यमुना बेसिन के जल संसाधनों के विकास, सिंचाई, बिजली उत्पादन और जल सुरक्षा को मिलेगा बड़ा लाभ
यमुना बेसिन के दीर्घकालिक विकास की दिशा में बड़ा कदम
जेबी लाइव, रिपोर्टर
नई दिल्ली : नई दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने किशाऊ मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट के निर्माण को लेकर समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ऊपरी यमुना बेसिन में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव भी उपस्थित रहे। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता लंबे समय से लंबित किशाऊ परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
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छह राज्यों की सहमति से किशाऊ परियोजना को मिली मंजूरी
किशाऊ मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जो यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है। यह परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में विकसित की जाएगी। परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण किया जाएगा, जिसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से जल संरक्षण और नदी प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से इस परियोजना पर चर्चा चल रही थी, लेकिन विभिन्न राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद अब इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
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टोंस नदी पर बनेगा विशाल बहुउद्देशीय बांध
परियोजना से कृषि, ऊर्जा और पेयजल क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। किशाऊ डैम के जरिए लगभग 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी। इसके अलावा सालाना करीब 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में संग्रहित जल का उपयोग यमुना नदी के पुनर्जीवन के साथ-साथ औद्योगिक और पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी किया जाएगा। विशेष रूप से दिल्ली और राजस्थान जैसे जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
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सिंचाई, बिजली और पेयजल जरूरतों को मिलेगा बड़ा सहारा
अधिकारियों ने बताया कि किशाऊ परियोजना को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों के संयुक्त उपक्रम किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से लागू किया जाएगा। यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है, जिसमें केंद्र और राज्य मिलकर साझा संसाधनों के विकास के लिए कार्य करेंगे। इससे पहले रेणुकाजी और लखवार मल्टीपर्पस परियोजनाओं को लेकर भी समझौते हो चुके हैं और उन पर निर्माण कार्य जारी है। किशाऊ परियोजना इन प्रयासों की तीसरी महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
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संयुक्त उपक्रम के जरिए आगे बढ़ेगा निर्माण कार्य
उल्लेखनीय है कि ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों ने वर्ष 1994 में यमुना के जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें जल भंडारण परियोजनाओं की आवश्यकता को स्वीकार किया गया था। उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब किशाऊ परियोजना के लिए अलग समझौता किया गया है। जून 2026 में केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई बैठक में इस परियोजना को लेकर राज्यों के बीच सहमति बनी थी, जिसके बाद अब औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में यमुना बेसिन की जल सुरक्षा और सतत विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।



























