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Gua : बारिश से जीरो पॉइंट में जलजमाव, दो घंटे प्रभावित रहा उत्पादन कार्य

  • जलभराव और सुरक्षा जोखिमों को लेकर मजदूरों का विरोध, प्रबंधन के आश्वासन के बाद बहाल हुआ कामकाज
  • श्रमिकों की मांगों पर सहमति, स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ा कदम

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : मंगलवार सुबह से लगातार हुई बारिश के कारण गुवा सेल खदान के जीरो पॉइंट क्षेत्र में भारी जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। पानी भर जाने से वहां स्थित कार्यालय और कार्यस्थल पर काम करना सेल कर्मियों एवं ठेका श्रमिकों के लिए कठिन हो गया। समस्या से नाराज झारखंड मजदूर संघर्ष संघ (जेएमएसएस) के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे के नेतृत्व में कर्मचारियों और श्रमिकों ने विरोध जताते हुए उत्पादन कार्य रोक दिया। जलभराव के कारण कार्यक्षेत्र में आवागमन प्रभावित हुआ और कर्मचारियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। श्रमिकों का कहना था कि ऐसी स्थिति में काम करना न केवल असुविधाजनक है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर खतरा पैदा करता है।

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जलजमाव से बढ़ा हादसों का खतरा, यूनियन ने उठाए सुरक्षा के मुद्दे

करीब एक घंटे तक उत्पादन प्रभावित रहने के बाद सेल के सीजीएम चंद्र भूषण कुमार, एचआर महाप्रबंधक प्रवीण कुमार, माइंस मैनेजर डीजीएम मिलन नंदी तथा जीरो पॉइंट के एचओडी आरके सिन्हा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने यूनियन पदाधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या पर विस्तृत चर्चा की। यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने कहा कि प्रत्येक वर्ष बारिश के मौसम में जीरो पॉइंट क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, जिससे मजदूरों को जोखिम भरे माहौल में काम करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कार्यालय में पानी भरने, कार्यस्थल पर कीचड़ जमा होने और फिसलकर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा बिजली का करंट लगने जैसे खतरे भी लगातार बने रहते हैं। यूनियन ने डोजर की खराब स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इसके बावजूद कर्मचारियों पर काम का दबाव बनाया जाता है।

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एक सप्ताह में शेड और कार्यालय निर्माण शुरू करने का आश्वासन

बैठक के दौरान यूनियन की ओर से मांग की गई कि जीरो पॉइंट से हटकर सुरक्षित स्थान पर मजदूरों के आराम के लिए तीन शेड तथा कार्यालय की व्यवस्था की जाए। इस पर सीजीएम चंद्र भूषण कुमार ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि वैकल्पिक स्थान पर तीन शेड और कार्यालय निर्माण का कार्य एक सप्ताह के भीतर प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रबंधन के इस आश्वासन के बाद श्रमिकों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और उत्पादन कार्य पुनः शुरू हो गया। यूनियन ने उम्मीद जताई कि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान जल्द किया जाएगा, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान कर्मचारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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Jamshedpur : सिदगोड़ा की विवादित जमीन पर प्रशासन-टाटा स्टील की कार्रवाई से बढ़ा विवाद

20 अगस्त की सुनवाई से पहले उठे कई सवाल न्यायालय में मामला लंबित होने के बीच बुलडोजर कार्रवाई को लेकर

  • 20 अगस्त की सुनवाई से पहले उठे कई सवाल
  • न्यायालय में मामला लंबित होने के बीच बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कानूनी और प्रशासनिक बहस तेज
  • न्यायालयी सुनवाई के बीच विवादित जमीन का मामला बना चर्चा का केंद्र

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के शिव सिंह बागान सी रोड स्थित विवादित जमीन पर बुधवार को प्रशासन और टाटा स्टील की संयुक्त कार्रवाई के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कथित अतिक्रमण हटाने और जमीन को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की गई। इस दौरान विवादित स्थल पर बुलडोजर चलाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के बाद जमीन पर लंबे समय से निवास और कब्जे का दावा करने वाले लोगों ने इसका विरोध जताया है। प्रभावित पक्ष का कहना है कि यह जमीन कई वर्षों से न्यायालय में विवादित है और मामले की सुनवाई विभिन्न अदालतों में चल रही है। उनका दावा है कि वर्ष 2009 से चल रहे इस विवाद में कई अवसरों पर उनके पक्ष में आदेश भी पारित हुए हैं। साथ ही उनका कहना है कि उक्त भूमि पर करीब चार दशक से कई परिवार मकान बनाकर निवास कर रहे हैं।

