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Chaibasa : देर रात सदर अस्पताल पहुंचे उपायुक्त मनीष कुमार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं का किया औचक निरीक्षण

  • मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए वार्ड, इमरजेंसी और ब्लड सेंटर की व्यवस्थाओं की समीक्षा
  • अस्पताल की सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर जोर, इमरजेंसी वार्ड में मरीजों और परिजनों से की बातचीत
  • ब्लड सेंटर की व्यवस्था की समीक्षा, ‘प्रोजेक्ट जागृति’ की सराहना
  • स्वैच्छिक रक्तदान अभियान से जिले में मजबूत हो रही रक्त उपलब्धता व्यवस्था

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने देर रात सदर अस्पताल, चाईबासा का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं एवं अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उपायुक्त ने नव-निर्मित अस्पताल वार्ड का अवलोकन किया और वहां भर्ती मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने वार्ड की साफ-सफाई, बेड व्यवस्था तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कार्यों को शीघ्र पूरा करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर वातावरण और समुचित स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए।

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जिला प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार कर रहा निगरानी

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने इमरजेंसी वार्ड का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों से सीधे संवाद कर अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, दवाओं और उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। मरीजों से प्राप्त सुझावों और फीडबैक के आधार पर उन्होंने सिविल सर्जन को आवश्यक निर्देश दिए। मनीष कुमार ने अस्पताल प्रबंधन को वार्डों में आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त पंखे और एयर कंडीशनर (एसी) लगाने का निर्देश देते हुए कहा कि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर उपचार, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता तथा मरीजों की सुविधा अस्पताल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अस्पताल प्रशासन को मिले निर्देश

उपायुक्त ने सदर अस्पताल स्थित ब्लड सेंटर का निरीक्षण कर वहां की कार्यप्रणाली और उपलब्ध संसाधनों की भी समीक्षा की। उन्होंने ब्लड सेंटर में साफ-सफाई बनाए रखने तथा जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के तहत जिले में लगातार चलाए जा रहे स्वैच्छिक रक्तदान अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व की तुलना में ब्लड सेंटर की सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और इसे और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए जल्द ही आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान प्रशिक्षु आईएएस, सिविल सर्जन तथा अस्पताल प्रबंधन के अन्य अधिकारी एवं कर्मी भी उपस्थित रहे। उपायुक्त ने स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाने के लिए नियमित मॉनिटरिंग जारी रखने की बात कही।

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एसआईआर-2026 के एन्यूमरेशन चरण में जिले का शानदार प्रदर्शन फॉर्म वितरण और डिजिटाइजेशन में सबसे आगे, समन्वित प्रयासों से मिली सफलता

  • एसआईआर-2026 के एन्यूमरेशन चरण में जिले का शानदार प्रदर्शन
  • फॉर्म वितरण और डिजिटाइजेशन में सबसे आगे, समन्वित प्रयासों से मिली सफलता
  • पांचों विधानसभा क्षेत्रों में तेजी से चल रहा कार्य, 50 प्रतिशत वितरण लक्ष्य पूरा करने का निर्देश
  • सभी पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने पर प्रशासन का विशेष जोर

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चाईबासा : भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर संचालित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान के तहत पश्चिमी सिंहभूम जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। एन्यूमरेशन चरण में फॉर्म वितरण और डिजिटाइजेशन के मामले में जिला वर्तमान में पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर है। जिला प्रशासन ने इस सफलता का श्रेय निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) तथा निर्वाचन कार्य में लगे सभी अधिकारियों और कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि सभी स्तरों पर बेहतर समन्वय और सतत निगरानी के कारण अभियान निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहा है।

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मतदाता जागरूकता बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग चला रहा विशेष अभियान

उपायुक्त मनीष कुमार ने बताया कि जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों का वितरण तेजी से किया जा रहा है। अब तक कुल 2,96,387 गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं, जो जिले के कुल लक्षित मतदाताओं का 27.34 प्रतिशत है। यह उपलब्धि पश्चिमी सिंहभूम को राज्य में शीर्ष स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हुई है। वहीं प्राप्त प्रपत्रों में से 6,036 का डिजिटाइजेशन बीएलओ ऐप के माध्यम से सफलतापूर्वक किया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है, जिससे मतदाता सूची के अद्यतन कार्य को समय पर पूरा करने में सहायता मिलेगी।

