मान-सम्मान, पेंशन और झारखंडी पहचान की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने बनाई रणनीति
झारखंडी भाषा-संस्कृति और पहचान बचाने की उठी मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
मुरी : सिल्ली प्रखंड के बंता गांव में झारखंड आन्दोलनकारी संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में “जय झारखंड, लड़ कर लिया है झारखंड, लड़ कर लेंगे मान-सम्मान और पेंशन” के नारों के साथ आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 2 जून से मुख्यमंत्री आवास के समक्ष प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की तैयारी करना था। मोर्चा के संस्थापक पुष्कर महतो ने कहा कि सिल्ली और मुरी क्षेत्र के सभी आंदोलनकारी एकजुट होकर इस आंदोलन में भाग लें। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को अब तक राजकीय मान-सम्मान, अलग पहचान तथा उनके परिवारों को रोजगार और नियोजन की गारंटी नहीं मिल पाना गंभीर चिंता का विषय है। साथ ही जेल जाने की बाध्यता समाप्त कर सभी आंदोलनकारियों को 50-50 हजार रुपये सम्मान पेंशन देने की मांग भी उठाई गई।
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झारखंड आन्दोलनकारियों ने अधिकारों को लेकर तेज किया आंदोलन
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड आंदोलन की मूल भावना, झारखंडी भाषा-संस्कृति, माय-माटी और अलग राज्य के मूल्यों की रक्षा नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आंदोलनकारियों ने दिशोम गुरु Shibu Soren को झारखंड आंदोलनकारी का सर्वोच्च सम्मान देने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी करने की मांग उठाई। साथ ही छूटे हुए आंदोलनकारियों के लिए झारखंड आंदोलनकारी चिन्हितिकरण आयोग कार्यालय के पुनर्गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। बैठक में विदेशी महतो, इजहार राही, प्रो. रतनलाल महतो, सरोजनी कच्छप, रोजलीन तिर्की, अंथन लकड़ा और सुबोध कुमार लकड़ा समेत कई आंदोलनकारी मौजूद रहे। सभी ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया।
























