खुंटपानी के किसान ने बंजर भूमि को बनाया आमदनी का स्रोत
बंजर जमीन पर लगाए 120 आम के पौधे, अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा
मनरेगा योजनाओं से ग्रामीण किसानों को मिल रहे नए अवसर
बागवानी और सिंचाई सुविधाओं से किसानों की बढ़ रही आय
सफल किसानों की कहानियां जो बदल रही हैं ग्रामीण अर्थव्यवस्था
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले के खुंटपानी प्रखंड अंतर्गत कुस्तुइया गांव के किसान मित्र विजय मुंदूइया ने बिरसा हरित ग्राम योजना का लाभ उठाकर अपनी बंजर भूमि की तस्वीर बदल दी है। झारखंड सरकार द्वारा मनरेगा (एमजीएनरेगा) के तहत संचालित इस योजना का उद्देश्य खाली और अनुपयोगी भूमि पर फलदार पौधों की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि ग्रामीण किसानों और मजदूरों को स्थायी रोजगार एवं आय का साधन मिल सके। लगभग पांच वर्ष पूर्व विजय मुंदूइया को इस योजना के तहत 120 आम के पौधे उपलब्ध कराए गए थे। उन्होंने एक एकड़ बंजर भूमि पर इन पौधों को लगाया और निरंतर देखभाल की। समय के साथ पौधे विकसित हुए और अब फल देने लगे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।
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आम की बिक्री से हो रही डेढ़ से दो लाख रुपये तक की कमाई
रोजगार की कमी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे विजय मुंदूइया ने खेती और बागवानी को ही अपनी सफलता का आधार बनाया। उनका कहना है कि आम के फलों की बिक्री से उन्हें हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। उनकी सफलता की जानकारी मिलने पर खुंटपानी प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी धनंजय पाठक ने उनके बागवानी क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान विजय मुंदूइया ने बागवानी क्षेत्र में डीप बोरिंग लगाने का प्रस्ताव रखा, ताकि सिंचाई की बेहतर व्यवस्था हो सके और वे साग-सब्जियों की खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने मनरेगा के तहत डीप बोरिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
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अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने विजय मुंदूइया
निरीक्षण के दौरान प्रखंड प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने विजय मुंदूइया की मेहनत और लगन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने रोजगार के अभाव में पलायन का रास्ता नहीं चुना, बल्कि अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि विजय का प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज वे न केवल अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर रहे हैं, बल्कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी उपलब्ध करा रहे हैं। बिरसा हरित ग्राम योजना के माध्यम से मिली सफलता यह साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार और समृद्धि के नए रास्ते खोले जा सकते हैं।
























