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Gua : मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे युवक की मौत, किरीबुरू के मुर्गापाड़ा में शोक की लहर

  • 20 वर्षीय युवक की असामयिक मौत से परिवार और क्षेत्र स्तब्ध

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : किरीबुरू के मुर्गापाड़ा निवासी समर प्रसाद (20 वर्ष), पिता स्वर्गीय संजय प्रसाद की रविवार दोपहर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार समर पिछले कुछ समय से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उपचार करा रहा था। परिजनों ने बताया कि उसका इलाज रांची स्थित रिनपास में चल रहा था और हाल के दिनों में उसकी स्थिति में सुधार भी देखा जा रहा था। घटना के समय वह घर पर मौजूद था। कुछ समय बाद जब परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों को स्थिति की जानकारी मिली तो उसे तत्काल उपचार के लिए सेल अस्पताल, किरीबुरू ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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चाचा-चाची ने पुत्र की तरह किया पालन-पोषण

परिजनों के अनुसार समर के माता-पिता का कई वर्ष पूर्व निधन हो चुका था। इसके बाद उसके चाचा विनोद प्रसाद और चाची ने उसे अपने पुत्र की तरह पाल-पोसकर बड़ा किया। परिवार ने उसकी शिक्षा, देखभाल और उपचार में कोई कमी नहीं छोड़ी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि समर परिवार के साथ ही रहता था और उसके बेहतर स्वास्थ्य के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपचार भी नियमित रूप से कराया जा रहा था। उसकी असामयिक मौत ने न केवल परिवार बल्कि पूरे मुर्गापाड़ा क्षेत्र को दुखी कर दिया है। पड़ोसियों और परिचितों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस घटना को बेहद दुखद बताया है।

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पुलिस ने शुरू की जांच, क्षेत्र में शोक का माहौल

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मौत के कारणों की पड़ताल कर रही है। वहीं समर की मौत की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। लोगों ने कहा कि परिवार ने समर की देखभाल और उपचार के लिए लगातार प्रयास किए थे, इसलिए यह घटना सभी के लिए बेहद पीड़ादायक और हैरान करने वाली है। क्षेत्रवासियों ने दिवंगत युवक को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

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Dumaria : डुमरिया की बदहाल बिजली व्यवस्था पर भाजपा का प्रदर्शन, चार सूत्री मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन

बारिश होते ही ठप हो जाती है बिजली आपूर्ति, अस्ती और रांगामाटिया फीडर की समस्याओं के समाधान की मांग जनता

  • बारिश होते ही ठप हो जाती है बिजली आपूर्ति, अस्ती और रांगामाटिया फीडर की समस्याओं के समाधान की मांग
  • जनता की परेशानी दूर करने के लिए विभाग से ठोस पहल की अपेक्षा

जेबी लाइव, रिपोर्टर

डुमरिया : डुमरिया प्रखंड में लगातार बाधित हो रही विद्युत आपूर्ति और जर्जर बिजली व्यवस्था को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विद्युत विभाग के समक्ष अपनी नाराजगी जताई है। भाजपा प्रखंड अध्यक्ष दिलीप कुमार पांडा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कार्यपालक अभियंता, विद्युत विभाग, जमशेदपुर के नाम सहायक विद्युत अभियंता, घाटशिला के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि डुमरिया विद्युत सब-डिवीजन के अंतर्गत आने वाले अस्ती फीडर एवं रांगामाटिया फीडर की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। हल्की बारिश या बूंदाबांदी होते ही दोनों फीडरों की बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है, जिससे पूरे प्रखंड के लोगों को घंटों अंधेरे में रहना पड़ता है। इसके अलावा कई स्थानों पर खराब इंसुलेटर और तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं को नियमित एवं निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। भाजपा नेताओं ने कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

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अलग और सुदृढ़ विद्युत व्यवस्था की मांग, शीघ्र कार्रवाई का आग्रह

भाजपा द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में चार प्रमुख मांगों को शामिल किया गया है। इनमें अस्ती एवं रांगामाटिया फीडर के लिए 11 केवी एबी स्विच उपलब्ध कराने, रांगामाटिया फीडर में उच्च गुणवत्ता वाले इंसुलेटर लगाने, डुमरिया विद्युत विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की स्थायी पदस्थापना सुनिश्चित करने तथा डुमरिया विद्युत सब-डिवीजन को अस्ती फीडर से जोड़कर प्रखंड के लिए अलग एवं मजबूत विद्युत व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है। भाजपा प्रखंड अध्यक्ष दिलीप कुमार पांडा ने कहा कि यदि समय रहते विद्युत व्यवस्था में आवश्यक सुधार नहीं किया गया तो क्षेत्र की जनता को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने विभाग से जनहित को प्राथमिकता देते हुए मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की। ज्ञापन सौंपने के दौरान सांसद प्रतिनिधि बसंत कुमार मदीना, भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष मृत्युंजय दंडपाट, महामंत्री विशू माझी सहित कई भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे और क्षेत्र की बिजली समस्याओं के समाधान की मांग दोहराई।

