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Gua : राजाबुरु खदान बंदी के खिलाफ मजदूरों का प्रदर्शन, तत्काल संचालन शुरू करने की मांग

  • संयुक्त मजदूर सभा में श्रमिक संगठनों ने कहा- रोजगार प्रभावित कर आंदोलन करना उचित नहीं

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : सेल गुवा की राजाबुरु खदान में रोजगार की मांग को लेकर पिछले करीब 15 दिनों से जारी बंदी के विरोध में स्थानीय मजदूरों और विभिन्न श्रमिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। गुवा में आयोजित संयुक्त मजदूर सभा में 100 से अधिक मजदूरों और यूनियन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभा में वक्ताओं ने खदान बंदी को स्थानीय मजदूरों और उनके परिवारों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे जल्द से जल्द समाप्त करने की मांग की। मजदूरों का कहना था कि खदान बंद रहने से क्षेत्र के श्रमिकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है और उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए खदान बंद करना बताया अनुचित

सभा में मौजूद मजदूर प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि खदान बंदी कुछ लोगों के व्यक्तिगत स्वार्थों को साधने के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय रोजगार से जुड़ा कोई वास्तविक मुद्दा है तो उसका समाधान सेल प्रबंधन और प्रशासन के साथ वार्ता के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष के हित को पूरे स्थानीय मजदूर समुदाय का हित नहीं माना जा सकता। मजदूरों के अनुसार खदान बंद होने से 100 से अधिक स्थानीय कर्मचारी और मजदूर सीधे प्रभावित हुए हैं, जबकि उनके परिवारों को मिलाकर लगभग 500 लोगों की आजीविका संकट में पड़ गई है।

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प्रबंधन को ज्ञापन सौंपने का लिया गया निर्णय

बैठक में क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ, सीटू, भारतीय मजदूर संघ, झारखंड मजदूर यूनियन और बेरोजगारी संघ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभा की अध्यक्षता झारखंड मजदूर यूनियन के नेता एवं पूर्व मुखिया कपिलेश्वर डोंगो ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मजदूरों और यूनियन प्रतिनिधियों का एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल सेल गुवा प्रबंधन से मिलकर राजाबुरु खदान को तत्काल चालू कराने की मांग करेगा और इस संबंध में ज्ञापन सौंपेगा। मजदूरों ने स्पष्ट कहा कि वे रोजगार संबंधी मुद्दों पर संवाद और समाधान के पक्षधर हैं, लेकिन मजदूरों की रोजी-रोटी प्रभावित कर आंदोलन करना स्वीकार्य नहीं है।

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Muri : खाद की मनमानी कीमत और कालाबाजारी के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

सोनाहातु प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना, बीडीओ को सौंपा ज्ञापन; 26 सितंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी जेबी लाइव, रिपोर्टर

  • सोनाहातु प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना, बीडीओ को सौंपा ज्ञापन; 26 सितंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मुरी : यूरिया और डीएपी खाद की कथित मनमानी कीमत व कमी के खिलाफ झारखंड राज्य किसान सभा एवं माकपा के नेतृत्व में किसानों ने सोनाहातु प्रखंड कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई। किसानों ने आरोप लगाया कि यूरिया की निर्धारित कीमत करीब 266 रुपये प्रति बोरा होने के बावजूद इसे 400 से 500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। वहीं डीएपी खाद की निर्धारित कीमत 1350 रुपये प्रति बोरा के बजाय कथित रूप से अधिक कीमत पर बिक्री किए जाने और कीटनाशकों की मनमानी दर वसूले जाने की शिकायत की गई। किसानों ने खाद की कालाबाजारी और मूल्य वृद्धि पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

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सिंचाई, भ्रष्टाचार और हाथियों के आतंक से निजात की उठी मांग

प्रदर्शनकारियों ने खाद की समस्या के अलावा कोकरो और कांची नहर का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाने, प्रखंड में कथित भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा हाथियों के आतंक से किसानों को राहत देने की मांग की। ज्ञापन में वन विभाग द्वारा निमडीह के ग्रामीणों के रास्ते में कथित रूप से उत्पन्न की जा रही बाधा दूर करने, मनरेगा में 200 दिनों का रोजगार और 700 रुपये मजदूरी देने, ऑनलाइन जमीन संबंधी गड़बड़ियों पर रोक लगाने तथा महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण पर अंकुश लगाने की मांग भी शामिल है। किसानों ने कहा कि खेती-किसानी पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में खाद की ऊंची कीमत और उपलब्धता का संकट उनकी परेशानी और बढ़ा रहा है।

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मांगें पूरी नहीं हुईं तो 26 सितंबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी

किसान सभा के महासचिव सुफल महतो ने कहा कि किसानों को उनकी उपज और जरूरी कृषि सामग्री को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोकरो और कांची नहर का पानी अब तक खेतों तक नहीं पहुंचाया गया है, जबकि प्रखंड में भ्रष्टाचार की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधि इन समस्याओं पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो 26 सितंबर से व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रदर्शन में राज्य किसान कौंसिल सदस्य उमेश महतो, जिला किसान कौंसिल सदस्य घुरन पातर, बसंत मुंडा, हरिश्चंद्र प्रमाणिक, रामप्रसाद पातर, हृदयनाथ सिंह मुंडा, कलेश्वर मुंडा, जगन्नाथ मुंडा, राजेंद्र सिंह मुंडा, सुनील महतो, जीतवाहन, उपेंद्र मुंडा, मनिया, जीतू महतो, महादेव कोइरी, विशेश्वर बड़ाईक सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

