सामाजिक व्यवस्था, धार्मिक परंपराएं, रीति-रिवाज और आदिवासी संस्कारों की भी दी जाएगी शिक्षा
झारखंड में ऑल चिकी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : पोटका प्रखंड अंतर्गत राजदोहा गांव के डुगरीडीह टोला में भुरका ईपील सेचेद अखाड़ा के बैनर तले रविवार को संताली ऑल चिकी क्लास का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डोमजूडी पीर परगना हरिपदो मुर्मू एवं असेका के महासचिव शंकर सोरेन ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए हरिपदो मुर्मू ने कहा कि इस प्रकार के शिक्षण केंद्र प्रत्येक गांव में स्थापित होने चाहिए, ताकि समाज के सभी लोग अपनी मातृभाषा और लिपि का ज्ञान प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि भाषा और संस्कृति की पहचान को बनाए रखने के लिए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना आवश्यक है।
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सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों की होगी पढ़ाई
असेका के महासचिव शंकर सोरेन ने बताया कि इस केंद्र में ऑल चिकी की पढ़ाई लोअर, हायर, मैट्रिक तथा प्लस टू स्तर तक कराई जाएगी। इसके साथ ही संथाल समाज की सामाजिक व्यवस्था, धार्मिक मान्यताओं, रीति-रिवाजों, संस्कारों, सामाजिक बुराइयों और पारंपरिक आदिवासी वाद्य यंत्रों के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी जाएगी। समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित ऑल चिकी के प्रधान शिक्षक दुर्गा प्रसाद मुर्मू को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्होंने झारखंड सरकार से मांग की कि स्कूलों में प्रतिदिन कम से कम एक घंटे ऑल चिकी पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यह भाषा जन-जन तक पहुंच सके और इसे व्यापक पहचान मिले।
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मेधावी छात्रों का सम्मान, समाज के लोगों ने रखे विचार
कार्यक्रम का संचालन फूदान मार्डी प्राणिक ने किया। इस अवसर पर मानिक हांसदा, फुदन मुर्मू, मानसिंह मांझी, समाजसेवी सगेन हांसदा तथा हलुदबनी के ग्राम प्रधान सहित कई गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही झारखंड असेका द्वारा आयोजित वार्षिक परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। प्लस टू स्तर में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली पोमा हांसदा तथा द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले शिव चरण हांसदा को प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में राजदोहा माझी बाबा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और समाज को शिक्षा एवं संस्कृति के संरक्षण के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
