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20 अगस्त की सुनवाई से पहले कार्रवाई पर उठे सवाल

विरोध कर रहे पक्ष के अनुसार, जमीन विवाद से संबंधित मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को सिविल कोर्ट में निर्धारित है। ऐसे में सुनवाई से कुछ दिन पहले विवादित स्थल पर प्रशासनिक कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है और सुनवाई की तिथि तय है, तब प्रशासन को कार्रवाई से पहले स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें पर्याप्त जानकारी दिए बिना बुलडोजर चलाया गया। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है तथा लोग कार्रवाई के औचित्य पर सवाल उठा रहे हैं।

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अधिवक्ता ने मांगा कानूनी आधार, निष्पक्ष जांच की उठी मांग

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने प्रशासनिक कार्रवाई के कानूनी आधार पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तो उस दौरान की जाने वाली किसी भी कार्रवाई का स्पष्ट कानूनी आधार और आदेश सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन यह बताए कि किस आदेश, अधिसूचना या कानूनी प्रावधान के तहत यह कार्रवाई की गई। अधिवक्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि कार्रवाई में न्यायालय के आदेशों या कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन पाया जाता है, तो इसके खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया जा सकता है।

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पुराने प्रशासनिक आदेशों का हवाला देकर पक्ष ने जताई आपत्ति

विरोध कर रहे पक्ष ने एसडीओ और जिला प्रशासन स्तर से पूर्व में जारी आदेशों का हवाला देते हुए दावा किया है कि कई मामलों में उनके पक्ष में निर्णय दिए जा चुके हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसे आदेश मौजूद हैं, तो बुधवार को की गई कार्रवाई किस आधार पर की गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। प्रभावित लोगों ने कार्रवाई में टाटा स्टील की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। हालांकि जमीन के वास्तविक स्वामित्व, कब्जे की स्थिति और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधानिकता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और न्यायालयी आदेशों के आधार पर ही सामने आ सकेगा।

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सुनवाई से पहले बढ़ी कानूनी सरगर्मी, प्रशासन के पक्ष का इंतजार

विवादित जमीन पर हुई कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित है। यही कारण है कि कार्रवाई के समय और उसके कानूनी आधार को लेकर बहस और तेज हो गई है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं, जबकि वास्तविक स्थिति न्यायालय में उपलब्ध रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी। अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई के दौरान किन आदेशों का पालन किया गया और क्या यह प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के अनुरूप थी। आने वाले दिनों में प्रशासन, टाटा स्टील और प्रभावित पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।

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तकनीकी खराबी के कारण भड़की आग, कर्मचारियों ने भागकर बचाई जान समय रहते कार्रवाई से टली बड़ी दुर्घटना जेबी लाइव,

  • तकनीकी खराबी के कारण भड़की आग, कर्मचारियों ने भागकर बचाई जान
  • समय रहते कार्रवाई से टली बड़ी दुर्घटना

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : राष्ट्रीय राजमार्ग-49 स्थित छोटा अर्जुना के समीप बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब फलक इंडस्ट्री फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड में अचानक आग लग गई। बताया जाता है कि तकनीकी खराबी के कारण यूनिट में आग भड़क उठी, जिसके बाद धुएं और लपटों ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के समय मौजूद कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलते ही दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, जबकि पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर हाईवे पर यातायात को नियंत्रित किया। समय रहते राहत कार्य शुरू होने से किसी बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है।

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पेट्रोल पंप के पास कंपनी संचालन पर उठे सवाल, ग्रामीणों में आक्रोश

घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, आग लगने वाली यूनिट से महज 50 मीटर की दूरी पर इंडियन ऑयल का पेट्रोल पंप स्थित है। यदि आग वहां तक पहुंच जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों में कंपनी की वैधता और सुरक्षा मानकों को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि हाईवे और पेट्रोल पंप के नजदीक संचालित ऐसी इकाइयों की नियमित जांच होनी चाहिए। प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है और आग लगने के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

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दस करोड़ लोगों को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहा व्यापक जनजागरण अभियान

  • दस करोड़ लोगों को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चल रहा व्यापक जनजागरण अभियान
  • जनभागीदारी से मजबूत हो रहा नशामुक्त भारत का संकल्प

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : देशभर में चल रहे नशामुक्त भारत अभियान के तहत जमशेदपुर में नशामुक्त भारत बस यात्रा लगातार लोगों को जागरूक कर रही है। दस करोड़ लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान को शहर में व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। यह बस यात्रा अपने आप में एक अनूठी पहल है, क्योंकि देश के कई हिस्सों में जहां विभिन्न वाहनों के माध्यम से संदेश दिया जा रहा है, वहीं जमशेदपुर में पहली बार विशेष बस यात्रा के जरिए नशामुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। लोगों में इस अभियान को लेकर उत्साह और जिज्ञासा दोनों देखने को मिल रही है।

