रामगढ़ पुलिस की छापेमारी में कई युवक हिरासत में
बैंक ऑफ महाराष्ट्र से जुड़े 45 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में जांच तेज
रामगढ़ से जमशेदपुर तक पहुंचा साइबर ठगी का नेटवर्क, पुलिस खंगाल रही बैंकिंग लेनदेन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : शहर के बिरसानगर थाना क्षेत्र में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की जानकारी सामने आई है। जोन नंबर-02, रोड नंबर-01 स्थित ओमनगर में रामगढ़ पुलिस ने बिरसानगर पुलिस के सहयोग से छापेमारी कर भारी मात्रा में संदिग्ध सामान बरामद किया है। बताया जा रहा है कि बारीडीह निवासी के. राम के मकान में पांच से सात युवक किराये पर रह रहे थे। आरोप है कि इन युवकों ने मकान को साइबर ठगी के नेटवर्क का ठिकाना बना रखा था, जहां से विभिन्न राज्यों के लोगों को निशाना बनाया जाता था। रामगढ़ साइबर थाना में साइबर ठगी की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही थी। इसी दौरान मिले सुराग और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम जमशेदपुर पहुंची और ओमनगर स्थित मकान में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई युवकों को पकड़े जाने की जानकारी मिली है।
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बिरसानगर में साइबर ठगी के ठिकाने पर रामगढ़ पुलिस की छापेमारी, कई युवक पकड़े गए
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर 90 एटीएम कार्ड, 10 बैंक पासबुक और करीब 50 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और मोबाइल फोन मिलने से साइबर ठगी के संगठित नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस मामले का संबंध बैंक ऑफ महाराष्ट्र से जुड़े करीब 45 लाख रुपये की साइबर ठगी से बताया जा रहा है। पुलिस बरामद मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक की जांच के जरिए संदिग्ध बैंक खातों, लेनदेन और साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए संपर्कों का पता लगाने में जुट सकती है। जांच का दायरा बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
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90 एटीएम कार्ड और 50 मोबाइल बरामद, 45 लाख की ठगी का मामला जांच के घेरे में
रामगढ़ से शुरू हुई जांच के तार जमशेदपुर तक पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस के सहयोग से यह कार्रवाई की गई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक किन लोगों के नाम पर हैं तथा इनका इस्तेमाल किन वित्तीय लेनदेन में किया गया। साथ ही मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल साक्ष्यों की जांच से ठगी के तरीके, नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा सकती है। हालांकि, पकड़े गए युवकों की आधिकारिक संख्या, उनकी पहचान और गिरफ्तारी की पुष्टि अभी नहीं हुई है। 45 लाख रुपये की कथित ठगी से जुड़े मामले में भी पुलिस का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है। ऐसे में छापेमारी और बरामदगी से संबंधित प्रारंभिक जानकारी के आधार पर ही मामले की तस्वीर सामने आई है। पुलिस की आधिकारिक पुष्टि के बाद पूरे साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।























