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Jamshedpur : ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर भाजपा जमशेदपुर मनाएगी राष्ट्रीय उत्सव

  • स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की भूमिका और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की तैयारी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इसे राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भव्य रूप से मनाने जा रही है। शुक्रवार को साकची स्थित जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ न केवल एक गीत है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा और राष्ट्रवादी चेतना का स्वर रहा है। ओझा ने कहा कि आज की पीढ़ी को इस अमर राष्ट्रगीत के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना आवश्यक है। इस उद्देश्य से पार्टी शहर के विभिन्न क्षेत्रों, संस्थानों और सांस्कृतिक केंद्रों में अनेक कार्यक्रम आयोजित करेगी।

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बिरसा मुंडा जयंती पर होगा विशेष आयोजन

सुधांशु ओझा ने बताया कि 15 नवंबर को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर साकची स्थित उनकी आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया जाएगा। इसके पश्चात 150 से अधिक नागरिकों एवं वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण स्वर में गायन होगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रभावना के संकल्प का प्रतीक होगा। इस अवसर पर युवा मोर्चा तथा महिला मोर्चा की सक्रिय भूमिका रहेगी, साथ ही शहर के साहित्यकारों और शिक्षाविदों को भी आमंत्रित किया जाएगा।

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स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् की भूमिका

सुधांशु ओझा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित एक ऐसी अमर कृति है, जिसने अंग्रेजी शासन के खिलाफ पूरे देश को एक सूत्र में बाँध दिया। 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा कांग्रेस अधिवेशन में इसका प्रथम गायन होने के बाद यह राष्ट्रवाद का उद्घोष बन गया। इसका सामूहिक गायन सुनकर अंग्रेज शासन भयभीत हो गया और इस गीत के उच्चारण तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया। यह गीत स्वदेशी आंदोलन और क्रांतिकारी गतिविधियों की चेतना का प्रमुख आधार बना, जिसने बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, सुभाषचंद्र बोस और भगत सिंह जैसे नेताओं के मन में आज़ादी का ज्वालामुखी प्रज्वलित किया।

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कांग्रेस पर निशाना, असहिष्णुता का आरोप

प्रेस वार्ता में सुधांशु ओझा ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 1923 के काकीनाडा अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद अली ने धार्मिक आधार पर ‘वंदे मातरम्’ के गायन पर आपत्ति जताकर राष्ट्रगीत के सम्मान को ठेस पहुँचाई। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने कई बार मंचों पर राष्ट्रगीत के प्रति असहिष्णुता का परिचय दिया है। 1937 में मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम् को बदलने का प्रस्ताव रखा। यहां तक कि 2019 में मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सचिवालय में वंदे मातरम् के गायन पर प्रतिबंध तक लगा दिया था।

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प्रदर्शनी और प्रतियोगिताओं का होगा आयोजन

ओझा ने बताया कि आगामी दिनों में भाजपा जिला कार्यालय में ‘वंदे मातरम् @150’ विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसमें ‘आनंदमठ’ उपन्यास और राष्ट्रगीत के साहित्यिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में निबंध लेखन, चित्रकला, भाषण और सामूहिक गायन प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी, ताकि नई पीढ़ी राष्ट्रभक्ति की भावना को समझ सके और भारत की स्वतंत्रता यात्रा पर गर्व कर सके। भाजपा जमशेदपुर महानगर की ओर से इन कार्यक्रमों की तैयारी जोर-शोर से जारी है।

Manoharpur : स्वरोजगार के साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आगे आएं महिलाएं – जोबा माझी

कुईड़ा आजीविका महिला संकुल संगठन की वार्षिक आमसभा में महिलाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश आमसभा में उपलब्धियों की समीक्षा और

  • कुईड़ा आजीविका महिला संकुल संगठन की वार्षिक आमसभा में महिलाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश
  • आमसभा में उपलब्धियों की समीक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : गोईलकेरा प्रखंड के कदमडीहा गांव में बुधवार को कुईड़ा आजीविका महिला संकुल संगठन की वार्षिक आमसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सिंहभूम सांसद जोबा माझी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और सामाजिक बदलाव की अगुवाई करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल परिवार की जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की महत्वपूर्ण शक्ति भी हैं। सांसद ने महिलाओं से अंधविश्वास, बाल विवाह और नशापान जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का लगातार प्रयास कर रही है।

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महिलाओं को सामाजिक बदलाव की अगुवाई करने का आह्वान

