नोवामुंडी :पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी में सोमवार सुबह टाटा स्टील के वीटी सेंटर चौक के पास बाइक और स्कूटी के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस सड़क दुर्घटना में टाटा स्टील की महिला कर्मी सुषमा सांडिल और बाइक सवार युवक जगमोहन जेराई गंभीर रूप से घायल हो गए। जगमोहन जेराई जोजो कैंप का निवासी बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों वाहनों के बीच टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक और स्कूटी सवार सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए। हादसे के बाद दोनों घायल सड़क के बीच गंभीर अवस्था में पड़े थे। दुर्घटना देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और तत्काल घायलों की मदद में जुट गए। स्थानीय लोगों की सूचना पर एंबुलेंस पहुंची, जिसके माध्यम से दोनों घायलों को नोवामुंडी टीएमएच अस्पताल ले जाया गया।
जानकारी के अनुसार, सुषमा सांडिल संग्रामसाई से स्कूटी पर सवार होकर अपनी ड्यूटी के लिए निकली थीं। इसी दौरान जोजो कैंप की ओर से जगमोहन जेराई बाइक से नोवामुंडी बाजार की तरफ जा रहा था। बताया जाता है कि वीटी सेंटर चौक के पास दोनों वाहनों के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दोनों को गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। नोवामुंडी टीएमएच में चिकित्सकों ने दोनों का प्राथमिक उपचार किया। हालांकि, उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर स्थित टीएमएच रेफर कर दिया गया। दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर कुछ समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
घटना की सूचना मिलते ही नोवामुंडी थाना पुलिस दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटना की जानकारी ली। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बाइक और स्कूटी को जब्त कर थाने ले गई। इसके बाद पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे और घायलों की स्थिति की जानकारी ली। पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच में जुटी है। हादसे में तेज रफ्तार की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर वीटी सेंटर चौक के आसपास सड़क सुरक्षा और वाहन चालकों की सतर्कता का सवाल खड़ा कर दिया है।
गुवा :सेल की गुवा अयस्क खदान प्रबंधन ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की दिशा में सराहनीय पहल की है। इसके तहत गुवा सेल के लीज क्षेत्र में आने वाले 10 गांवों की चयनित 10 छात्राओं को चिकित्सा क्षेत्र में दो वर्षीय प्रशिक्षण दिलाने के लिए राउरकेला रवाना किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है। चयनित छात्राओं को राउरकेला स्थित डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में दाखिला दिलाया गया है। यहां उन्हें एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफरी) और डीएमएलटी (डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी) से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान छात्राएं चिकित्सा क्षेत्र की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी सीखेंगी। इससे उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने का अवसर मिलेगा।
इस अवसर पर गुवा सेल के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) सी.बी. कुमार ने हरी झंडी दिखाकर छात्राओं से भरी बस को राउरकेला के लिए रवाना किया। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के शैक्षणिक और व्यावसायिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। सीएसआर के तहत शुरू की गई इस योजना से गुवा सेल के लीज क्षेत्र के 10 गांवों की छात्राओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। एएनएम प्रशिक्षण के माध्यम से छात्राएं नर्सिंग और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जानकारी हासिल करेंगी, जबकि डीएमएलटी प्रशिक्षण के जरिए मेडिकल लैब में जांच और अन्य तकनीकी कार्यों का कौशल विकसित कर सकेंगी। दो वर्षीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद छात्राओं के लिए अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा प्रयोगशालाओं में रोजगार तथा करियर बनाने के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
सेल प्रबंधन की इस पहल का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण बेटियों को केवल शिक्षा उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद छात्राएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में भी योगदान दे सकेंगी। विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह पहल छात्राओं के व्यक्तिगत भविष्य के साथ क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक प्रगति के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। छात्राओं की रवानगी के मौके पर महाप्रबंधक सुमन कुमार, सीएसआर विभाग के डीजीएम अनिल कुमार सहित सेल के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने छात्राओं को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