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राज्यपाल ने किया था अभियान का शुभारंभ

नशामुक्त भारत बस यात्रा का शुभारंभ 7 अगस्त 2026 को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा ब्रह्माकुमारीज के यूनिवर्सल पीस पैलेस, मरीन ड्राइव स्थित सेवा केंद्र से किया गया था। शुभारंभ के बाद से यह बस प्रतिदिन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर रही है। यात्रा के दौरान स्कूल, कॉलेज, बस स्टैंड, ऑटो स्टैंड, पार्क, होटल, मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उपस्थित लोगों को नशामुक्त जीवन जीने की शपथ भी दिलाई जा रही है।

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कदमा और शास्त्री नगर में 31 जागरूकता कार्यक्रम

बुधवार, 12 अगस्त को बस यात्रा कदमा क्षेत्र के शास्त्री नगर, उलियान और आसपास के इलाकों में पहुंची, जहां दिनभर में लगभग 31 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों ने अभियान में भाग लिया और नशे से दूर रहने का संकल्प लिया। यात्रा के दौरान स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। आयोजकों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि लोगों को व्यवहारिक रूप से नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

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आकर्षण का केंद्र बनी चित्र प्रदर्शनी और विशेष प्रस्तुति

बस के भीतर कुंभकरण की मूवमेंट आधारित प्रस्तुति के माध्यम से नशे के दुष्परिणामों को रोचक और प्रभावी तरीके से समझाया जा रहा है। वहीं बस के ऊपर लगाई गई नशामुक्ति विषयक चित्र प्रदर्शनी भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रदर्शनी में नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक नुकसान को सरल भाषा और चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। जागरूकता सत्र के अंत में लोगों को नशामुक्त रहने की प्रतिज्ञा दिलाई जाती है, जिससे अभियान का प्रभाव और अधिक मजबूत हो रहा है।

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जुगसलाई में होगा अगला पड़ाव, लक्ष्य की ओर बढ़ रहा अभियान

अभियान की विशेषता यह है कि एक ही समय पर कई प्रशिक्षित वक्ता और कार्यकर्ता अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं। पूरे देश में दस करोड़ लोगों को नशामुक्ति की प्रतिज्ञा दिलाने के लक्ष्य की दिशा में यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। लोगों की बढ़ती सहभागिता और सकारात्मक प्रतिक्रिया इसके प्रभाव को दर्शाती है। अभियान के अगले चरण में 13 अगस्त को नशामुक्त भारत बस यात्रा जुगसलाई क्षेत्र में पहुंचेगी, जहां विभिन्न स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

Manoharpur : संत अगस्तीन कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय यूथ दिवस पर सेमिनार आयोजित

प्राचार्य विक्रम नाग ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का दिया संदेश युवा शक्ति ही देश के

  • प्राचार्य विक्रम नाग ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का दिया संदेश
  • युवा शक्ति ही देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : अंतर्राष्ट्रीय यूथ दिवस के अवसर पर बुधवार को संत अगस्तीन कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लिए एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्राचार्य विक्रम नाग ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवा पीढ़ी के कंधों पर है। उन्होंने बताया कि देश की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी युवा है और यही वर्ग भारत के भविष्य को दिशा देने की क्षमता रखता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

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शिक्षा और समर्पण से ही बनेगा विकसित भारत : प्राचार्य

अपने संबोधन में प्राचार्य विक्रम नाग ने छात्र-छात्राओं को कड़ी मेहनत के साथ अध्ययन करने और समाज व राष्ट्रहित में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेंगे और अपनी ऊर्जा को रचनात्मक कार्यों में लगाएंगे। सेमिनार में कॉलेज के प्रोफेसरों ने भी युवाओं के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और युवाओं की भूमिका पर चर्चा की गई। अंत में प्राचार्य ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Ranchi/Jamshedpur : यूसीआईएल विस्थापितों के हक की लड़ाई लेकर मुख्यमंत्री से मिले विधायक संजीव सरदार

रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप की मांग विस्थापित परिवारों की वर्षों पुरानी

  • रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप की मांग
  • विस्थापित परिवारों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की जगी उम्मीद

