिक तथ्यों से अवगत कराना था। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने परमाणु ऊर्जा के महत्व और उसके सुरक्षित उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
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जागरूकता अभियान में वैज्ञानिक तथ्यों पर हुई चर्चा

समारोह को संबोधित करते हुए बार्क के एसोसिएट डायरेक्टर प्रबल चौधरी ने न्यूक्लियर एनर्जी की उपयोगिता तथा रेडिएशन मापने वाले उपकरणों की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं यूसिल के सीएमडी डॉ. कांचम आनंद राव ने कहा कि देश का भविष्य ‘जेन जेड’ पीढ़ी के हाथों में है और युवाओं को विज्ञान आधारित सोच अपनाने की जरूरत है। उन्होंने जादूगोड़ा के संबंध में वर्षों से फैलाई जा रही गलतफहमियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ संगठनों और एनजीओ द्वारा यूरेनियम विकिरण को लेकर ऐसी भ्रामक जानकारियां प्रसारित की गई हैं, जिनसे लोगों के बीच अनावश्यक भय का वातावरण बना है। उन्होंने कहा कि तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है, ताकि भ्रम और वास्तविकता के बीच का अंतर स्पष्ट हो सके।
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सीएमडी ने युवाओं से वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील की
कार्यक्रम में जादूगोड़ा हेल्थ फिजिक्स यूनिट (बार्क) के प्रभारी अधिकारी डॉ. एन.के. सेठी ने भी अपने संबोधन में रेडिएशन से जुड़ी आम धारणाओं और वास्तविकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने मनोविज्ञान के ‘इल्यूज़री ट्रुथ इफेक्ट’ का उदाहरण देते हुए बताया कि किसी झूठ को बार-बार दोहराए जाने पर लोग उसे सच मानने लगते हैं। उन्होंने कहा कि जादूगोड़ा के बारे में भी इसी प्रकार की अनेक भ्रांतियां फैलाई गई हैं। डॉ. सेठी ने वैज्ञानिक तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर बताया कि रेडिएशन प्रकृति का हिस्सा है और पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने यह भी कहा कि एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य प्राकृतिक स्रोतों से भी लोग नियमित रूप से विकिरण के संपर्क में आते हैं, इसलिए जादूगोड़ा को केवल रेडिएशन के दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है।
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विशेषज्ञों ने रेडिएशन से जुड़ी भ्रांतियों का किया निराकरण
कार्यक्रम के दौरान छात्रों, ग्रामीणों और महिलाओं ने विकिरण तथा स्वास्थ्य संबंधी अनेक प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया। वक्ताओं ने बताया कि वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप निगरानी और सुरक्षा उपायों के कारण क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। कार्यक्रम में यूसिल और बार्क के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें महाप्रबंधक मनोज कुमार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एम. सिंघई, आर.के. मिश्रा, पी.के. ताम्रकार, एस.के. सेनगुप्ता और पी.के. अधिकारी प्रमुख थे। आयोजन के अंत में प्रतिभागियों ने ऐसे कार्यक्रमों को जनजागरूकता बढ़ाने के लिए उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी इस तरह की पहल जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।




