Seraikela : आदित्यपुर और कपाली की पेयजल योजनाओं की उपायुक्त ने की समीक्षा, 31 जुलाई तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश

सीतारामपुर 30 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जलापूर्ति में देरी पर नाराजगी कार्यदायी एजेंसियों को समयसीमा में कार्य पूरा करने

  • सीतारामपुर 30 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जलापूर्ति में देरी पर नाराजगी
  • कार्यदायी एजेंसियों को समयसीमा में कार्य पूरा करने का आदेश
  • जनहित से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं : उपायुक्त

जेबी लाइव, रिपोर्टर

सरायकेला-खरसावाँ : जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में नगर निगम आदित्यपुर एवं नगर परिषद कपाली क्षेत्र में संचालित विभिन्न पेयजलापूर्ति योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जुड़को (JUDCO), जिंदल, शापूरजी पालनजी सहित विभिन्न कार्यकारी एजेंसियों द्वारा संचालित योजनाओं की वर्तमान स्थिति, पाइपलाइन बिछाने, जलापूर्ति अवसंरचना निर्माण और शेष कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने योजनाओं की अद्यतन स्थिति की बिंदुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों एवं एजेंसियों से कार्यों की वास्तविक प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पेयजलापूर्ति से जुड़ी परियोजनाएं सीधे आम जनता की मूलभूत आवश्यकताओं से संबंधित हैं, इसलिए इनके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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सीतारामपुर जलशोधन संयंत्र से जलापूर्ति शुरू नहीं होने पर जताई नाराजगी

समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने विशेष रूप से आदित्यपुर-2 स्थित सीतारामपुर 30 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से नियमित पेयजलापूर्ति शुरू नहीं होने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसियों द्वारा 15 जुलाई 2026 तक जलापूर्ति प्रारंभ करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं हो सका। इसके कारण आदित्यपुर क्षेत्र के हजारों लोगों को पेयजल संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपायुक्त ने कहा कि नागरिकों को लंबे समय तक इंतजार कराना उचित नहीं है और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों से देरी के कारणों की जानकारी लेते हुए लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया।

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तकनीकी और प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाने का निर्देश

बैठक में उपायुक्त ने योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही तकनीकी समस्याओं, भूमि संबंधी मामलों, समन्वय की चुनौतियों तथा अन्य अवरोधों की भी समीक्षा की। उन्होंने जुड़को, जिंदल एवं शापूरजी पालनजी के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी बाधाओं का तत्काल समाधान करते हुए कार्य में अपेक्षित गति लाई जाए। उपायुक्त ने कहा कि शेष सभी कार्यों को 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में पूरा कर घर-घर नियमित पेयजलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समयसीमा का पुनः उल्लंघन हुआ या कार्य में अनावश्यक विलंब पाया गया, तो विभागीय नियमों एवं प्रचलित दिशा-निर्देशों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी नियमित निगरानी रखने और प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

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कपाली क्षेत्र की योजनाओं को भी समय पर पूरा करने पर जोर

उपायुक्त ने नगर परिषद कपाली क्षेत्र में संचालित पेयजल योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि पाइपलाइन बिछाने, जलापूर्ति नेटवर्क विस्तार और अन्य अधूरे कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के पूर्ण होने से क्षेत्र के सभी लाभुकों को नियमित और निर्बाध पेयजलापूर्ति का लाभ मिलेगा। बैठक में नगर आयुक्त अजाज अनवर, जुड़को, जिंदल एवं शापूरजी पालनजी के प्रतिनिधियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। उपायुक्त ने सभी कार्यदायी एजेंसियों को जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा करने का निर्देश दिया, ताकि नागरिकों को जल्द पेयजल संकट से राहत मिल सके।

Gua : सारंडा में स्कूल बसों को ग्रामीणों ने रोका, शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग पर प्रदर्शन

बसों की कमी से दर्जनों बच्चे स्कूल जाने से वंचित, अतिरिक्त बस और विद्यालय उत्क्रमण की मांग तेज शिक्षा को

