- चार दिवसीय वार्षिक महोत्सव से गुंजायमान हुआ एनएच-33 क्षेत्र, कलश यात्रा और धार्मिक अनुष्ठानों ने घोली आध्यात्म की मिठास
- मूर्ति स्थापना और विशाल भंडारे के साथ होगा महोत्सव का भव्य समापन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जमशेदपुर के निकट गालूडीह (एनएच-33, उल्दा) स्थित माता वैष्णो देवी धाम इन दिनों आस्था और भक्ति के केंद्र में है। यहाँ आयोजित चौथे वार्षिक धार्मिक महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब उमड़ रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र माता के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चारण से गुंजायमान हो उठा है। 18 अप्रैल से शुरू हुए इस चार दिवसीय भव्य आयोजन में जमशेदपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन पहुँच रहे हैं। महोत्सव का विधिवत शुभारंभ एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसमें पारंपरिक परिधानों में सजी सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर पवित्र जल कलश धारण कर क्षेत्र का भ्रमण किया। इस यात्रा ने पूरे गालूडीह के वातावरण को अलौकिक और भक्तिमय बना दिया है, जिसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों और आयोजन समिति में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
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भव्य कलश यात्रा के साथ गालूडीह में वैष्णो देवी महोत्सव का शंखनाद
महोत्सव के दूसरे दिन शाम का समय पूरी तरह से ज्ञान और आध्यात्म के नाम रहा। धाम परिसर में आयोजित संगीतमय ‘श्रीमद्भगवत गीता सार’ प्रवचन कार्यक्रम में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु स्वामी हृदयानंद गिरि जी महाराज ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने सनातन धर्म की महत्ता, निष्काम कर्म और जीवन के उच्च नैतिक मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे गीता का ज्ञान आधुनिक युग में भी प्रासंगिक है। महाराज के मुखारविंद से ज्ञान की गंगा में गोता लगाने के लिए पंडाल छोटा पड़ गया। प्रवचन के साथ-साथ मंदिर परिसर में दिन भर चले भजन-कीर्तन और भक्ति गीतों ने वातावरण में एक विशेष सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया, जिससे भक्त झूमने पर मजबूर हो गए।
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स्वामी हृदयानंद गिरि जी के गीता सार प्रवचन से मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु
आयोजन समिति ने बताया कि श्रद्धालुओं की विशेष मांग और श्रद्धा को देखते हुए 20 अप्रैल की रात 9 बजे से भव्य “माता की चौकी” का आयोजन किया गया। इस विशेष अनुष्ठान में प्रसिद्ध भजन गायकों ने माता वैष्णो देवी की महिमा का गुणगान किया। सुमधुर भजनों और कर्णप्रिय संगीत की लहरों के बीच भक्तों ने पूरी रात माता की भक्ति में गोता लगाया। कलाकारों की प्रस्तुति इतनी जीवंत थी कि उपस्थित हर श्रद्धालु माता की भक्ति में लीन होकर नृत्य करने लगा। सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए समिति द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बन गया है।
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माता की चौकी में सुमधुर भजनों पर झूम उठे भक्त, रात भर रही रौनक
इस चार दिवसीय महोत्सव का समापन 21 अप्रैल को बेहद खास और महत्वपूर्ण अनुष्ठानों के साथ होगा। आयोजन समिति के अनुसार, दोपहर 12 बजे पूरे वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच मूर्ति स्थापना का मुख्य अनुष्ठान संपन्न कराया जाएगा। इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए क्षेत्र के गणमान्य लोगों और भारी संख्या में भक्तों के जुटने की संभावना है। स्थापना अनुष्ठान के पश्चात एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु माता वैष्णो देवी का महाप्रसाद ग्रहण करेंगे। आयोजन समिति ने सभी भक्तों से इस अंतिम दिन के कार्यक्रमों में शामिल होकर पुण्य के भागी बनने की अपील की है। गालूडीह का यह धाम इस समय आस्था के एक लघु कुंभ का रूप ले चुका है, जो शांति और श्रद्धा का संदेश दे रहा है।






