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डिजिटल तकनीक से निर्वाचन प्रक्रिया को बनाया जा रहा अधिक पारदर्शी

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि जिले के 39 मतदान केंद्रों पर तकनीकी कारणों से ऑनलाइन फॉर्म वितरण संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद संबंधित केंद्रों पर ऑफलाइन माध्यम से फॉर्म वितरण सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान की गति प्रभावित नहीं हुई। उन्होंने सभी बीएलओ, सुपरवाइजर, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों तथा निर्वाचन कार्य में लगे कर्मियों को अगले दो दिनों के भीतर गणना प्रपत्रों का वितरण 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। मनीष कुमार ने विश्वास जताया कि जिला आगामी चरणों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखेगा और एसआईआर-2026 के सभी लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करेगा। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि जिले का कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे।

Chaibasa : सदर अस्पताल चाईबासा में पहली बार आधुनिक गर्भनिरोधक इम्प्लांट की सफल शुरुआत

महिलाओं को तीन वर्ष तक सुरक्षित गर्भनिरोधक सुविधा, जिले में आधुनिक परिवार नियोजन सेवा का विस्तार आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की

  • महिलाओं को तीन वर्ष तक सुरक्षित गर्भनिरोधक सुविधा, जिले में आधुनिक परिवार नियोजन सेवा का विस्तार
  • आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि
  • ग्रामीण और शहरी महिलाओं को मिलेगा सीधा लाभ
  • महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण में परिवार नियोजन सेवाओं की अहम भूमिका

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल, चाईबासा में पहली बार आधुनिक कॉन्ट्रासेप्टिव इम्प्लांट (इम्प्लानॉन एनएक्सटी) का सफल प्रत्यारोपण किया गया। इस उपलब्धि के साथ जिले में महिलाओं के लिए दीर्घकालिक और आधुनिक परिवार नियोजन सेवा की शुरुआत हो गई है। अस्पताल में यह प्रक्रिया डॉ. पौलीना मुंडू और उनकी मेडिकल टीम द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह आधुनिक गर्भनिरोधक तकनीक सुरक्षित, प्रभावी और लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करने वाली विधि है। इसके शुरू होने से जिले की महिलाओं को परिवार नियोजन के क्षेत्र में एक नया और भरोसेमंद विकल्प प्राप्त हुआ है।

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स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी नवाचार से बढ़ रही मरीजों की सुविधाएं

चिकित्सकों के अनुसार इस प्रक्रिया में महिला की ऊपरी बांह की त्वचा के नीचे माचिस की तीली के आकार का एक छोटा और लचीला इम्प्लांट लगाया जाता है। यह इम्प्लांट नियंत्रित मात्रा में हार्मोन का स्राव करता है, जिससे लगभग तीन वर्षों तक अनचाहे गर्भधारण से प्रभावी सुरक्षा मिलती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आवश्यकता पड़ने पर प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा इसे किसी भी समय आसानी से निकाला जा सकता है। इम्प्लांट हटाने के बाद महिला सामान्य रूप से गर्भधारण करने में सक्षम रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधि उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो लंबे समय तक सुरक्षित और सुविधाजनक गर्भनिरोधक विकल्प चाहती हैं।

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परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों के प्रति बढ़ रही जागरूकता

डॉ. पौलीना मुंडू ने बताया कि यह सुविधा जिले की ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और प्रभावी परिवार नियोजन का विकल्प उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में यह माइनर प्रक्रिया कम समय में पूरी की जाती है और इसमें किसी प्रकार की विशेष जटिलता नहीं होती। सदर अस्पताल प्रशासन ने बताया कि अब पश्चिमी सिंहभूम की महिलाओं को यह आधुनिक सुविधा अपने ही जिले में निःशुल्क उपलब्ध होगी, जिससे उन्हें बड़े निजी अस्पतालों या दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन और वरिष्ठ चिकित्सकों ने इस उपलब्धि पर डॉ. पौलीना मुंडू एवं उनकी टीम को बधाई देते हुए भविष्य में भी आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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लाखों की लागत से बना स्वास्थ्य केंद्र बना उपेक्षा का शिकार, परिसर में फैली गंदगी और झाड़ियां स्वास्थ्य सुविधाओं के

  • लाखों की लागत से बना स्वास्थ्य केंद्र बना उपेक्षा का शिकार, परिसर में फैली गंदगी और झाड़ियां
  • स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
  • जीर्णोद्धार और नियमित चिकित्सा सेवाओं की उठी मांग
  • स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने उठाई आवाज

