पुराने बस पड़ाव के बंद होने से रोजी-रोटी का संकट, गोलचक्कर के पास भूमि आवंटित करने की मांग
बस स्टैंड और दुकानदारों के लिए जमीन आवंटित करने की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चांडिल : निर्माणाधीन रांची-जमशेदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर चांडिल गोलचक्कर के समीप बस स्टैंड की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। बस पकड़ने के लिए यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों और दुकानदारों का कहना है कि पुराने बस पड़ाव के बंद होने के बाद यात्री और व्यवसायी दोनों प्रभावित हुए हैं। दुकानदारों ने केंद्रीय मंत्री संजय सेठ, झारखंड सरकार के परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ तथा ईचागढ़ विधायक सविता महतो से गोलचक्कर के समीप स्थायी बस स्टैंड के लिए भूमि चिह्नित करने की मांग की है।
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सड़क किनारे बस का इंतजार करने को मजबूर यात्री
स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, पुराने गोलचक्कर मार्ग स्थित बस पड़ाव से प्रतिदिन करीब एक हजार से 1200 ग्रामीण, दिहाड़ी मजदूर और अन्य यात्री जमशेदपुर, रांची, रामगढ़, धनबाद, पुरुलिया, बलरामपुर, सरायकेला सहित ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवागमन करते थे। बस पड़ाव के कारण आसपास की करीब 20 दुकानों से जुड़े परिवारों की रोजी-रोटी भी चलती थी। इन दुकानों में होटल, जलपान गृह, गैरेज, ऑटो पार्ट्स, पंचर दुकान, कोल्ड ड्रिंक और पान की दुकान समेत रोजमर्रा की जरूरतों से संबंधित व्यवसाय शामिल थे। नया मार्ग शुरू होने के बाद पुराने मार्ग पर यातायात बंद हो गया, जिससे बस पड़ाव पर यात्रियों की आवाजाही और दुकानदारों का कारोबार लगभग ठप हो गया।
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बस पड़ाव बंद होने से 20 दुकानदार परिवार प्रभावित
प्रभावित दुकानदारों का कहना है कि नया मार्ग शुरू होने के बाद यात्रियों के लिए सुरक्षित बस ठहराव की व्यवस्था करना जरूरी हो गया है। गोलचक्कर के आसपास उचित स्थान पर बस स्टैंड बनने से यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होने की समस्या से राहत मिल सकती है। दुकानदारों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मांग की है कि गोलचक्कर के समीप स्थायी बस पड़ाव के लिए भूमि चिह्नित कर उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पुराने बस पड़ाव से प्रभावित दुकानदारों को भी दुकान लगाने के लिए जगह आवंटित करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि बस स्टैंड बनने से यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी और वर्षों से कारोबार पर निर्भर परिवारों को दोबारा रोजगार का सहारा मिल सकेगा।






















