प्रेम मार्डी के नेतृत्व में पहुंचे ग्रामीणों ने उठाई स्थानीय नियोजन की मांग
मृत कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी और बकाया भुगतान की मांग
कार्रवाई नहीं होने पर कंपनी गेट पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
सात सूत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कंपनी गेट पर अनिश्चितकालीन धरना
जेबी लाइव, रिपोर्टर
सरायकेला : ओसीएल आयरन एंड स्टील लिमिटेड (पूर्व में नीलांचल कंपनी) प्रबंधन पर विस्थापितों और स्थानीय रैयतों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को आंदोलन तेज हो गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता प्रेम मार्डी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में विस्थापित ग्रामीण और स्थानीय रैयत अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने और विस्थापितों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की। इस दौरान प्रेम मार्डी ने जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर विस्थापितों की जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो प्रभावित ग्रामीण कंपनी के मुख्य गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की होगी।
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ओसीएल कंपनी के खिलाफ विस्थापितों का आंदोलन तेज, उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
उपायुक्त कार्यालय के बाहर ग्रामीणों को संबोधित करते हुए प्रेम मार्डी ने कंपनी प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी में लंबे समय तक स्थायी रूप से काम करने वाले कई कर्मचारियों की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो गई, लेकिन उनके आश्रितों और परिवारों को स्थायी नौकरी देने के बजाय ठेकेदार के अधीन मजदूरी का काम कराया जा रहा है। उन्होंने इसे विस्थापित परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि जिन लोगों ने उद्योग की स्थापना के लिए अपनी जमीन दी, उनके परिवारों को आज भी उचित अधिकार और सम्मान नहीं मिल रहा है। प्रेम मार्डी ने कहा कि जेएलकेएम विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई को लेकर गंभीर है और उनके साथ हो रहे कथित अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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मृत कर्मचारियों के आश्रितों को स्थायी नौकरी देने की उठी मांग
प्रेम मार्डी ने स्थानीय युवाओं के नियोजन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन रैयतों ने औद्योगिक इकाई की स्थापना के लिए अपनी कीमती जमीन दी, उन्हें कंपनी में केवल मजदूर के रूप में काम करने का अवसर मिल रहा है। वहीं, बाहरी लोगों को लाकर अच्छे और ऊंचे पदों पर नियुक्त किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि कंपनी में अब तक हुए सभी नियोजनों का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। विशेष रूप से वर्ष 2002 में 131 लोगों को नौकरी देने के किए गए पुराने आश्वासन का विवरण भी सार्वजनिक करने की मांग की गई। उनका कहना था कि विस्थापित परिवारों के अधिकारों, जमीन अधिग्रहण और रोजगार से जुड़े मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को पता चल सके कि उनके साथ किए गए वादों का कितना अनुपालन हुआ है।
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स्थानीय रैयतों को नौकरी में प्राथमिकता और 131 नियोजन का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
ज्ञापन में सात सूत्री मांगें प्रमुखता से उठाई गई हैं। इनमें सभी विस्थापित गांवों के प्रतिनिधियों को शामिल कर विस्थापित ग्राम समिति का गठन और जिला प्रशासन से उसे आधिकारिक मान्यता दिलाना शामिल है। कंपनी की नई नियुक्तियों में इस समिति की सहभागिता सुनिश्चित करने तथा योग्य स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की गई है। इसके अलावा जमीन अधिग्रहण से संबंधित कानूनों, मुआवजे और 131 लोगों को नौकरी देने के पुराने आश्वासन का रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की मांग की गई है। कंपनी की स्थापना से अब तक नियुक्त कर्मचारियों और वर्तमान में कार्यरत स्थायी कर्मियों की सूची सार्वजनिक करने की भी मांग रखी गई है। विस्थापितों का कहना है कि रोजगार और जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता के बिना प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना संभव नहीं है।
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विस्थापित ग्राम समिति के गठन और नई नियुक्तियों में भागीदारी की मांग
ज्ञापन में सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को स्थायी नियोजन के साथ अन्य देय आर्थिक लाभ देने, स्थायी कर्मचारियों का ईएसआई बंद होने की स्थिति में उनके परिवारों के लिए वैकल्पिक चिकित्सा बीमा उपलब्ध कराने तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमानुसार ग्रेच्युटी और अन्य बकाया लाभ तत्काल भुगतान करने की मांग भी शामिल है। ग्रामीणों ने कहा कि कंपनी की स्थापना में स्थानीय लोगों की जमीन और संसाधनों का योगदान रहा है, इसलिए उनके परिवारों को रोजगार, चिकित्सा और आर्थिक सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। अब आंदोलनकारियों ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया है। इस अवधि में मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर कंपनी गेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की चेतावनी दी गई है। फिलहाल सभी की निगाहें जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।
