सरायकेला :सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत चमारू पंचायत के रंगामाटिया गांव में सरकारी जमीन की बंदोबस्ती को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में रविवार को गांव में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा आयोजित की गई। ग्रामसभा में ग्रामीणों ने सरकारी जमीन की बंदोबस्ती पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया और जिला प्रशासन से तत्काल रद्द करने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, रंगामाटिया गांव के खाता संख्या 218, प्लॉट संख्या 1003 में कुल 4 एकड़ 40 डिसमिल सरकारी जमीन दर्ज है। इसमें से करीब 25 वर्ष पूर्व एक एकड़ जमीन सुसेन महतो के नाम पर बंदोबस्त की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन का आवंटन निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप होना चाहिए। यदि बंदोबस्ती की शर्तों का पालन नहीं किया गया है, तो सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी को उसकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामसभा में उपस्थित लोगों ने एकमत होकर मांग की कि इस पूरे मामले की जांच कर जमीन को दोबारा सरकारी उपयोग के लिए सुरक्षित किया जाए।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) की धारा 46 तथा संबंधित बंदोबस्ती नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आवंटित जमीन की निर्धारित शर्तों का पालन होना आवश्यक है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि बंदोबस्ती के बाद निर्धारित अवधि तक जमीन पर खेती या दखल-कब्जा नहीं किया गया हो और अन्य शर्तों का उल्लंघन हुआ हो, तो सक्षम प्राधिकारी को बंदोबस्ती रद्द करने का अधिकार है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मामले में बंदोबस्ती की शर्तों का पालन नहीं किया गया है। हालांकि, इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए बंदोबस्ती के मूल दस्तावेजों, आवंटन की शर्तों और जमीन के वर्तमान उपयोग की प्रशासनिक जांच जरूरी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राजस्व अभिलेखों की जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की कि करीब 25 वर्ष पहले की गई बंदोबस्ती नियमानुसार थी या नहीं। उनका कहना है कि सरकारी जमीन का उपयोग गांव के सामुदायिक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए होना चाहिए।
धारा 46 काहवालादेकरग्रामीणोंनेबंदोबस्तीकीवैधतापरउठाएसवाल
ग्रामीणों ने बताया कि यह विवाद पहले भी गांव में तनाव का कारण बन चुका है। पूर्व में उक्त सरकारी जमीन पर एक मकान का निर्माण कराया जा रहा था, जिसे ग्रामीणों ने विरोध करते हुए तोड़ दिया था। ग्रामीणों के अनुसार, उसी स्थान पर गांव के लिए उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने का प्रस्ताव था। ऐसे में मकान निर्माण शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना है कि गांव में स्वास्थ्य केंद्र जैसी आवश्यक सार्वजनिक सुविधा के लिए जमीन उपलब्ध रहनी चाहिए। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सुसेन महतो आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति हैं। उनके पास पहले से कई एकड़ निजी जमीन है और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में उनकी निजी कंपनी भी संचालित होती है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव में भूमिहीन और जरूरतमंद लोगों को सरकारी जमीन की आवश्यकता है, तो एक संपन्न व्यक्ति के नाम पर सरकारी जमीन की बंदोबस्ती किस आधार पर की गई। हालांकि, ये सभी आरोप ग्रामीणों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि होना बाकी है।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनकी प्रमुख मांग है कि खाता संख्या 218, प्लॉट संख्या 1003 की जमीन से संबंधित सभी राजस्व अभिलेखों, बंदोबस्ती दस्तावेजों और निर्धारित शर्तों की जांच कराई जाए। यदि बंदोबस्ती में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसे तत्काल रद्द कर पूरी जमीन को सरकारी उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि भविष्य में इस जमीन पर उप स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल या अन्य जनकल्याणकारी सरकारी संस्थान का निर्माण कराया जा सकता है। इसके लिए जमीन को विवादमुक्त रखना जरूरी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आग्रह किया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लिया जाए, ताकि गांव में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई कानूनी या व्यावहारिक बाधा उत्पन्न न हो। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
सरायकेला :गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ दुष्कर्म के मामले को लेकर राष्ट्रीय कोल सेना का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन ने इस घटना को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताते हुए अब महामहिम राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। इसमें पीड़ित महिला की गरिमा, सुरक्षा और न्याय के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय कोल सेना ने मांग की है कि मामले में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे घटनाक्रम में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाएं पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं और दोषियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
