हर साल बरसात में 72 घंटे तक टापू बन जाते हैं आधा दर्जन गांव, ग्रामीणों ने सांसद और बीडीओ को सौंपा ज्ञापन
सांसद से ग्रामीणों की गुहार, बरसात से पहले पुलिया निर्माण कराने की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : मूसाबनी प्रखंड क्षेत्र में बागजाता यूरेनियम प्रोजेक्ट को जोड़ने वाली जर्जर पुलिया में दरार आने से ग्रामीणों के बीच हादसे की आशंका बढ़ गई है। पुलिया की रेलिंग भी कई स्थानों पर टूट चुकी है, जिससे आवागमन जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में शंख नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया तेज पानी की चपेट में आ जाती है। ऐसे में अगली बरसात में पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से के बहने का खतरा बना हुआ है। समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता हरिपद भकत की अगुवाई में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मूसाबनी बीडीओ आदिति गुप्ता और सांसद विद्युत वरण महतो को ज्ञापन सौंपकर नई पुलिया एवं सड़क निर्माण की मांग की।
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जर्जर पुलिया से ग्रामीणों का आवागमन मुश्किल, नई पुलिया निर्माण की उठी मांग

ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि लाटिया और डुंगरीडीह गांव को जोड़ने वाली यह पुलिया बागजाता यूरेनियम प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। यह पुलिया बागजाता यूरेनियम माइंस से सटे शंख नदी पर बाकड़ा और फुलझड़ी के बीच बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिपद भकत ने कहा कि वर्ष 2003 में यूसिल प्रबंधन ने ग्रामीणों के सुझाव के बावजूद अपेक्षाकृत छोटी पुलिया का निर्माण कराया था। पिछले करीब दो दशकों से प्रत्येक बरसात में पुलिया पानी में डूब जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, पानी बढ़ने के बाद आसपास के आधा दर्जन गांव करीब 72 घंटे तक मुख्य क्षेत्र से कटकर टापू जैसे हालात में पहुंच जाते हैं। इस दौरान अस्पताल, स्कूल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होती है।
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बरसात में आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूटता है, अस्पताल-स्कूल पहुंचना भी मुश्किल
ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया निर्माण को लेकर इससे पहले घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन को भी ज्ञापन दिया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों ने सांसद विद्युत वरण महतो से मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिया और सड़क के स्थायी निर्माण की दिशा में पहल करने की मांग की है। बीडीओ आदिति गुप्ता को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व पंचायत समिति सदस्य हरिपद भकत, मुखिया पर्वत हांसदा, भगीरथ कैवर्त, मथुरा कैवर्त, सुखराम मुर्मू, फुदान मुर्मू, पराव मुर्मू समेत कई ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते पुलिया का निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात में बड़ी दुर्घटना हो सकती है और कई गांवों का संपर्क फिर लंबे समय तक बाधित हो सकता है।

