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : पुरनापानी पंचायत के कुलडीहा गांव में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर इन दिनों अपनी बदहाली को लेकर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये की सरकारी लागत से निर्मित यह स्वास्थ्य केंद्र रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। मुख्य द्वार से लेकर पूरे परिसर तक गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जबकि चारों ओर उगी झाड़ियां और कंटीले पौधे केंद्र की बदहाल स्थिति को बयां कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र में नियमित रूप से न तो चिकित्सक पहुंचते हैं और न ही आवश्यक दवाओं की उपलब्धता रहती है। ऐसे में केंद्र अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है और ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिन्हें छोटी-छोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी दूसरे स्थानों का रुख करना पड़ता है।

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ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की मांग तेज

ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक उपचार, सामान्य जांच और दवा वितरण जैसी बुनियादी सुविधाएं भी केंद्र में उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण मरीजों को कई किलोमीटर दूर बहरागोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या निजी क्लीनिकों में जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त हानि होती है। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के दावे करती है, लेकिन धरातल पर हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं। लोगों ने प्रखंड प्रशासन और जिला स्वास्थ्य विभाग से अविलंब हस्तक्षेप करते हुए केंद्र परिसर की सफाई, झाड़ियों की कटाई, भवन के जीर्णोद्धार, नियमित चिकित्सकों की तैनाती तथा आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि स्वास्थ्य केंद्र को पुनः सक्रिय किया जाए तो आसपास के सैकड़ों परिवारों को समय पर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

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पोटका में मलेरिया नियंत्रण में निभाई थी अहम भूमिका, गांव-गांव जाकर चलाया था जागरूकता अभियान सेवाभाव और सक्रियता से जीता

  • पोटका में मलेरिया नियंत्रण में निभाई थी अहम भूमिका, गांव-गांव जाकर चलाया था जागरूकता अभियान
  • सेवाभाव और सक्रियता से जीता था ग्रामीणों का विश्वास
  • ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग तेज

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : क्षेत्र में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच ग्रामीणों को पूर्व फार्मासिस्ट अनिल कुमार टुडू की सेवाएं याद आने लगी हैं। वर्ष 2003 से 2005 तथा 2007 से 2015 तक पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत रहे अनिल कुमार टुडू ने मलेरिया और डायरिया नियंत्रण को लेकर उल्लेखनीय कार्य किया था। उस दौरान वे नियमित रूप से प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों को बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार के प्रति जागरूक करते थे। समय पर जांच, दवा वितरण और स्वास्थ्य निगरानी के कारण कई क्षेत्रों में संक्रमण को नियंत्रित करने में सफलता मिली थी। ग्रामीणों का कहना है कि टुडू की कार्यशैली लोगों के बीच भरोसा पैदा करती थी और स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाने में मददगार साबित हुई थी।

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स्वास्थ्य जागरूकता और समय पर उपचार से ही रोकी जा सकती है ब्रेन मलेरिया की चुनौती

ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में ब्रेन मलेरिया के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य विभाग को फिर से गांव स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि अनिल कुमार टुडू की तरह स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रिय भागीदारी से संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर, जांच अभियान और दवा वितरण कार्यक्रम चलाने की मांग भी उठ रही है। लोगों ने कहा कि बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई, मच्छरों पर नियंत्रण और समय पर इलाज बेहद जरूरी है। ऐसे समय में टुडू द्वारा किए गए कार्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं और उनकी सेवाओं को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।

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माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि, देशभक्ति और वीरता को किया गया याद जेबी लाइव, रिपोर्टर घाटशिला : प्रखंड के फूलपाल

  • माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि, देशभक्ति और वीरता को किया गया याद

जेबी लाइव, रिपोर्टर

घाटशिला : प्रखंड के फूलपाल गांव में बुधवार को परमवीर चक्र विजेता कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार वीर अब्दुल हमीद की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शेख अखरुद्दीन सहित गांव के अनेक लोगों ने वीर अब्दुल हमीद के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके अदम्य साहस, देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि वीर अब्दुल हमीद भारतीय सेना के उन महान योद्धाओं में शामिल हैं, जिनके शौर्य और बलिदान पर पूरा देश गर्व करता है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके जीवन से प्रेरणा लेने और देशहित को सर्वोपरि रखने का संदेश भी दिया।

