- माईकल जॉन ऑडिटोरियम में जुटेंगे देशभर के बुनकर, उद्योग की चुनौतियों पर होगी चर्चा
- बुनकरों के सम्मान और सशक्तिकरण पर रहेगा विशेष फोकस
- पलायन रोकने और उद्योग को मजबूत बनाने पर होगी व्यापक चर्चा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : वीवर्स डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (WDRO) की ओर से 7 अगस्त 2026 को माईकल जॉन ऑडिटोरियम में 13वें राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस का आयोजन किया जाएगा। इसकी जानकारी गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में WDRO के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भाजपा बुनकर प्रकोष्ठ के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक विजय कुमार भारती, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के पूर्व सदस्य मनोज कुमार सिंह, स्वर्णरेखा विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी आशुतोष राय तथा अमित मिश्रा ने संयुक्त रूप से दी। आयोजकों ने बताया कि वर्ष 2014 में नई दिल्ली में WDRO ने पहली बार 7 अगस्त को हस्तकरघा दिवस मनाया था। इसके बाद वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चेन्नई में 7 अगस्त को राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस के रूप में घोषित किया। तब से संगठन देश के विभिन्न शहरों में लगातार इस दिवस का आयोजन करता आ रहा है। इस वर्ष के कार्यक्रम को लेकर बुनकर समुदाय में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
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राज्यपाल सहित कई विशिष्ट अतिथि होंगे समारोह में शामिल
आयोजकों ने बताया कि इस वर्ष के समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, भारत सरकार के पूर्व अध्यक्ष (पूर्वी क्षेत्र) मनोज कुमार सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के पूर्व सदस्य आनंद साहू तथा स्वर्णरेखा विकास ट्रस्ट के ट्रस्टी आशुतोष राय शामिल होंगे। कार्यक्रम में झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से आए बुनकर प्रतिनिधियों के साथ लगभग 500 स्थानीय प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। समारोह के दौरान हस्तकरघा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुनकरों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया जाएगा।
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हस्तकरघा उद्योग की चुनौतियों पर तैयार होगा मांग-पत्र
राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस समारोह का मुख्य उद्देश्य हस्तकरघा एवं बुनकर उद्योग के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर गंभीर मंथन करना है। आयोजकों के अनुसार, इस क्षेत्र से लगातार हो रहे पलायन के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा तथा बुनकरों की आर्थिक, सामाजिक और व्यावसायिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम के दौरान बुनकर समुदाय के सुझावों के आधार पर एक विस्तृत मांग-पत्र तैयार किया जाएगा, जिसे केंद्र और राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। आयोजकों ने कहा कि हस्तकरघा उद्योग देश की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर बुनकरों का उत्साहवर्धन करने और हस्तकरघा उद्योग को बढ़ावा देने की अपील की।
























