परामर्शदात्री समिति के समक्ष डीसी और एसएसपी ने रखा पक्ष
बागबेड़ा और परसुडीह में कथित जुआ, शराब व मटका कारोबार पर भी उठे सवाल
जमशेदपुर में अपराध नियंत्रण के लिए प्रशासन की पहल, 10 आरोपितों पर सीसीए का प्रस्ताव
गोलमुरी, बागबेड़ा और आजादनगर के 10 आरोपितों पर सीसीए की सुनवाई
सीसीए की सुनवाई के बाद प्रशासनिक आदेश का इंतजार, अपराध नियंत्रण पर नजर
बागबेड़ा और परसुडीह में कथित जुआ-शराब कारोबार पर जांच की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने जिले में अपराध नियंत्रण के उद्देश्य से 10 आरोपितों के खिलाफ क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) के तहत कार्रवाई की पहल की है। इस सूची में गोलमुरी थाना क्षेत्र के नामदा बस्ती निवासी प्रदीप पाठक उर्फ बिल्ला पाठक समेत कई चर्चित नाम शामिल हैं। सोमवार को हाईकोर्ट स्थित परामर्शदात्री समिति के समक्ष संबंधित मामलों की सुनवाई हुई। इस दौरान घाघीडीह सेंट्रल जेल से संबंधित आरोपितों को सुनवाई के लिए ले जाया गया। जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त राजीव रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक डॉ. एहतेशाम वकारीब समिति के समक्ष उपस्थित हुए। अधिकारियों ने संबंधित मामलों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रशासन का पक्ष रखा। अब समिति के निर्णय और आगे जारी होने वाले आदेश पर नजर है।
इसे भी पढ़ें : Baharagoda : बहरागोड़ा के पाटपुर में सूने घर का ताला तोड़कर चोरी, 6 तोला सोना और नकदी गायब
गोलमुरी से आजादनगर तक के 10 आरोपित सूची में
सीसीए के तहत कार्रवाई के लिए जिन 10 लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें प्रदीप पाठक उर्फ बिल्ला पाठक, संजीत साव, करण सिंह उर्फ जसकरण सिंह, रवि यादव, मोहम्मद तौफिक उर्फ बाबू, मोहम्मद इमरान उर्फ कटप्पा, विक्की सिंह गिल उर्फ कुंडी, इस्माइल आलम उर्फ इस्माइल उर्फ चौंच, मोहम्मद सलमान उर्फ जम्मू बच्चा और जाहिद हुसैन उर्फ विक्की शामिल हैं। ये नाम गोलमुरी, बागबेड़ा, परसुडीह, आजादनगर, उलीडीह और जुगसलाई थाना क्षेत्रों से संबंधित बताए गए हैं। प्रशासन की ओर से समिति के समक्ष संबंधित मामलों की जानकारी रखी गई। हालांकि, सुनवाई के बाद अंतिम आदेश जारी होने और उसकी आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन लोगों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई प्रभावी होगी।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सदर अस्पताल में कार्यशाला आयोजित
सीसीए की कार्रवाई पर अंतिम आदेश का इंतजार
क्राइम कंट्रोल एक्ट का उद्देश्य निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत अपराध नियंत्रण और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करना है। इस मामले में जिला प्रशासन और पुलिस ने परामर्शदात्री समिति के सामने अपना पक्ष रखा है। अब आगे की कार्रवाई समिति के निर्णय और सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर निर्भर करेगी। सीसीए के तहत प्रस्ताव या सुनवाई को अंतिम कार्रवाई नहीं माना जा सकता। संबंधित लोगों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आगे का निर्णय होगा। प्रशासन की इस पहल के बीच जिले में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को लेकर लोगों की नजर पुलिस की आगामी कार्रवाई पर बनी हुई है।
इसे भी पढ़ें : Novamundi/Chaibasa : टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल नोवामुंडी में आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल, 642 विद्यार्थियों ने सीखे बचाव के गुर
बागबेड़ा और परसुडीह में कथित अवैध गतिविधियों पर उठे सवाल
इस बीच, स्थानीय स्तर पर बागबेड़ा और परसुडीह थाना क्षेत्रों में कथित जुआ, अवैध शराब और मटका कारोबार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 से इन इलाकों में कुछ लोग ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और इनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोग पुलिस थाने तक पहुंच और संपर्क का इस्तेमाल कर कथित तौर पर अपना काम चलाते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित व्यक्तियों या पुलिसकर्मियों के खिलाफ किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले शिकायत की जांच, ठोस साक्ष्य और संबंधित पक्षों का बयान जरूरी है। इन आरोपों को फिलहाल शिकायत के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
इसे भी पढ़ें : Baharagoda : बहरागोड़ा के पांकलो टोला में बदला गया जला ट्रांसफॉर्मर, ग्रामीणों को बिजली संकट से मिली राहत
पुलिस की जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायत में थाना स्तर पर कथित अनियमितताओं और अवैध कारोबार पर कार्रवाई के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ गतिविधियों पर सख्ती नहीं होने से स्थानीय लोगों में असंतोष है। हालांकि, शिकायत में जिन व्यक्तियों और पुलिसकर्मियों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे मामलों में जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायतों की निष्पक्ष जांच, अवैध जुआ, शराब और मटका कारोबार के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई तथा जिम्मेदारी तय करने की अपेक्षा की जाती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, सीसीए के तहत प्रस्तावित कार्रवाई और स्थानीय स्तर पर उठाए गए आरोपों को अलग-अलग मामलों के रूप में देखते हुए तथ्यों के आधार पर जांच करना जरूरी है।























