25 लाख की लागत से बनने वाली जाहेरथान घेराबंदी योजना को लेकर पोटका बीडीओ के खिलाफ ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : पोटका प्रखंड के ग्वालकाटा पंचायत अंतर्गत चंदनपुर गांव में 25 लाख रुपये की लागत से प्रस्तावित जाहेरथान घेराबंदी योजना को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पारंपरिक ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में जांच और पुनर्गठन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित लाभुक समिति को अब तक मान्यता नहीं दी गई है। इसको लेकर ग्रामीणों ने पोटका बीडीओ अरुण कुमार मुंडा के खिलाफ नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीडीओ द्वारा पूर्व में पांच सदस्यीय समिति को रद्द कर नई लाभुक समिति के गठन की अनुशंसा की गई थी, लेकिन अब तीसरी बार ग्रामसभा कर नई समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोगों में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है।
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पुनर्गठित समिति को कार्यादेश देने की मांग हुई तेज
ग्रामीणों के अनुसार, पोटका बीडीओ ने पत्रांक संख्या 1147 दिनांक 11 जुलाई 2025 के माध्यम से परियोजना निदेशक, समेकित जनजातीय विकास अभिकरण को पत्र भेजकर पूर्व समिति को रद्द करते हुए पुनर्गठित लाभुक समिति की अनुशंसा की थी। वहीं पत्रांक संख्या 687 एवं 19 अप्रैल के आलोक में बीते 8 मई को पारंपरिक ग्राम प्रधान रामेश्वर हेंब्रम की अध्यक्षता में आयोजित ग्रामसभा में नई लाभुक समिति का चयन किया गया था। इस समिति में मकरो हेंब्रम को अध्यक्ष, जादू हेंब्रम को सचिव तथा सिंगरई हांसदा को कोषाध्यक्ष चुना गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब समिति का चयन और अनुशंसा दोनों हो चुकी है, तो उसे कार्यादेश देने में देरी क्यों की जा रही है। ग्रामीण अब इसी चयनित समिति को जाहेरथान निर्माण का कार्य सौंपने की मांग कर रहे हैं।
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उपायुक्त को ज्ञापन सौंप निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
मामले को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा पोटका बीडीओ द्वारा पूर्व में अनुशंसित लाभुक समिति को ही जाहेरथान घेराबंदी निर्माण का कार्यादेश जारी करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार समिति गठन की प्रक्रिया से विकास कार्य प्रभावित हो रहा है और गांव की धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। उपायुक्त से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में लाभुक समिति के अध्यक्ष मकरो हेंब्रम, अर्जुन हेंब्रम, राम हेंब्रम, साहेब माड़ी, सनातन हेंब्रम, बाडहा हेंब्रम, दुःखु मुर्मू तथा सनातन मुर्मू सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।






















