टीकर गांव में जमीन विवाद गहराया, न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्माण कार्य में बाधा का दावा
थाना प्रभारी ने जल्द मापी कराने की बात कही
न्यायालय के आदेश के बावजूद निर्माण में बाधा का दावा
जल्द होगी जमीन की मापी, प्रशासन से न्याय की उम्मीद
ईचागढ़ थाना प्रभारी ने मापी के लिए अंचल अधिकारी को भेजा पत्र
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत टीकर गांव में 24.80 एकड़ जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। थाना के समीप स्थित जमीन पर कथित तौर पर कुछ ग्रामीणों द्वारा निर्माण कार्य रोकने का आरोप रैयतदारों ने लगाया है। रैयतदारों क्षितिज कुमार महतो, मुचीराम महतो, सुग्रीव महतो और रंजीत कुमार साव के अनुसार, मौजा टीकर के खाता नंबर 583 और प्लॉट नंबर 3817 की जमीन उनके पूर्वजों ने 14 सितंबर 1952 को ईचागढ़ राजा से खरीदी थी। उन्होंने जमीन के स्वामित्व के समर्थन में डीड, खतियान और लगान रसीद जैसे दस्तावेज होने का दावा किया है। रैयतदारों का कहना है कि जमीन पर निर्माण कार्य को लेकर उत्पन्न विवाद के कारण परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर विवाद का समाधान कराने की मांग की है।
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टीकर गांव में 24.80 एकड़ जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद
रैयतदारों ने बताया कि संबंधित जमीन की अंचल कार्यालय से मापी कराई जा चुकी है। उनका दावा है कि चांडिल अनुमंडल न्यायालय से भी उनके पक्ष में आदेश पारित हुआ है। इसके बावजूद कुछ ग्रामीण निर्माण कार्य में बाधा डाल रहे हैं। रैयतदारों के मुताबिक, विवादित जमीन मुंबई की बजिल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को लीज पर दी गई है। उन्होंने कहा कि जमीन से संबंधित दस्तावेजों और न्यायालय के आदेश के आधार पर निर्माण कार्य में आ रही बाधा दूर की जानी चाहिए। मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, ग्रामीणों का पक्ष और विवाद से संबंधित सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है। रैयतदारों ने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है।
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जमीन की मापी और दस्तावेजों के आधार पर विवाद सुलझाने की मांग
ईचागढ़ थाना प्रभारी वरुण कुमार ने बताया कि जमीन की मापी कराने के लिए अंचल अधिकारी को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही जमीन की मापी कराई जाएगी। रैयतदारों ने प्रशासन से आधिकारिक मापी कराकर जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और दस्तावेजों के आधार पर उनके अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अब इस मामले में प्रशासनिक मापी और संबंधित अभिलेखों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के जरिए जमीन विवाद का समाधान निकाला जा सकेगा और क्षेत्र में तनाव की स्थिति से बचा जा सकेगा।