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1965 के युद्ध में दिखाए गए अद्वितीय पराक्रम को किया याद

श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में वीर अब्दुल हमीद के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान वीर अब्दुल हमीद ने अपनी रेकोइललेस गन से पाकिस्तानी सेना के कई पैटन टैंकों को ध्वस्त कर भारतीय सेना के अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया था। उनके इस असाधारण शौर्य और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद का त्याग, राष्ट्रभक्ति और वीरता आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी। कार्यक्रम का समापन उनके आदर्शों पर चलने तथा राष्ट्र सेवा के लिए सदैव समर्पित रहने के संकल्प के साथ किया गया।

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दो दिनों में कई स्थानों पर दिखे जंगली हाथी, वन विभाग ड्रोन से कर रहा निगरानी खदान क्षेत्र में घुसा

  • दो दिनों में कई स्थानों पर दिखे जंगली हाथी, वन विभाग ड्रोन से कर रहा निगरानी
  • खदान क्षेत्र में घुसा हाथी, कर्मचारियों में मची अफरा-तफरी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : सेल की किरीबुरू और मेघाहातुबुरु क्षेत्र में पिछले दो दिनों से जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाथियों के लगातार रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रवेश करने से पूरे इलाके में भय का माहौल बना हुआ है। जानकारी के अनुसार 29 जून की रात करीब 11 बजे एक जंगली हाथी किरीबुरू-हिलटॉप मुख्य मार्ग पार कर सेल की मेघाहातुबुरु खदान के मैकेनिकल शॉवेल सेक्शन में पहुंच गया। खदान क्षेत्र में हाथी के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और सभी सुरक्षित स्थानों की ओर भाग निकले। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी कुछ समय तक खदान क्षेत्र में घूमता रहा और बाद में जंगल की ओर लौट गया। इससे पहले उसे मुर्गापाड़ा क्षेत्र में भी देखा गया था।

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पुराने मैगजीन घर के पास दिखा हाथी, ड्रोन से हो रही निगरानी

30 जून की सुबह करीब 5:30 बजे उसी हाथी को पुराने मैगजीन घर के समीप मुख्य सड़क किनारे जंगल में देखा गया। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और हाथी की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया। वन विभाग के कर्मी शंकर पांडेय ने बताया कि हाथी की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की सहायता ली जा रही है। विभाग का प्रयास है कि हाथी को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रूप से घने जंगल की ओर वापस भेजा जाए। हाथी के बार-बार आबादी और औद्योगिक क्षेत्रों के निकट आने से स्थानीय लोग भी सतर्क हो गए हैं और अनावश्यक रूप से जंगल की ओर जाने से बच रहे हैं।

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दूसरे दत्तेल हाथी ने डाला पानी फिल्टर प्लांट में डेरा

इसी दिन दोपहर करीब 12 बजे एक दूसरा दत्तेल हाथी सेल किरीबुरू खदान के हिलटॉप स्थित डालमिया (ओडिशा) के पानी फिल्टर प्लांट परिसर में घुस गया। हाथी जंगल वाले रास्ते से प्लांट के भीतर पहुंचा, जिसे देखकर कर्मचारियों और मजदूरों में भगदड़ मच गई। हालांकि हाथी ने किसी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया और कुछ देर बाद मुख्य गेट से बाहर निकल गया। ग्रामीणों के अनुसार प्लांट में प्रवेश करने से पहले इसी हाथी ने जंगल किनारे बकरी चरा रही एक महिला को दौड़ा दिया था। जान बचाने के प्रयास में महिला गिर पड़ी, लेकिन वह किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में सफल रही।

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मानव-हाथी संघर्ष की आशंका बढ़ी, वन विभाग ने जारी की चेतावनी

घटनाओं के बाद डालमिया क्षेत्र तथा आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। लोग खेतों, जंगलों और दैनिक कार्यों के लिए बाहर निकलने से भी डर रहे हैं। वन विभाग ने लोगों से हाथियों के करीब न जाने, उन्हें उकसाने से बचने और किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को देने की अपील की है। साथ ही भीड़ न लगाने और पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सारंडा के जंगलों में भोजन और पानी की कमी के कारण हाथी आबादी वाले और औद्योगिक क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। यदि समय रहते प्रभावी प्रबंधन और दीर्घकालिक रणनीति नहीं बनाई गई, तो मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं।

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