इस प्रतियोगिता में राज्यभर के 268 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा, अंडर-7 वर्ग में पीयूषा ने दिखाया शानदार प्रदर्शन
विकास कालिंदी बोले- शतरंज बच्चों में एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाने का बेहतर माध्यम
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : जमशेदपुर के जेआरडी कॉम्प्लेक्स में आयोजित सातवीं जेसीए झारखंड ओपन चेस टूर्नामेंट में यूसिल कर्मी रणबीर कुमार महतो की सात वर्षीय बेटी पीयूषा महतो ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अंडर-7 कैटेगरी में चौथा स्थान हासिल किया। पीयूषा के इस प्रदर्शन से परिवार के साथ-साथ यूसिल और क्षेत्र का नाम भी गौरवान्वित हुआ है। वह तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट में कार्यरत रणबीर कुमार महतो की पुत्री हैं। इस राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में झारखंड के विभिन्न जिलों से कुल 268 शतरंज खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता के दौरान शतरंज की बिसात पर खिलाड़ियों के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। पीयूषा ने अपनी सूझबूझ, एकाग्रता, धैर्य और दिमागी कौशल का परिचय देते हुए प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी और चौथा स्थान प्राप्त करने में सफलता हासिल की।
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सात साल की उम्र में पीयूषा ने दिखाई शतरंज की प्रतिभा, राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में चौथा स्थान
पीयूषा महतो एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल, तुरामडीह में कक्षा दो की छात्रा हैं। उनकी इस उपलब्धि पर यूसिलकर्मी सह खेल प्रशिक्षक विकास कालिंदी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शतरंज बुद्धिमता और धैर्य का खेल है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों की मानसिक क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति और एकाग्रता को विकसित करने का बेहतर माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पीयूषा ने अपनी बेहतरीन चालों और रणनीति से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
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शतरंज से बच्चों का मानसिक विकास और निर्णय लेने की क्षमता होती है मजबूत
विकास कालिंदी ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं का उद्देश्य बच्चों में खेल भावना, आत्मविश्वास और मानसिक विकास को बढ़ावा देना है। ऐसे आयोजनों से प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी क्षमता दिखाने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में सफलता के लिए केवल शारीरिक शक्ति ही नहीं, बल्कि मानसिक क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। शतरंज जैसे खेल बच्चों को सोचने, समझने और परिस्थितियों के अनुसार सही निर्णय लेने की सीख देते हैं। पीयूषा की उपलब्धि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणादायक है।
