संगठन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले आला अधिकारियों पर ऐसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, जो भविष्य के लिए नजीर बने। कार्रवाई का संदेश पुलिस प्रशासन के प्रत्येक स्तर तक पहुंचना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी शर्मनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इसी मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय कोल सेना की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मामले को लेकर आगे की रणनीति और विरोध के स्वरूप पर चर्चा की गई। बैठक में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष विष्णु बानरा ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़िता को न्याय दिलाना संगठन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केवल प्रत्यक्ष आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि पूरे घटनाक्रम में जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध या लापरवाहीपूर्ण रही है, उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इस अवसर पर संगठन के प्रधान सचिव कोल झारखंड बोदरा भी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रशासनिक लचरता पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक इस मामले में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती और जिला पुलिस प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती, तब तक संगठन का न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है, जिसमें आम नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि हो। राष्ट्रीय कोल सेना ने राष्ट्रपति से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित कराने की मांग की है। संगठन ने संकेत दिया कि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने तक वह इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा।
डुमरिया :वर्षों से सड़क, पुल और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे डुमरिया प्रखंड के ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आया। विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की बेटी एवं समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में विशाल रैली निकाली और डुमरिया प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए क्षेत्र की जर्जर सड़कों की मरम्मत तथा जरूरी स्थानों पर पुल-पुलियों के निर्माण की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। कई गांव आज भी बेहतर सड़क संपर्क से वंचित हैं। बरसात के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से गांवों का संपर्क मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों से कट जाता है। इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों पर पड़ता है। लोगों को रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने हरेबेड़ा से नरसिंहबहाल को जोड़ने वाली नदी पर पुल निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि पुल के अभाव में दोनों क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा जय नदी और शंख नदी पर भी स्थायी पुल निर्माण की मांग की गई। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के दिनों में इन नदियों का जलस्तर बढ़ने से आवागमन बाधित हो जाता है। कई बार लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई और किसानों के कृषि कार्य भी प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि इन तीनों प्रमुख स्थानों पर पुल निर्माण के लिए शीघ्र योजना तैयार कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए। साथ ही छोटी-बड़ी नदियों और नालों पर भी जरूरत के अनुसार पुल-पुलियों का निर्माण कराया जाए, ताकि प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों का संपर्क पूरे वर्ष बना रहे।
ग्रामीणों ने डुमरिया प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में जर्जर हो चुकी ग्रामीण सड़कों की मरम्मत कराने और सड़क संपर्क से वंचित गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने की भी मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कई ग्रामीण सड़कें लंबे समय से खराब स्थिति में हैं, जिससे आवागमन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। बारिश के दिनों में सड़कों की स्थिति और खराब हो जाती है। इसके अलावा ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के दौरान रैयती जमीन के उपयोग से जुड़े मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि पूर्व में सड़क निर्माण कार्य के दौरान कई लोगों की निजी जमीन का इस्तेमाल किया गया, लेकिन प्रभावित रैयतों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से ऐसे सभी मामलों की जांच कराकर प्रभावित जमीन मालिकों को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के नाम पर ग्रामीणों की जमीन का