9 अगस्त तक समझौता लागू नहीं हुआ तो उत्पादन, डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग ठप करने का ऐलान
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : सारंडा के रांजाबुरु लौह अयस्क क्षेत्र में स्थानीय रोजगार को लेकर एक बार फिर बड़ा जनआंदोलन खड़ा होता दिखाई दे रहा है। खदान प्रभावित गांवों के मुंडा-मानकी, ग्रामीणों और सारंडा विकास समिति ने सेल गुवा प्रबंधन तथा ठेका कंपनी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 9 अगस्त तक पूर्व में हुए लिखित समझौते को लागू नहीं किया गया तो 10 अगस्त से रांजाबुरु खदान का उत्पादन, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएगी। इस घोषणा के बाद खनन क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से स्थानीय युवाओं के साथ रोजगार के मामले में अन्याय किया जा रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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समझौते के पालन नहीं होने से ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि स्थानीय लोगों के धैर्य की सीमा अब समाप्त हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी कई बार आंदोलन और खदान बंदी के बाद लिखित समझौते हुए, लेकिन उनका पालन आज तक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों पर बाहरी लोगों का वर्चस्व स्वीकार नहीं किया जाएगा। राजू शांडिल के अनुसार, इस बार का आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्णायक रूप लेगा। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद वास्तविक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है, जिससे लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
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त्रिपक्षीय वार्ता में बने थे कई महत्वपूर्ण बिंदु
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में मंत्री दीपक बिरुवा, जिला प्रशासन, सेल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी थी। इनमें खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करना, जल छिड़काव की व्यवस्था, रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी, प्रदूषण नियंत्रण तथा कारो नदी की सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे। ग्रामीणों का आरोप है कि इन सभी बिंदुओं पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके कारण समझौते का उद्देश्य अधूरा रह गया और स्थानीय लोगों में निराशा बढ़ी है।
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बाहरी नियुक्तियों पर सवाल, आंदोलन तेज करने की तैयारी
ग्रामीणों ने ठेका कंपनी मां सरला पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी द्वारा ड्राइवर, खलासी और अन्य पदों पर बाहरी लोगों की नियुक्ति की जा रही है, जबकि खदान प्रभावित गांवों के युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि खदानों से होने वाले प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान का सबसे अधिक प्रभाव स्थानीय गांवों पर पड़ता है, इसलिए रोजगार में प्राथमिकता भी स्थानीय लोगों को मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे केवल रोजगार का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बताया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 9 अगस्त तक लिखित समझौते के अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई तो 10 अगस्त से सारंडा विकास समिति जामकुंडिया-दुईया के नेतृत्व में रांजाबुरु खदान का उत्पादन, लौह अयस्क डिस्पैच और ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह ठप कर दी जाएगी। साथ ही प्रशासन और सेल प्रबंधन से समय रहते समाधान निकालने की अपील भी की गई है।