सांसद जोबा माझी ने दिग्गीलोटा की चर्चित ‘वायरल गर्ल’ अंजली हेम्ब्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा पलायन जैसी समस्याओं पर भी रोक लगेगी। कार्यक्रम में बीपीएम मुमताज आलम ने संगठन की उपलब्धियों की जानकारी दी, जबकि बीएपी मकरु सुंडी ने वार्षिक लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभिन्न महिला समूहों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुति भी दी गई। कार्यक्रम में प्रखंड प्रमुख निरूमनी कोड़ाह, अकबर खान, अघना कंडुलना समेत बड़ी संख्या में महिला समूहों की सदस्य उपस्थित रहीं।

Jamshedpur : किताबों के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहे पोलियो पीड़ित लेखक मृत्युंजय, सम्मानजनक जीवन की तलाश जारी

आठ किताबें लिख चुके दिव्यांग लेखक सड़क किनारे पुस्तकें बेचकर चला रहे जीवन, सरकारी मदद का अब भी इंतजार दिव्यांग

  • आठ किताबें लिख चुके दिव्यांग लेखक सड़क किनारे पुस्तकें बेचकर चला रहे जीवन, सरकारी मदद का अब भी इंतजार
  • दिव्यांग लेखक की कहानी ने उठाए व्यवस्था और योजनाओं पर सवाल

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : सरायकेला निवासी पोलियो पीड़ित लेखक मृत्युंजय पोद्दार संघर्ष, आत्मविश्वास और जिजीविषा की एक ऐसी मिसाल हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी हार मानने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। बचपन से शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे मृत्युंजय ने अपनी जिंदगी को लेखन के माध्यम से नई दिशा देने का प्रयास किया है। वर्ष 2018 में लेखन की शुरुआत करने वाले मृत्युंजय अब तक लगभग आठ किताबें लिख चुके हैं। उनकी रचनाओं में समाज, जीवन, संघर्ष, मानवीय संवेदनाएं और आम लोगों की समस्याएं प्रमुखता से दिखाई देती हैं। उनका मानना है कि लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और अपनी पहचान बनाने का एक सशक्त साधन भी है।

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लेखन को जीवन का उद्देश्य बनाकर आगे बढ़ रहे मृत्युंजय

वर्ष 2024 में मृत्युंजय बेहतर अवसरों और अपनी पुस्तकों को अधिक लोगों तक पहुंचाने की उम्मीद लेकर सरायकेला से जमशेदपुर आए। यहां उन्होंने सड़क किनारे बैठकर अपनी लिखी किताबें बेचनी शुरू कीं। उनका कहना है कि पुस्तकों की बिक्री से होने वाली आय ही उनके जीवनयापन का प्रमुख साधन है। उनकी किताबें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स माध्यमों पर भी उपलब्ध हैं, लेकिन उससे होने वाली आय उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने अपने लेखन और आत्मनिर्भर बनने के प्रयास को कभी नहीं छोड़ा।

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सरायकेला से जमशेदपुर तक संघर्ष और आत्मनिर्भरता का सफर

वर्तमान में मृत्युंजय जमशेदपुर न्यू कोर्ट परिसर के समीप स्थित शेल्टर होम में रहकर जीवन बिता रहे हैं। सीमित संसाधनों के बीच उनका दैनिक जीवन गुजर रहा है। उनका कहना है कि उन्होंने कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनसेवकों से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को रखा है। विधायक और सांसद स्तर तक अपनी बात पहुंचाने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। मृत्युंजय चाहते हैं कि उन्हें ऐसा सहयोग मिले, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकें और अपने साहित्यिक कार्यों को आगे बढ़ाने में सक्षम हो सकें।

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शेल्टर होम में रहते हुए भी नहीं टूटा बेहतर भविष्य का सपना

मृत्युंजय बताते हैं कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी भीख या दूसरों पर निर्भर रहने का रास्ता नहीं चुना। वह अपनी किताबें बेचकर ही अपने दैनिक खर्चों का प्रबंधन करते हैं। उनकी आमदनी सीमित है, जबकि उन पर कुछ आर्थिक देनदारियां और कर्ज भी हैं। इसके बावजूद उनका विश्वास है कि मेहनत और ईमानदारी के बल पर वह अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेंगे। उनका सपना एक सफल लेखक के रूप में पहचान बनाना और अपने अनुभवों को किताबों के माध्यम से समाज तक पहुंचाना है।

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किताबों की बिक्री से चल रहा जीवन, कर्ज चुकाने की भी चिंता

मृत्युंजय की कहानी केवल एक दिव्यांग लेखक के संघर्ष की दास्तान नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं और उनके वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच के सवाल को भी सामने लाती है। सरकार दिव्यांगजनों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए अनेक योजनाएं संचालित करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका लाभ कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। मृत्युंजय आज भी किसी विशेष सुविधा नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन जीने और अपने लेखन को जारी रखने के लिए न्यूनतम सहयोग की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि समाज, प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी इस संघर्षपूर्ण कहानी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए कब ठोस सहायता मिलती है।

