खड़ियासाई में निर्माणाधीन कॉलेज भवन का जिला परिषद सदस्य सोनमोनी सरदार ने किया निरीक्षण
मजदूरों ने बताई मजदूरी की दर; उपायुक्त से शिकायत और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
पोटका के विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा कॉलेज भवन, गुणवत्ता और मजदूरी पर प्रशासन से जवाब का इंतजार
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : विद्यार्थियों को बेहतर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पोटका प्रखंड के खड़ियासाई में लगभग 34 करोड़ 87 लाख रुपये की लागत से निर्माणाधीन डिग्री महाविद्यालय भवन अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। भवन निर्माण कार्य में कथित अनियमितता, मजदूरों को भुगतान की जा रही मजदूरी और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला परिषद सदस्य सोनमोनी सरदार और उनके प्रतिनिधि सह समाजसेवी लव कुमार सरदार ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भवन निर्माण की प्रगति का जायजा लेने के साथ वहां कार्यरत मजदूरों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। निरीक्षण के दौरान मजदूरों ने निर्माण कार्य में मिलने वाली मजदूरी की जानकारी दी। वहीं, निर्माण में इस्तेमाल की जा रही ईंटों और अन्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि से बनने वाला यह महाविद्यालय क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता गंभीर चिंता का विषय है।
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खड़ियासाई डिग्री कॉलेज निर्माण में अनियमितता का आरोप, निरीक्षण के दौरान सामने आई मजदूरों की समस्या
निरीक्षण के दौरान सबसे पहले मजदूरों की मजदूरी का मामला सामने आया। वहां काम कर रहे मजदूरों ने बताया कि उन्हें एक दिन के काम के बदले महिला रेजा को 300 रुपये और कुली को 400 रुपये मजदूरी दी जा रही है। मजदूरों से मिली जानकारी के आधार पर जिला परिषद सदस्य सोनमोनी सरदार ने भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने निर्माण कार्य में लगे सुपरवाइजर से मजदूरी की निर्धारित दर और भुगतान की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि निर्माण कार्य में लगे सभी मजदूरों को सरकारी नियमों और लागू श्रम कानूनों के अनुरूप उचित मजदूरी मिलनी चाहिए। यदि मजदूरों को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है, तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब इतने बड़े सरकारी प्रोजेक्ट का निर्माण कराया जा रहा है, तो निर्माण स्थल पर लगाए गए सूचना पट्ट में मजदूरों की मजदूरी दर का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं किया गया है। उनके अनुसार, निर्माण कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए योजना से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि मजदूरों और स्थानीय लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
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महिला रेजा को 300 और कुली को 400 रुपये मजदूरी, भुगतान व्यवस्था पर जिला परिषद सदस्य ने उठाए सवाल
निर्माण स्थल के निरीक्षण के दौरान भवन में इस्तेमाल की जा रही ईंटों और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी आपत्ति जताई गई। आरोप लगाया गया कि निर्माण कार्य में काली ईंट, डस्ट और सीमेंट मिश्रित ईंट के साथ लाल ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि क्या भवन निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप ही सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि शैक्षणिक संस्थान का भवन लंबे समय तक विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के उपयोग में आएगा। इसलिए इसकी मजबूती और सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, तो संबंधित विभाग को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए। हालांकि, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और मजदूरी भुगतान में अनियमितता से संबंधित आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि तकनीकी अधिकारियों की टीम से स्थल निरीक्षण कराकर ईंट, सीमेंट, डस्ट और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
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करोड़ों के कॉलेज भवन में इस्तेमाल हो रही ईंटों पर सवाल, तकनीकी जांच कराने की उठी मांग
जानकारी के अनुसार, खड़ियासाई में डिग्री महाविद्यालय भवन का निर्माण झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की स्वीकृत योजना के तहत कराया जा रहा है। इस योजना की प्राक्कलित राशि 34,87,68,025 रुपये यानी लगभग 34.88 करोड़ रुपये बताई गई है। निर्माण कार्य के प्रबंधन की जिम्मेदारी झारखंड राज भवन निर्माण निगम लिमिटेड की प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू), जमशेदपुर को सौंपी गई है। प्रस्तावित महाविद्यालय को कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा से संबद्धता के तहत संचालित किए जाने का उद्देश्य है। इतनी बड़ी लागत से तैयार हो रहे इस शैक्षणिक भवन में निर्माण की गुणवत्ता, निर्धारित समयसीमा, मजदूरों के अधिकार और सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग एवं निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी है। निरीक्षण के बाद सोनमोनी सरदार और लव कुमार सरदार ने निर्माण कार्य में लगे कर्मियों से निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप काम करने तथा मजदूरों को नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक भवन निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि पोटका क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में विद्यार्थियों की सुरक्षा और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल खड़े कर सकती है।
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34.88 करोड़ की योजना पर विभाग की जिम्मेदारी, पीआईयू जमशेदपुर से जवाबदेही की मांग
जिला परिषद सदस्य सोनमोनी सरदार और उनके प्रतिनिधि लव कुमार सरदार ने चेतावनी दी कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी खामियों को दूर नहीं किया गया और मजदूरों को नियमानुसार मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित नहीं हुआ, तो इस मामले को जिला प्रशासन के समक्ष उठाया जाएगा। उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही। साथ ही जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के साथ निर्माण स्थल पर धरना-प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि पोटका में डिग्री कॉलेज बनने से क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करने की मजबूरी कम होगी। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का बेहतर अवसर मिल सकेगा। इससे क्षेत्र में शिक्षा का माहौल मजबूत होगा और विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा मिलेगी। लेकिन इसके लिए महाविद्यालय भवन का मजबूत, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होना जरूरी है। अब स्थानीय लोगों की नजर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या 34.87 करोड़ रुपये की इस योजना में लगाए गए आरोपों की तकनीकी जांच होगी? क्या मजदूरों को उनका उचित मेहनताना मिलेगा? और क्या निर्माण एजेंसी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप भवन तैयार करेगी? पोटका के लोग अब केवल कॉलेज भवन के निर्माण पूरा होने का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि इस महत्वपूर्ण परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही भी चाहते हैं।


























