- 85 गांवों की इको विकास समिति के साथ प्रधान वन संरक्षक ने की बैठक, जंगल बचाने और शिकार रोकने की ली गई शपथ
- निगरानी के लिए ग्रामीणों को मिले सोलर लैंप और टॉर्च, वन सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जमशेदपुर के मानगो स्थित वन चेतना भवन में सोमवार को सेंदरा पर्व की तैयारियों और वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वाइल्ड लाइफ) रवि रंजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु दलमा वन्यजीव अभयारण्य के आसपास बसे 85 गांवों की इको विकास समिति के सदस्य रहे। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि सेंदरा एक पारंपरिक सांस्कृतिक पर्व है, लेकिन इसकी आड़ में वन्यजीवों का शिकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि जंगल और जानवरों की सुरक्षा करना अब समय की मांग है, क्योंकि इसी से पर्यावरणीय संतुलन बना रह सकता है। उन्होंने आदिवासी समुदाय से अपील की कि वे जंगलों में जाकर पूजा-पाठ की परंपरा को निभाएं, लेकिन अस्त्र-शस्त्र और शिकार से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
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दलमा में सेंदरा पर्व और वन्यजीव संरक्षण को लेकर वन विभाग की सख्त चेतावनी
बैठक के दौरान संवाद और जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य अतिथि संजीव कुमार ने जोर देकर कहा कि शिकार करना कानूनन अपराध है और विभाग इस बार पहले से कहीं अधिक सतर्क है। ग्रामीणों और समिति के सदस्यों को जंगल का प्रहरी बताते हुए विभाग ने उनके बीच समन्वय मजबूत करने की पहल की। जागरूकता के उद्देश्य से कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक का भी मंचन किया गया, जिसके माध्यम से वन्यजीवों के महत्व को दर्शाया गया। इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से वन्यजीव संरक्षण की शपथ ली और संकल्प लिया कि वे सेंदरा के दौरान किसी भी जानवर को क्षति नहीं पहुँचने देंगे। विभाग ने स्पष्ट किया कि परंपराएं प्रकृति को बचाने के लिए होनी चाहिए, न कि उसे नष्ट करने के लिए। सामूहिक भागीदारी से ही अवैध शिकार की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाया जा सकता है।
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इको विकास समिति ने ली वन्यजीवों की रक्षा की शपथ, नुक्कड़ नाटक से किया जागरूक
ग्रामीणों को वनों की निगरानी में सक्षम बनाने के लिए वन विभाग द्वारा विशेष संसाधन भी उपलब्ध कराए गए। बैठक में मौजूद समिति के सदस्यों को टॉर्च, सोलर लैंप और प्रदूषण मुक्त चूल्हा जैसे उपयोगी उपकरण वितरित किए गए। आरसीसीएफ स्मिता पंकज और मुख्य वन संरक्षक एसआर नटेश ने बताया कि इन उपकरणों से समितियों को रात के समय जंगल की निगरानी करने में आसानी होगी और वे शिकारियों की गतिविधियों पर नज़र रख सकेंगे। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इन प्रयासों से विभाग और स्थानीय समुदायों के बीच विश्वास बढ़ेगा। बैठक के अंत में सभी वन क्षेत्र पदाधिकारियों ने एक सुर में शांतिपूर्ण और नियमबद्ध तरीके से सेंदरा मनाने का आह्वान किया। यह पहल न केवल सेंदरा के दौरान शिकार को रोकेगी, बल्कि दीर्घकालिक रूप से दलमा के पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में मील का पत्थर साबित होगी।






