  • बसों की कमी से दर्जनों बच्चे स्कूल जाने से वंचित, अतिरिक्त बस और विद्यालय उत्क्रमण की मांग तेज
  • शिक्षा को विकास का आधार बताते हुए समाधान की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लेकर सोमवार को ग्रामीणों, अभिभावकों और स्कूली बच्चों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। करमपदा गांव के समीप किरीबुरू-थोलकोबाद मुख्य चौक पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सेल किरीबुरू प्रबंधन द्वारा संचालित दोनों स्कूल बसों को रोककर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने हाथों में किताबें और कॉपियां लेकर शिक्षा के अधिकार की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से स्कूल बसों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके कारण क्षेत्र के अनेक बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद न तो सेल प्रबंधन और न ही संबंधित प्रशासनिक विभागों ने समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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हमें पढ़ना है, आगे बढ़ना है’ के नारों से गूंजा प्रदर्शन स्थल

प्रदर्शन के दौरान स्कूली बच्चों ने भावुक अंदाज में अपनी समस्याएं सामने रखीं। बच्चों ने कहा कि वे पढ़-लिखकर अपने माता-पिता और क्षेत्र का नाम रोशन करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। “हम आधी रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे” और “हमें खूब पढ़ना है, जीवन में आगे बढ़ना है” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। अभिभावकों ने बताया कि शिक्षा के प्रति बच्चों में उत्साह तो है, लेकिन परिवहन सुविधा की कमी के कारण उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। कई विद्यार्थी बस में जगह नहीं मिलने के कारण रोजाना घर लौट जाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकता की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

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15 गांवों के विद्यार्थियों के लिए केवल दो बसें, बढ़ी परेशानी

ग्रामीणों के अनुसार सेल की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत करमपदा, थोलकोबाद सहित लगभग 15 गांवों के विद्यार्थियों के लिए केवल दो स्कूल बसें संचालित की जा रही हैं। पहले छात्रों की संख्या कम होने के कारण यह व्यवस्था किसी तरह चल रही थी, लेकिन अब विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से बसों में पर्याप्त जगह नहीं बचती। सुरक्षा मानकों के तहत चालक निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बस में बैठाने से इनकार कर देते हैं, जिसके कारण कई छात्र-छात्राएं प्रतिदिन स्कूल नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों ने बताया कि थोलकोबाद और करमपदा से किरीबुरू की दूरी लगभग 25 से 40 किलोमीटर तक है। क्षेत्र में उच्च कक्षाओं की शिक्षा उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को रोजाना लंबी और कठिन यात्रा करनी पड़ती है। पहाड़ी रास्ते, खतरनाक घाटियां और सीमित परिवहन सुविधा उनकी शिक्षा में गंभीर बाधा बन रही हैं।

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अतिरिक्त बस या विद्यालय उत्क्रमण की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शनकारियों ने समस्या के समाधान के लिए दो प्रमुख मांगें प्रशासन और सेल प्रबंधन के समक्ष रखीं। पहली मांग यह है कि सीएसआर योजना के तहत तत्काल अतिरिक्त स्कूल बस उपलब्ध कराई जाए, ताकि सभी विद्यार्थियों को नियमित और सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचाया जा सके। दूसरी मांग के तहत थोलकोबाद विद्यालय को कम से कम आठवीं कक्षा तक तथा करमपदा विद्यालय को दसवीं या प्लस-टू स्तर तक उत्क्रमित करने की बात कही गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो बच्चों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और सेल किरीबुरू प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप कर सारंडा के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की। उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा ही विकास और सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम है।

Gua : सीआईएसएफ गुवा में मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न

हार्टफुलनेस मेडिटेशन के सहयोग से 52 कार्मिकों को ध्यान, तनाव प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास का दिया गया प्रशिक्षण भविष्य में

  • हार्टफुलनेस मेडिटेशन के सहयोग से 52 कार्मिकों को ध्यान, तनाव प्रबंधन और व्यक्तित्व विकास का दिया गया प्रशिक्षण
  • भविष्य में भी जारी रहेंगे जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) यूनिट जीओएम, गुवा में कार्मिकों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और समग्र व्यक्तित्व विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 17 से 19 जुलाई 2026 तक तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। हार्टफुलनेस मेडिटेशन (श्री राम चंद्र मिशन) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में यूनिट के विभिन्न रैंकों के कुल 52 कार्मिकों ने भाग लिया। कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक हार्टफुलनेस मेडिटेशन के प्रीसेप्टर-सह-ज़ोनल कोऑर्डिनेटर (झारखंड) संजीव कुमार राय ने प्रतिभागियों को ध्यान (मेडिटेशन), मानसिक संस्कारों की शुद्धि (क्लीनिंग ऑफ इम्प्रेशंस) और प्रार्थना की प्रभावी विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते कार्यदबाव और तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। नियमित ध्यान, सकारात्मक सोच और आत्मचिंतन से न केवल मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

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ध्यान और सकारात्मक सोच से तनाव पर नियंत्रण के बताए उपाय