जेबी लाइव, रिपोर्टर

रांची/जमशेदपुर : पोटका विधायक संजीव सरदार ने यूसीआईएल की तुरामडीह, नरवा, जादूगोड़ा, बांदूहुड़ांग और बागजामदा माइंस से प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों की लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करते हुए केंद्र सरकार के समक्ष विस्थापितों की समस्याओं को मजबूती से उठाएं और उन्हें उनका अधिकार दिलाने की दिशा में पहल करें। इस दौरान घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन और बहरागोड़ा विधायक समीर मोहंती भी मौजूद रहे। विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री को बताया कि कई परिवारों ने यूसीआईएल की परियोजनाओं के लिए अपनी जमीन दी और विस्थापन का दर्द झेला, लेकिन आज भी उन्हें रोजगार और अन्य सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि देने वाले परिवारों के साथ न्याय होना आवश्यक है।

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आश्रितों को नौकरी और बुनियादी सुविधाएं देने की उठी मांग

मुख्यमंत्री के समक्ष विधायक ने बताया कि कई विस्थापित परिवारों को अब तक नौकरी नहीं मिली है। वहीं नौकरी के दौरान जिन विस्थापित कर्मचारियों की मृत्यु हो गई, उनके आश्रितों को भी रोजगार से वंचित रखा गया है। कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके परिवार आज भी रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि केवल नौकरी ही नहीं, बल्कि पुनर्वास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी प्रभावित परिवारों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि वर्षों से विस्थापित परिवार अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब उनके मुद्दों का स्थायी समाधान आवश्यक हो गया है। क्षेत्र के लोगों की अपेक्षा है कि सरकार इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

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त्रिपक्षीय समझौतों के बावजूद नहीं हुआ पालन, मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

विधायक संजीव सरदार ने मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया कि यूसीआईएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और विस्थापित प्रतिनिधियों के बीच पूर्व में कई दौर की त्रिपक्षीय वार्ताएं हो चुकी हैं। इन बैठकों में विभिन्न बिंदुओं पर सहमति बनने के बावजूद अधिकांश मामलों में समझौतों को धरातल पर लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी कागजों पर सहमति तो देती है, लेकिन बाद में वादों को पूरा नहीं करती, जिससे विस्थापित परिवारों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। विधायक ने कहा कि जिन लोगों ने देशहित और विकास के लिए अपनी जमीन दी, उनके साथ न्याय होना चाहिए तथा लंबित रोजगार और आश्रितों की नियुक्ति के मामलों का जल्द निष्पादन होना चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि राज्य सरकार जल्द ही इस विषय पर आवश्यक पहल करेगी और समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।

Jamshedpur : डुमरिया-पोटका के स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सुविधाओं की मांग, दुखनी सोरेन ने सिविल सर्जन से की मुलाकात

अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और अत्याधुनिक पैथोलॉजी लैब की सुविधा उपलब्ध कराने का उठाया मुद्दा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की

  • अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और अत्याधुनिक पैथोलॉजी लैब की सुविधा उपलब्ध कराने का उठाया मुद्दा
  • ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : पोटका विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि दुखनी सोरेन ने महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन से मुलाकात कर डुमरिया एवं पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की समस्याओं और आवश्यकताओं से अवगत कराया। मुलाकात के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में कई आवश्यक जांच सुविधाओं के अभाव में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि दोनों स्वास्थ्य केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा संसाधनों की व्यवस्था की जाए ताकि ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकें।

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जांच सुविधाओं के अभाव में मरीजों को उठानी पड़ रही परेशानी

दुखनी सोरेन ने सिविल सर्जन के समक्ष डुमरिया एवं पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अल्ट्रासाउंड, आधुनिक एक्स-रे मशीन तथा अत्याधुनिक पैथोलॉजी लैब स्थापित करने की मांग रखी। उन्होंने बताया कि इन सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण मरीजों को जांच के लिए जमशेदपुर या अन्य शहरों के निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है तथा समय की भी काफी बर्बादी होती है। उन्होंने कहा कि यदि ये सुविधाएं स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध हो जाएं तो हजारों ग्रामीणों को राहत मिलेगी और समय पर बीमारी की पहचान एवं उपचार संभव हो सकेगा।

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नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्र को जल्द शुरू करने की भी उठी मांग

मुलाकात के दौरान दुखनी सोरेन ने डुमरिया में नवनिर्मित स्वास्थ्य केंद्र भवन को शीघ्र चालू करने तथा वहां आवश्यक चिकित्सा उपकरण, संसाधन और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना समय की आवश्यकता है, ताकि लोगों को सामान्य जांच और उपचार के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। दुखनी सोरेन ने उम्मीद जताई कि संबंधित विभाग और अधिकारी इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और जल्द आवश्यक कदम उठाएंगे। उनकी इस पहल को क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण और जनहितकारी कदम माना जा रहा है।

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