ग्रामीणों को लंबी कतारों और बार-बार कार्यालय के चक्कर से दिलाने की पहल
पंचायत स्तर पर एक ही स्थान पर पूरी हो सभी प्रक्रियाएं
जनहित में शीघ्र निर्णय लेने की सरकार से अपील
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका, घाटशिला, बहरागोड़ा और जुगसलाई विधानसभा क्षेत्रों के ग्रामीणों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में हो रही कठिनाइयों को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री की पुत्री दुखनी सोरेन ने मुख्यमंत्री के नाम जिला परिवहन पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में प्रत्येक पंचायत में विशेष ड्राइविंग लाइसेंस शिविर आयोजित करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रखंड स्तर पर आयोजित शिविरों में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, जिससे लंबी कतारें लग रही हैं। आवेदकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार पूरा दिन बीत जाने के बाद भी उनका काम नहीं हो पाता। इसके कारण ग्रामीणों को बार-बार परिवहन कार्यालय और शिविरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च हो रहा है।
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ग्रामीणों, छात्रों और मजदूरों को हो रही सबसे अधिक परेशानी
दुखनी सोरेन ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण, आदिवासी, मूलवासी, छात्र-छात्राओं, मजदूरों तथा दूरस्थ पंचायतों से आने वाले लोगों को झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि पंचायत स्तर पर ऐसे शिविर लगाए जाएं, जहां ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं एक ही स्थान पर पूरी की जा सकें। इसमें आवेदन जमा करने, दस्तावेज़ सत्यापन, फोटो खिंचवाने, बायोमेट्रिक प्रक्रिया और ड्राइविंग टेस्ट जैसी सुविधाएं शामिल हों। उन्होंने यह भी कहा कि केवल लर्निंग लाइसेंस जारी करने के बजाय सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने वाले पात्र आवेदकों को स्थायी (परमानेंट) ड्राइविंग लाइसेंस भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि लोगों को दोबारा कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
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परिवहन कार्यालयों की भीड़ कम करने का सुझाव
ज्ञापन में कहा गया है कि पंचायत स्तर पर ड्राइविंग लाइसेंस शिविर आयोजित होने से परिवहन कार्यालयों में भीड़ कम होगी और आम लोगों को अनावश्यक भागदौड़ से राहत मिलेगी। इससे हजारों ग्रामीणों को समय पर लाइसेंस मिल सकेगा और सरकारी सेवाओं की पहुंच गांवों तक सुनिश्चित होगी। दुखनी सोरेन ने राज्य सरकार से इस मांग को जनहित से जुड़ा विषय बताते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधाओं का विकेंद्रीकरण समय की आवश्यकता है और पंचायत स्तर पर लाइसेंस शिविर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
























