दो दौर की वार्ता रही बेनतीजा, लिखित आश्वासन नहीं मिलने तक अंतिम संस्कार से इंकार
वंदे भारत एक्सप्रेस की छत पर कार्य के दौरान हुआ था हादसा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे यार्ड में कार्य के दौरान करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे युवा तकनीशियन आशीष माझी की मौत के बाद मुआवजा और नौकरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मृतक के परिजन रेलवे प्रशासन से 50 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस मुद्दे पर अब तक रेलवे प्रशासन और परिजनों के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। सोमवार को एरिया रेल मैनेजर (एआरएम) समीर सौरभ की अध्यक्षता में रेलवे अधिकारियों, मृतक के परिजनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई, लेकिन किसी भी मांग पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई। लगातार दूसरी बार बातचीत विफल होने से परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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रेलवे प्रशासन और परिजनों के बीच बातचीत फिर रही असफल

बैठक के दौरान मृतक के परिजनों ने स्पष्ट कहा कि हादसा रेलवे परिसर में ड्यूटी के दौरान हुआ है, इसलिए मृतक परिवार की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन को उठानी चाहिए। परिजनों ने 50 लाख रुपये मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को रेलवे में स्थायी नौकरी तथा अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी। उनका कहना है कि आशीष माझी परिवार का प्रमुख सहारा था और उसकी असामयिक मृत्यु से पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया है। दूसरी ओर रेलवे प्रशासन ने आर्थिक सहायता और अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के विषय पर सकारात्मक रुख दिखाया, लेकिन किसी भी मांग पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन देने से परहेज किया। इसी कारण बातचीत बिना किसी ठोस निष्कर्ष के समाप्त हो गई। परिजनों का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से उन्हें संतोष नहीं होगा।
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50 लाख मुआवजा और स्थायी नौकरी की मांग पर अड़े परिजन
मृतक के परिवार ने साफ शब्दों में घोषणा की है कि जब तक उनकी मांगों पर रेलवे प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आशीष माझी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिजनों का कहना है कि पूर्व में भी कई मामलों में केवल आश्वासन देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया गया है, इसलिए इस बार वे किसी भी मौखिक वादे पर भरोसा नहीं करेंगे। उनका कहना है कि लिखित रूप में मुआवजा, नौकरी और अन्य सहायता की घोषणा होने के बाद ही अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस निर्णय के कारण मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है तथा प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
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लिखित आश्वासन मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने का फैसला
मामले को लेकर क्षेत्र में जनाक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। परिजनों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो रेलवे गेट जाम, धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति ने कहा कि रेलवे प्रशासन के साथ दो-दो बार वार्ता होने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मृतक परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा और उचित मुआवजा मिलने तक आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी परिवार के समर्थन में उतरते हुए प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
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आंदोलन की चेतावनी से रेलवे प्रशासन पर बढ़ा दबाव
जानकारी के अनुसार, परसूडीह के शंकरपुर निवासी आशीष माझी 30 मई को टाटानगर स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस के एक कोच की छत पर लगे एसी सिस्टम की मरम्मत कर रहे थे। इसी दौरान ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन ओवरहेड विद्युत लाइन की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए थे। घटना के बाद उन्हें तत्काल टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक इलाज चलने के बाद उनकी मौत हो गई। उनकी मृत्यु के बाद से परिजन, ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक संगठन न्याय, उचित मुआवजा, नौकरी और हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। फिलहाल रेलवे प्रशासन और परिजनों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन लिखित आश्वासन के अभाव में मामला गतिरोध में फंसा हुआ है और आंदोलन की संभावना लगातार बढ़ती जा रही है।