कार्यशाला के दौरान कार्मिकों को ड्यूटी के समय उत्पन्न होने वाले मानसिक दबाव, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और व्यावसायिक तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षक संजीव कुमार राय ने कहा कि मानसिक रूप से मजबूत व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित निर्णय लेने में सक्षम होता है। उन्होंने ध्यान और प्रार्थना को मानसिक शांति प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए प्रतिभागियों को नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित किया। प्रशिक्षण सत्रों में अनुशासित जीवनशैली, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मनियंत्रण जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने विभिन्न अभ्यासों में सक्रिय भागीदारी करते हुए मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के व्यावहारिक उपाय सीखे। तीन दिनों तक चले इस कार्यक्रम में ध्यान एवं प्रार्थना का नियमित अभ्यास कराया गया, जिससे प्रतिभागियों ने आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व को समझा।

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मानसिक स्वास्थ्य को बल की मजबूती का आधार बताया

कार्यशाला के समापन समारोह में उप कमांडेंट रवि रंजन सिंह ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की मजबूती केवल शारीरिक क्षमता पर नहीं, बल्कि उसके कार्मिकों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि तनावमुक्त, आत्मविश्वासी और सकारात्मक सोच रखने वाला कार्मिक अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन कर सकता है तथा संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे कार्यशाला में सीखी गई ध्यान और तनाव प्रबंधन की तकनीकों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। प्रतिभागियों ने भी प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें तनावमुक्त रहकर बेहतर कार्य निष्पादन की प्रेरणा मिली है। सीआईएसएफ प्रबंधन ने भविष्य में भी कार्मिकों के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए ऐसे जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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जर्जर सड़क पर सफर बना जोखिम भरा, राहगीरों को हो रही भारी दिक्कत जेबी लाइव, रिपोर्टर बहरागोड़ा : खंडामौदा राष्ट्रीय

  • जर्जर सड़क पर सफर बना जोखिम भरा, राहगीरों को हो रही भारी दिक्कत

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : खंडामौदा राष्ट्रीय राजमार्ग-49 से भागाकुली गांव तक जाने वाली लगभग 15 किलोमीटर लंबी मुख्य सड़क इन दिनों बदहाली का शिकार बनी हुई है। सड़क की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि स्थानीय ग्रामीणों, वाहन चालकों और राहगीरों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों और उखड़ी हुई सड़क के कारण सफर बेहद कष्टदायक और जोखिम भरा हो गया है। इस मार्ग से क्षेत्र के दर्जनों गांवों के हजारों लोग आवागमन करते हैं। साथ ही स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भी रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में सड़क की हालत और भी खराब हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

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पांच करोड़ की लागत से बनी सड़क फिर हुई जर्जर, मरम्मत की मांग तेज

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2020 में करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क का मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण कार्य कराया गया था, लेकिन उसके बाद से सड़क की देखरेख नहीं होने के कारण यह फिर से जर्जर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे अब यह मार्ग कई स्थानों पर गड्ढों में तब्दील हो चुका है। लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर शीघ्र निर्माण एवं मरम्मतीकरण कार्य शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बेहतर सड़क सुविधा क्षेत्र के विकास और सुरक्षित आवागमन के लिए बेहद जरूरी है।

Potka : ब्रेन मलेरिया से पीड़ित आदिम जनजाति के बच्चों के बीच प्रभारी चिकित्सक ने बांटे वस्त्र

सीएचसी पोटका में इलाजरत बच्चों के चेहरों पर दिखी मुस्कान जेबी लाइव, रिपोर्टर पोटका : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका

  • सीएचसी पोटका में इलाजरत बच्चों के चेहरों पर दिखी मुस्कान

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका के प्रभारी चिकित्सक डॉ. सुकांत सीट ने अपने चिकित्सकीय दायित्व के साथ सामाजिक संवेदनशीलता का परिचय देते हुए ब्रेन मलेरिया से संक्रमित आदिम जनजाति परिवार के बच्चों के बीच वस्त्रों का वितरण किया। अस्पताल में उपचाररत सबर समुदाय के बच्चों को नए वस्त्र मिलने पर उनके चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। इस पहल से अस्पताल में मौजूद परिजनों और अन्य लोगों के बीच भी सकारात्मक संदेश गया। डॉ. सुकांत सीट ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों का मनोबल बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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मरीजों का मनोबल बढ़ाने के लिए की गई पहल

डॉ. सुकांत सीट ने बताया कि कई बार गंभीर रूप से बीमार बच्चे अस्पताल में भर्ती होने के बाद घर जाने की जिद करने लगते हैं, जिससे उपचार प्रभावित होता है। ऐसे बच्चों को अस्पताल में सहज महसूस कराने और उनका उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से वस्त्र भेंट किए गए। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता करना समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है और वे समय-समय पर इस प्रकार के सामाजिक कार्य करते रहते हैं। इस मानवीय पहल की अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक कदम बताया।

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