श्रमिकों ने पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई
किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों में उत्पादन प्रभावित, यूनियनें और श्रमिक एकजुट
गतिरोध बढ़ा तो बड़े औद्योगिक आंदोलन की आशंका
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : सेल प्रबंधन द्वारा बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू किए जाने के निर्णय के खिलाफ सोमवार को चार प्रमुख लौह अयस्क खदानों में व्यापक विरोध देखने को मिला। 15 जून की प्रथम पाली से किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया खदानों के हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से हाजिरी दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन, लोडिंग, परिवहन और अन्य खनन गतिविधियां लगभग पूरी तरह ठप हो गईं। श्रमिकों का आरोप है कि जब वे पूर्व व्यवस्था के अनुसार पंचिंग कार्ड से उपस्थिति दर्ज कराने टाइम ऑफिस पहुंचे तो वहां न तो पंचिंग कार्ड उपलब्ध थे, न रजिस्टर और न ही कोई टाइम कीपर मौजूद था। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी व्यवस्था को बिना पूर्व सहमति और किसी स्पष्ट लिखित आदेश के अचानक समाप्त कर दिया गया, जिससे वे हाजिरी दर्ज किए बिना कार्यस्थल तक नहीं पहुंच सके।
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बायोमेट्रिक लागू होते ही चारों खदानों में प्रभावित हुआ उत्पादन
खदान क्षेत्रों में विरोध-प्रदर्शन का माहौल पूरे दिन बना रहा। कई स्थानों पर कर्मचारी मोटर गैरेज और टाइम ऑफिस के बाहर एकत्रित होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। कुछ जगहों पर टायर जलाकर भी विरोध दर्ज कराया गया। विवाद तब और गहरा गया जब किरीबुरू खदान में 14 जून की रात्रि पाली में कार्यरत श्रमिक ड्यूटी समाप्त होने के बाद कार्ड आउट करने पहुंचे, लेकिन वहां से पंचिंग कार्ड पहले ही हटा लिए गए थे। श्रमिकों का आरोप है कि इस कारण उन्हें घंटों तक टाइम ऑफिस के बाहर इंतजार करना पड़ा। मजदूर नेता राजेंद्र सिंधिया ने कहा कि टाइम ऑफिस से अचानक पंचिंग कार्ड हटाकर कर्मचारियों को बायोमेट्रिक प्रणाली अपनाने के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने इस मामले में कर्मचारियों और यूनियनों की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया है, जिसके कारण चारों खदानों में सामान्य कार्य प्रभावित हुआ है।
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पंचिंग कार्ड हटाने के फैसले पर श्रमिकों में बढ़ा आक्रोश
गुवा के वरिष्ठ मजदूर नेता रामा पाण्डे ने कहा कि बायोमेट्रिक हाजिरी के मुद्दे पर सभी यूनियनें और श्रमिक एकजुट हैं। उन्होंने बताया कि यह मामला वर्तमान में मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), भारत सरकार के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने तक प्रबंधन को पुरानी उपस्थिति प्रणाली जारी रखनी चाहिए। दूसरी ओर मेघाहातुबुरु खदान में भी सुबह से तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में कर्मचारी केंद्रीय टाइम ऑफिस के बाहर जमा रहे, जिससे ड्यूटी बसों के संचालन पर भी असर पड़ा। यूनियनों का आरोप है कि फेस रीडिंग आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को माइंस के स्टैंडिंग ऑर्डर में आवश्यक संशोधन किए बिना तथा यूनियनों को विश्वास में लिए बिना लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कर्मचारियों के अवकाश, सेवा शर्तों और अन्य सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अब तक कोई स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं दिया गया है।
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श्रम आयुक्त के निर्णय तक पुरानी व्यवस्था जारी रखने की मांग
श्रमिक संगठनों का दावा है कि लगभग छह महीने पहले इस विषय पर प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट लिखित आदेश जारी नहीं किया गया। इसी कारण कर्मचारियों में असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। चार प्रमुख लौह अयस्क खदानों में कामकाज प्रभावित होने से सेल प्रबंधन को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान की आशंका जताई जा रही है। वहीं यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है तो इसका असर श्रमिकों की आय और खदानों के उत्पादन पर भी पड़ सकता है। फिलहाल प्रबंधन बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने के अपने निर्णय पर कायम है, जबकि श्रमिक और यूनियनें पुरानी हाजिरी प्रणाली बहाल करने की मांग पर डटी हुई हैं। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह विवाद एक बड़े औद्योगिक आंदोलन का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरे खनन क्षेत्र पर पड़ने की संभावना है।






