Jamshedpur : बिंदल मॉल फायरिंग कांड के दो शूटरों से पुलिस की मुठभेड़, दोनों के पैर में लगी गोली

हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग का आरोप, जवाबी कार्रवाई में घायल हुए आरोपी बिंदल मॉल गोलीकांड की गुत्थी

  • हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग का आरोप, जवाबी कार्रवाई में घायल हुए आरोपी
  • बिंदल मॉल गोलीकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : सोनारी थाना क्षेत्र स्थित मरीन ड्राइव रोड के बिंदल मॉल में उडुपी रेस्टोरेंट फायरिंग कांड के दो आरोपियों के साथ बुधवार तड़के पुलिस की मुठभेड़ हो गई। यह मुठभेड़ सुबह करीब 3:30 बजे सोनारी के फागु बाबा श्मशान घाट के पास हुई। पुलिस के अनुसार फायरिंग कांड के मुख्य शूटर मोहन यादव और अजीत मंडल को दिल्ली से गिरफ्तार कर जमशेदपुर लाया गया था। पूछताछ के दौरान दोनों ने घटना में प्रयुक्त हथियार को सोनारी क्षेत्र में छिपाकर रखने की जानकारी दी थी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस की टीम दोनों आरोपियों को लेकर हथियार बरामद करने के लिए घटनास्थल पर पहुंची थी।

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दिल्ली गिरफ्तारी के बाद हथियार बरामदगी के लिए लाए गए थे आरोपी

पुलिस का दावा है कि आरोपियों की निशानदेही पर छिपाकर रखी गई पिस्टल बरामद कर ली गई थी। इसी दौरान दोनों आरोपियों ने कथित रूप से पुलिस टीम पर उसी हथियार से फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस घटना के बाद पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला और आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। पुलिस की गोली मोहन यादव और अजीत मंडल के पैरों में लगी, जिससे दोनों घायल होकर मौके पर ही गिर पड़े। इसके बाद पुलिस ने तत्काल दोनों को अपने कब्जे में लेकर इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

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पुलिस पर फायरिंग के बाद जवाबी कार्रवाई में घायल हुए दोनों शूटर

मुठभेड़ की सूचना मिलते ही जमशेदपुर के एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब, सिटी एसपी ललित मीणा समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी और घटनास्थल से बरामद हथियार को जब्त कर लिया। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया तथा घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के निर्देश दिए। पुलिस टीम यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा हथियार वहां कब और किस परिस्थिति में छिपाया गया था।

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मुठभेड़ के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाली जांच की कमान

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में बैठे चार लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, जिसमें तीन लोग घायल हुए थे। इस सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस ने दिल्ली से मोहन यादव और अजीत मंडल को गिरफ्तार किया। दोनों को इस गोलीकांड का मुख्य शूटर माना जा रहा है। अब मुठभेड़ और हथियार बरामदगी के बाद पुलिस को मामले की जांच में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

Gua : सारंडा से भटककर जगन्नाथ मंदिर पहुंचा कोटरा, वन विभाग ने सुरक्षित जंगल में छोड़ा

मंदिर परिसर में जंगली हिरणनुमा जीव को देखकर जुटी भीड़, वनकर्मियों ने किया रेस्क्यू बारिश के मौसम में बढ़ रही

  • मंदिर परिसर में जंगली हिरणनुमा जीव को देखकर जुटी भीड़, वनकर्मियों ने किया रेस्क्यू
  • बारिश के मौसम में बढ़ रही जंगली जानवरों की रिहायशी इलाकों में आवाजाही

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : सारंडा जंगल से भटककर एक जंगली कोटरा (बार्किंग डियर) बुधवार सुबह गुवा स्थित जगन्नाथ मंदिर परिसर पहुंच गया। मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आए श्रद्धालुओं की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, वहां लोगों की भीड़ जुटने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कोटरा काफी डरा और घबराया हुआ था तथा मंदिर की सीढ़ियों के पास दुबककर बैठा हुआ था। मंदिर के पुजारी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गुवा वन विभाग और गुवा थाना को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी। वनकर्मियों ने सावधानीपूर्वक अभियान चलाकर कोटरा को बिना किसी नुकसान के अपने कब्जे में ले लिया।

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वन विभाग की तत्परता से सुरक्षित हुआ जंगली जीव का रेस्क्यू

