भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने उठाया खान प्रभावित क्षेत्रों के विकास का मुद्दा
तीन वित्तीय वर्षों के फंड और खर्च का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : भारत आदिवासी पार्टी के पश्चिमी सिंहभूम जिलाध्यक्ष सुशील बारला ने गुवा स्थित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की लौह अयस्क खदान से जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) मद में जमा राशि और उसके उपयोग की झारखंड हाईकोर्ट की निगरानी में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बड़ी राशि जमा होने के बावजूद ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बारला ने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन से इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा प्रभावित ग्रामीणों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की है।
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गुवा सेल की खदान से डीएमएफटी मद में 71.45 करोड़ रुपये जमा
सुशील बारला के अनुसार, सेल के निगमित कार्यालय, नई दिल्ली से जारी 16 अक्टूबर 2026 के पत्र संख्या HR/RTI/CO/26/060 के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में गुवा लौह अयस्क खदान की ओर से डीएमएफटी मद में 71 करोड़ 45 लाख 57 हजार 589 रुपये जमा किए गए हैं। उन्होंने इस राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि खान प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास की अब भी जरूरत है। उनके मुताबिक, स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने के कारण क्षेत्र के युवा नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
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2023-24 से 2025-26 तक जमा राशि और खर्च का हिसाब मांगा
बारला ने मांग की है कि वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान गुवा सेल की ओर से डीएमएफटी मद में जमा की गई कुल राशि, स्वीकृत योजनाओं और खर्च का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि इन तीन वित्तीय वर्षों में डीएमएफटी के तहत स्वीकृत और संचालित सभी विकास योजनाओं की जांच होनी चाहिए। साथ ही, योजनाओं पर खर्च की गई राशि और जमीन पर हुए कार्यों का मिलान कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि आवंटित धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ है या नहीं। उन्होंने पूरी प्रक्रिया की निगरानी झारखंड हाईकोर्ट के माध्यम से कराने की मांग रखी है।
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विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर
भारत आदिवासी पार्टी के जिलाध्यक्ष ने विकास योजनाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और वास्तविक लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचने की समीक्षा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान वित्तीय अनियमितता या किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। बारला के अनुसार, डीएमएफटी फंड का मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है। इसलिए जरूरी है कि सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो और उसका वास्तविक लाभ प्रभावित ग्रामीणों को मिले। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।























