हाथों में खतियान और मालगुजारी रसीद लेकर जुटे ग्रामीण
ग्रामसभा के अधिकार, आदिवासी स्वशासन और पारंपरिक व्यवस्था की रक्षा का लिया संकल्प
गुवा साई की अस्मिता और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए ग्रामीण एकजुट
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के ऐतिहासिक गांव गुवा साई को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल करने की प्रशासनिक पहल के विरोध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने गांव की पारंपरिक सीमा पर एक साइन बोर्ड स्थापित कर अपनी ग्राम्य पहचान, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुवा साई को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्तावित फैसले को वापस लेने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि गुवा साई केवल एक सामान्य बस्ती नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट परंपरा, संस्कृति और पारंपरिक ग्रामसभा व्यवस्था वाला ऐतिहासिक गांव है। यहां वर्षों से सामाजिक और सामुदायिक मामलों का निपटारा ग्रामसभा के माध्यम से किया जाता रहा है। सरना स्थल के समीप ग्रामसभा की परंपरा गांव की सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।
इसे भी पढ़ें : Chaibasa : चाईबासा में स्कूटी चोरी का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार; चोरी की गाड़ी बरामद
गुवा साई की पारंपरिक पहचान बचाने के लिए ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि गुवा साई को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल करने से उनकी पारंपरिक ग्रामसभा और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा शहरी क्षेत्र में लागू होने वाली कर व्यवस्था, भवन निर्माण संबंधी नियमों और अन्य प्रशासनिक प्रावधानों का अतिरिक्त बोझ भी ग्रामीणों पर पड़ सकता है। उनका मानना है कि नगरपालिका में शामिल होने के बाद गांव की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने के अधिकार कमजोर हो सकते हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन, सांस्कृतिक पहचान और सदियों से चली आ रही परंपराओं को किसी भी परिस्थिति में खोना नहीं चाहते। उनके अनुसार, गांव की पहचान केवल भौगोलिक सीमा से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक व्यवस्था से भी जुड़ी होती है।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : बिग इंग्लिश स्कूल में डालसा का सुरक्षित बचपन अभियान, बच्चों को दी गई कानूनी अधिकारों की जानकारी
नगरपालिका में शामिल होने से ग्रामसभा के अधिकार प्रभावित होने की आशंका
गांव की पारंपरिक सीमा और अस्मिता को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ग्रामीण मुंडा मंगल पूर्ति की अध्यक्षता में ग्रामसभा की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से गांव की सीमा पर पारंपरिक पहचान से संबंधित साइन बोर्ड स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के अनुपालन में रविवार सुबह मुंडा मंगल पूर्ति के दिशा-निर्देश पर ग्रामीणों ने निर्धारित स्थान पर बोर्ड स्थापित किया। इस दौरान ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिला-पुरुष अपने हाथों में जमीन के दस्तावेज, खतियान और मालगुजारी रसीद लेकर पहुंचे। इन दस्तावेजों के माध्यम से ग्रामीणों ने गांव के ऐतिहासिक भूमि संबंधों और अपने पारंपरिक अधिकारों को सामने रखा। ग्रामीणों का कहना था कि खतियान और मालगुजारी रसीद उनकी जमीन से जुड़े अधिकारों के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। इनके आधार पर वे अपनी पुश्तैनी जमीन और गांव की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार अनिमेष अंबष्ट को पितृशोक, पिता अखिलेश्वर प्रसाद महथा का निधन
खतियान और मालगुजारी रसीद लेकर पारंपरिक अधिकारों के समर्थन में उतरे ग्रामीण
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की कि गुवा साई को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही ग्रामसभा की भावनाओं, पारंपरिक व्यवस्था और ग्रामीणों के अधिकारों का सम्मान करते हुए प्रस्तावित निर्णय वापस लिया जाए। ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर गांव की पारंपरिक पहचान और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था को कमजोर करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि वे गांव के विकास के विरोधी नहीं हैं और न ही मूलभूत सुविधाओं के विस्तार में कोई बाधा चाहते हैं। लेकिन विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें स्थानीय लोगों की सहमति, संस्कृति, परंपरा, जमीन और ग्रामसभा के अधिकारों को प्राथमिकता मिले। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में ग्रामसभा के साथ बातचीत कर उनकी चिंताओं का समाधान निकालने की मांग की।
इसे भी पढ़ें : Manoharpur : मनोहरपुर में अवैध अंग्रेजी शराब बिक्री करते युवक गिरफ्तार, 72 बोतलें बरामद
विकास का विरोध नहीं, परंपरा और ग्रामसभा के अधिकारों की रक्षा जरूरी
इस विरोध कार्यक्रम में सारंडा पीढ़ मानकी सुरेश चाम्पिया, ग्रामीण मुंडा मंगल पूर्ति, दिउरी सुशील पूर्ति और डाकुआ जगमोहन पूर्ति सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। इसके अलावा राज पूर्ति, लंका पूर्ति, विनय पूर्ति, हेमंत पान, सुमित्रा पूर्ति, वीर सिंह पूर्ति, मंगल सिंह पूर्ति, रजनी पूर्ति, लखन पूर्ति, सोनाराम बोदरा, मनीष कोड़ा, सोनाराम पूर्ति और रोहन चाम्पिया समेत अन्य ग्रामीणों की उपस्थिति रही। ग्रामीणों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा कि गुवा साई की पारंपरिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और ग्रामसभा की स्वायत्तता की रक्षा के लिए उनका प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी निर्णय से पहले गांव के लोगों की भावनाओं और पारंपरिक अधिकारों को गंभीरता से समझा जाए।
