उपयोग करने के बाद उन्हें उनके अधिकार से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए। सड़क निर्माण और पुल-पुलियों की योजनाओं के साथ जमीन मुआवजे का मामला भी प्राथमिकता से सुलझाया जाना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान उस समय ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई, जब वे अपनी समस्याएं रखने के लिए प्रखंड मुख्यालय पहुंचे तो बीडीओ और सीओ अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। ग्रामीणों ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब क्षेत्र की जनता अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं को लेकर प्रखंड मुख्यालय पहुंचती है, तब जिम्मेदार अधिकारियों का कार्यालय में मौजूद नहीं रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आम लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। ऐसे में अधिकारियों की अनुपस्थिति से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रखंड मुख्यालय में अधिकारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को अपने कामों के लिए अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े।
समाजसेविका दुखनी सोरेन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि हरेबेड़ा-नरसिंहबहाल, जय नदी और शंख नदी पर पुल निर्माण, जर्जर सड़कों की मरम्मत तथा प्रभावित रैयतों को मुआवजा देने की दिशा में जल्द ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने और अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं आने पर बीडीओ एवं सीओ कार्यालय में तालाबंदी की जाएगी। उनका कहना है कि सड़क और पुल-पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाएं ग्रामीणों का अधिकार हैं। वर्षों से इन सुविधाओं के अभाव में लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कार्यों में कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं। अब ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांगों पर गंभीरता से विचार कर समयबद्ध कार्रवाई करने की अपील की।
आदित्यपुर :आगामी छठ महापर्व एवं दीपावली को देखते हुए आदित्यपुर थाना पुलिस ने अवैध बालू के उठाव और भंडारण के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को पुलिस ने खरकई नदी के विभिन्न घाटों पर छापेमारी कर करीब 200 से 300 बोरी में रखी अवैध बालू बरामद की। पुलिस के अनुसार, आदित्यपुर थाना क्षेत्र के सपड़ा, सालडीह बस्ती, जयप्रकाश उद्यान और राम मढ़ैया बस्ती के समीप नदी किनारे बालू से भरी बोरियां लावारिस हालत में रखी मिलीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा खरकई नदी से अवैध रूप से बालू निकालकर बोरियों में भरकर इन स्थानों पर जमा किया गया था। पुलिस ने सभी बोरियों से बालू निकालकर नदी घाट पर ही बिखेर दिया। इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध रूप से बालू के संग्रहण और परिवहन पर रोक लगाना है। त्योहारों के दौरान नदी घाटों पर गतिविधियां बढ़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने विशेष सतर्कता बरती है।
थाना पुलिस के अनुसार, क्षेत्र में दोपहिया वाहनों और साइकिल के माध्यम से अवैध रूप से बालू का उठाव करने वाले लोगों पर पिछले कुछ दिनों से लगातार नजर रखी जा रही है। विशेष रूप से सपड़ा, सालडीह बस्ती, राम मढ़ैया बस्ती और जयप्रकाश उद्यान के आसपास के नदी घाटों पर निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस का कहना है कि नदी से बालू निकालकर बोरियों में भरने और चोरी-छिपे उसका परिवहन करने की गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार गश्त की जा रही है। छठ महापर्व के दौरान खरकई नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है, ऐसे में घाटों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अवैध बालू उठाव और भंडारण में संलिप्त लोगों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
पोटका : जन वितरण प्रणाली के तहत बेहतर खाद्यान्न वितरण करने वाले पोटका प्रखंड के दो राशन डीलरों को जिला आपूर्ति विभाग की ओर से सम्मानित किया गया। इसको लेकर सिदगोड़ा टाउन हॉल में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में जिले के प्रत्येक प्रखंड से लगातार बेहतर खाद्यान्न वितरण प्रतिशत हासिल करने वाले राशन डीलरों को सम्मानित किया गया। इसी क्रम में पोटका प्रखंड के असगर अली अंसारी और जितेंद्र कुमार गुप्ता को उनके बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मान प्रदान किया गया। विभाग की इस पहल का उद्देश्य राशन वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के साथ डीलरों को बेहतर कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है।
समारोह में एसओआर राहुल आनंद, जिला आपूर्ति पदाधिकारी जुल्फेकार अंसारी, जिला डीलर संघ के अध्यक्ष मोहन साव, महासचिव प्रमोद गुप्ता तथा पोटका डीलर संघ के अध्यक्ष अनवर अली उपस्थित रहे। इसके अलावा राजेंद्र गुप्ता, द्वारिका गुप्ता, स्वपन दत्ता, रेणुका कालेन्दी, अशोक दास और सुलाता मंडल सहित कई राशन डीलर मौजूद थे। उपस्थित अधिकारियों एवं संघ के पदाधिकारियों ने सम्मानित डीलरों के कार्यों की सराहना की।