चार माह बाद हुई बैठक की प्रक्रिया, टेंडर प्रस्तावों और पारदर्शिता को लेकर मांगी गई विधिक समीक्षा
पारदर्शी और नियमित बोर्ड बैठक से मजबूत होगी स्थानीय स्वशासन व्यवस्था
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : मानगो नगर निगम की 18 अगस्त 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक को लेकर नया विवाद सामने आया है। निगम के उप महापौर ने बुधवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और बैठक की प्रक्रिया, पार्षदों की सहभागिता तथा विभिन्न प्रशासनिक पहलुओं पर गंभीर सवाल उठाए। ज्ञापन में कहा गया है कि नगर निगम की बोर्ड बैठक स्थानीय स्वशासन व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है, जहां जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा और निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में बैठक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, नियमसम्मत और सहभागी होनी चाहिए। उप महापौर ने उपायुक्त से पूरे मामले की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करते हुए कहा कि निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
इसे भी पढ़ें : Gua : किरीबुरू-बड़ाजामदा मुख्य मार्ग पर सड़क पर पड़ा पेड़ बना दुर्घटना का कारण, वाहन चालकों में चिंता
चार माह के अंतराल के बाद बैठक होने पर जताई आपत्ति
ज्ञापन में झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 74(1) का हवाला देते हुए कहा गया है कि नगर निगम के सुचारू संचालन के लिए नियमित रूप से बोर्ड बैठक आयोजित किया जाना आवश्यक है। उप महापौर के अनुसार 18 अगस्त को आयोजित बोर्ड बैठक लगभग चार माह के लंबे अंतराल के बाद हुई, जो स्थानीय निकाय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने कहा कि नियमित बैठक नहीं होने से वार्डों की समस्याओं, विकास योजनाओं और जनहित के मुद्दों पर समय पर निर्णय नहीं हो पाता। ज्ञापन में उपायुक्त से आग्रह किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक माह बोर्ड बैठक आयोजित करने के लिए निर्देशित किया जाए, ताकि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने और समाधान के लिए आवश्यक निर्णय लेने का अवसर मिल सके।
इसे भी पढ़ें : Gua : हतनाबुरु के पास बारिश का कहर, पीसीसी सड़क का हिस्सा बहा, आवागमन हुआ प्रभावित
पिछली कार्यवाही की संपुष्टि और टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
उप महापौर ने बोर्ड बैठक में पिछली बैठकों की कार्यवाही के अनुमोदन और संपुष्टि को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि किसी भी बैठक की पूर्व कार्यवाही का विधिवत अनुमोदन होने के बाद ही उससे जुड़े प्रस्तावों और निर्णयों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पूर्व बैठकों की कार्यवाही की संपुष्टि किए बिना टेंडर संबंधी प्रस्तावों और प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया, जो प्रक्रियात्मक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने उपायुक्त से 18 अगस्त की बैठक में लिए गए निर्णयों, प्रस्तावों और विशेष रूप से टेंडर संबंधी मामलों की विधिक एवं प्रशासनिक समीक्षा कराने की मांग की है, ताकि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उसे समय रहते दुरुस्त किया जा सके।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन की कार्यसमिति का विस्तार, नए पदाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
पार्षदों की सहभागिता और जनहित प्रस्तावों को प्राथमिकता देने की मांग
ज्ञापन में कहा गया है कि नगर निगम के निर्वाचित पार्षद अपने-अपने वार्ड की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी समस्याओं को बोर्ड के समक्ष रखने का अधिकार रखते हैं। उप महापौर ने मांग की कि पेयजल, सड़क, नाली, स्वच्छता, सीवेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े जनहित प्रस्तावों को बोर्ड बैठक के एजेंडा में उचित स्थान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए, जिससे वार्ड स्तर की समस्याओं पर सार्थक चर्चा हो सके। इसके साथ ही उन्होंने बोर्ड बैठकों में पारदर्शी और सहभागी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय लिए जा सकेंगे।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : सोना देवी विश्वविद्यालय के फ्रेशर्स वीक का शुभारंभ, मोटिवेशनल स्पीकर चंद्रेश्वर खां ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित
उपस्थिति पंजी, रिकॉर्डिंग और विधिक समीक्षा की मांग
बैठक की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उप महापौर ने कई सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड बैठक में उपस्थित सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए विधिवत उपस्थिति पंजी का संधारण किया जाना चाहिए। साथ ही बैठक की वीडियो अथवा ऑडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में कार्यवाही का प्रमाणिक रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। उन्होंने उपायुक्त से मांग की कि 18 अगस्त की बोर्ड बैठक की पूरी कार्यवाही, लिए गए निर्णयों और टेंडर प्रस्तावों की विस्तृत विधिक एवं प्रशासनिक समीक्षा कराई जाए। साथ ही भविष्य में नियमित बोर्ड बैठक, सभी पार्षदों की सहभागिता, पारदर्शी प्रक्रिया और नियमसम्मत कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। उप महापौर ने कहा कि नगर निगम की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक, जवाबदेह और पारदर्शी होगी तभी आम जनता के हितों से जुड़े फैसले प्रभावी रूप से लागू किए जा सकेंगे।



























