टिनप्लेट अस्पताल के 51 कर्मचारियों ने छंटनी नोटिस को बताया गैरकानूनी, आंदोलन की दी चेतावनी
प्रेस वार्ता में मजदूरों ने प्रबंधन पर लगाया अन्याय का आरोप
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) टिनप्लेट में कार्यरत डॉ. टीसी जॉन मेमोरियल ट्रस्ट के स्थायी मजदूरों ने काम से हटाने के नोटिस के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। गोलमुरी में आयोजित प्रेस वार्ता में कर्मचारियों ने बताया कि टिनप्लेट अस्पताल में फार्मासिस्ट, एम्बुलेंस चालक, अटेंडर, सफाई और सेनिटेशन जैसे स्थायी प्रकृति के कार्यों में करीब 51 कर्मचारी पिछले 25 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि टिनप्लेट कारखाना के स्थायी मजदूरों और उनके परिवारों को अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि टाटा मेन हॉस्पिटल द्वारा टिनप्लेट अस्पताल का अधिग्रहण किए जाने के बाद उन्हें धीरे-धीरे बाहर करने की नीति अपनाई गई और अब अचानक काम से बैठाने का नोटिस जारी कर दिया गया।
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स्थायी कर्मचारी होने का दावा, उपश्रमायुक्त को भी सौंपा गया पत्र
मजदूरों ने कहा कि वे वास्तव में टिनप्लेट अस्पताल के स्थायी कर्मचारी हैं और इसके प्रमाण भी उनके पास मौजूद हैं। प्रेस वार्ता में बताया गया कि लंबे समय तक उनकी उपस्थिति टिनप्लेट अस्पताल प्रबंधन के रजिस्टर में दर्ज की जाती थी, लेकिन बाद में अचानक डॉ. टीसी जॉन ट्रस्ट के रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराई जाने लगी। कर्मचारियों का कहना है कि यह बदलाव उन्हें भविष्य में हटाने की योजना के तहत किया गया। मजदूरों ने बताया कि जब प्रबंधन ने उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू की, तब उन्होंने टीएमएच के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर कार्रवाई रोकने की मांग की थी। इसकी एक प्रति जमशेदपुर उपश्रमायुक्त को भी सौंपी गई है, जहां मामला फिलहाल विचाराधीन है।
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27 मई से टीएमएच गेट पर शुरू होगा अनिश्चितकालीन धरना
प्रेस वार्ता में कर्मचारियों ने घोषणा की कि अपनी मांगों के समर्थन में 27 मई 2026, बुधवार से टीएमएच गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। मजदूरों ने कहा कि यह आंदोलन उनके अस्तित्व और परिवार के भविष्य की लड़ाई है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद अब उन्हें अचानक हटाया जाना अन्यायपूर्ण और अमानवीय है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन को उनकी सेवा अवधि और योगदान को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेना चाहिए। मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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छंटनी से परिवारों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट
मजदूरों ने भावुक होते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद यदि उन्हें नौकरी से हटा दिया गया तो उनके परिवार पूरी तरह बेसहारा हो जाएंगे। कर्मचारियों ने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में रोजगार छिन जाने से उनके सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन और प्रबंधन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उनकी समस्या का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए। प्रेस वार्ता में मजदूरों ने कहा कि वे न्याय मिलने तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर आंदोलन भी करेंगे।