वन विभाग द्वारा की गई प्राथमिक जांच में पाया गया कि कोटरा पूरी तरह स्वस्थ है और उसके शरीर पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं हैं। आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वन विभाग की टीम ने उसे सारंडा के सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया। अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में भोजन और पानी की तलाश में जंगली जानवर कई बार रिहायशी क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं। ऐसे मामलों में लोगों को घबराने या जानवरों को परेशान करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। जगन्नाथ मंदिर परिसर में कोटरा के पहुंचने की घटना दिनभर लोगों के बीच चर्चा और कौतूहल का विषय बनी रही।

Jamshedpur : हलुदबनी स्कूल में डालसा का विधिक जागरूकता शिविर, बच्चों को दी कानून की जानकारी

बाल विवाह, पॉक्सो, मानव तस्करी और बाल श्रम समेत विभिन्न विषयों पर किया जागरूक डालसा ने ग्रामीणों को मुफ्त कानूनी

  • बाल विवाह, पॉक्सो, मानव तस्करी और बाल श्रम समेत विभिन्न विषयों पर किया जागरूक
  • डालसा ने ग्रामीणों को मुफ्त कानूनी सहायता और हेल्पलाइन की दी जानकारी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) जमशेदपुर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला जज अरविंद कुमार पांडेय के निर्देश एवं डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में मंगलवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय हलुदबनी में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। डालसा की जागरूकता मोबाइल वैन के माध्यम से स्कूली बच्चों को विभिन्न कानूनों और उनके अधिकारों की जानकारी दी गई। अभियान में लीगल एड डिफेंस कौंसिल की सदस्य योगिता कुमारी तथा पीएलवी निताई चंद गोराय, नागेन्द्र कुमार, सुबोध कुमार, अनिल कुमार और प्रियंका कुमारी मौजूद रहे। टीम ने बच्चों को डालसा के कार्य एवं उद्देश्यों के साथ नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी। बच्चों को शिशु प्रोजेक्ट, बाल विवाह, मानव तस्करी, पॉक्सो एक्ट, बाल श्रम, घरेलू हिंसा, नशा उन्मूलन और डायन प्रथा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी जागरूक किया गया।

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बच्चों को बाल विवाह और पॉक्सो कानून के प्रति किया जागरूक

जागरूकता अभियान के दौरान ग्रामीणों और बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। डालसा टीम ने बताया कि किसी भी कानूनी समस्या में जरूरतमंद लोग निःशुल्क कानूनी सलाह और परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस सेवा 100/112, महिला हिंसा हेल्पलाइन 181 और साइबर अपराध रोकथाम हेल्पलाइन 1930 की जानकारी साझा की गई। टीम ने लोगों से किसी भी तरह की समस्या होने पर संबंधित हेल्पलाइन या विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क करने की अपील की। इसके अलावा डालसा की टीम ने हलुदबनी गांव में भी जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध विधिक सहायता सेवाओं के प्रति जागरूक किया।

Chaibasa : अवैध चुलाई शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, 30 लीटर शराब जब्त

कुमारडूंगी और जगन्नाथपुर में भट्टियां ध्वस्त, 460 किलो जावा-महुआ नष्ट; एक गिरफ्तार, एक फरार एक आरोपी गिरफ्तार, फरार आरोपी की

  • कुमारडूंगी और जगन्नाथपुर में भट्टियां ध्वस्त, 460 किलो जावा-महुआ नष्ट; एक गिरफ्तार, एक फरार
  • एक आरोपी गिरफ्तार, फरार आरोपी की तलाश में छापेमारी जारी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में अवैध मदिरा के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए उत्पाद विभाग का छापेमारी अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में मंगलवार को कुमारडूंगी थाना क्षेत्र के बांसपानी और जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र के खुटियापदा में अवैध चुलाई शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया। उत्पाद विभाग की टीम ने दोनों स्थानों पर संचालित अवैध शराब की भट्टियों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान मौके से तैयार अवैध चुलाई शराब तथा शराब निर्माण के लिए संग्रहित किण्वित जावा-महुआ बरामद किया गया। अभियान में कुल 30 लीटर अवैध चुलाई शराब और 460 किलोग्राम जावा-महुआ जब्त किया गया। जब्त जावा-महुआ को नियमानुसार नष्ट कर दिया गया। कार्रवाई के बाद अवैध शराब कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

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कुमारडूंगी और जगन्नाथपुर में अवैध शराब की भट्टियां ध्वस्त

उत्पाद विभाग की कार्रवाई के दौरान अवैध शराब की बिक्री में संलिप्त एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक अन्य आरोपी मौके से फरार हो गया। दोनों के खिलाफ झारखंड उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। विभाग के अनुसार फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध मदिरा के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।

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