Jamshedpur : जमशेदपुर में 13 सितंबर को होगा ‘साझी शहादत-साझी विरासत’ कार्यक्रम

बिष्टुपुर के माइकल जॉन ऑडिटोरियम में होगा सेमिनार देश-प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक प्रतिनिधि होंगे शामिल जेबी लाइव,

  • बिष्टुपुर के माइकल जॉन ऑडिटोरियम में होगा सेमिनार
  • देश-प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक प्रतिनिधि होंगे शामिल

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : सर्वोदय समिति, जमशेदपुर के तत्वावधान में आगामी 13 सितंबर 2026 को अपराह्न 3:30 बजे बिष्टुपुर स्थित माइकल जॉन ऑडिटोरियम में ‘साझी शहादत-साझी विरासत’ विषय पर भव्य सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की जानकारी बुधवार को परिषदन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी गई। आयोजकों ने बताया कि भारत की पहचान सदियों से गंगा-जमुनी तहजीब, साझा संस्कृति, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे से रही है। देश की आजादी के संघर्ष से लेकर स्वतंत्र भारत के निर्माण और विकास तक हर धर्म, संप्रदाय, वर्ग और समुदाय के लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी साझा इतिहास और विरासत को लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

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साझा इतिहास और संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक करने पर जोर

प्रेसवार्ता में आयोजकों ने कहा कि देश की आजादी के लिए अनगिनत लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। खेत-खलिहानों से लेकर औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक देश की अर्थव्यवस्था और विकास को मजबूत करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही साझी विरासत भारत की सबसे बड़ी ताकत है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में कुछ शक्तियों द्वारा साझा इतिहास, संस्कृति और कुर्बानियों को भुलाने तथा समाज में नफरत, विद्वेष और विभाजन की भावना पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे दौर में लोगों को देश के गौरवशाली साझा इतिहास से परिचित कराना और सामाजिक एकता तथा भाईचारे को मजबूत करना सामूहिक जिम्मेदारी है।

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सेमिनार में देश-प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता होंगे शामिल

आयोजकों के अनुसार, ‘साझी शहादत-साझी विरासत’ कार्यक्रम में देश और प्रदेश के अनेक वरिष्ठ राजनीतिक, सामाजिक, श्रमिक एवं जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। कार्यक्रम में कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सह सांसद तारिक अनवर, पूर्व सांसद आनंद मोहन, कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य सह हरियाणा पीसीसी के पर्यवेक्षक अजय कुमार लल्लू, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं पूर्व सांसद डॉ. अजय कुमार तथा पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार बालमुचू और राजेश ठाकुर के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

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श्रमिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की भी रहेगी भागीदारी

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के पूर्व सदस्य दीपक सिंह, झारखंड के विधायक कुमार जय मंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह, झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता, झारखंड विधानसभा के पूर्व विधायक मलखान सिंह, झारखंड मार्केटिंग बोर्ड के अध्यक्ष रविंद्र सिंह, झारखंड इंटक अध्यक्ष रामेश्वर पांडेय, मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता, इंडियन नेशनल मेटल वर्क्स फेडरेशन के महासचिव रघुनाथ पांडेय, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव प्रसाद उर्फ टुन्नु चौधरी और टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महासचिव आर.के. सिंह समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित रहेंगे। आयोजकों का कहना है कि सेमिनार के माध्यम से साझा सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर व्यापक चर्चा की जाएगी।

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सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने का दिया जाएगा संदेश

इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष अशोक चौधरी, आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह, महासचिव नट्ट झा, विजय खान, विजय यादव, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परविंदर सिंह तथा पूर्व विधायक कुणाल सारंगी सहित सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी दी गई। प्रेसवार्ता में मौजूद आयोजकों ने लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की साझा शहादत और विरासत को याद करना केवल अतीत को जानना नहीं, बल्कि वर्तमान में सामाजिक सद्भाव, एकता और भाईचारे को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

Jadugoda : यूसिलकर्मी अरुण बर्मा के निलंबन भत्ते मामले की श्रम कोर्ट में सुनवाई

चाईबासा श्रम अदालत ने यूसिल प्रबंधन को 15 सितंबर तक भुगतान पर पुनर्विचार का दिया समय जेबी लाइव, रिपोर्टर जादूगोड़ा

  • चाईबासा श्रम अदालत ने यूसिल प्रबंधन को 15 सितंबर तक भुगतान पर पुनर्विचार का दिया समय

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जादूगोड़ा : यूसिलकर्मी अरुण बर्मा के निलंबन निर्वाहन भत्ते से जुड़े मामले की सुनवाई चाईबासा स्थित सहायक श्रमायुक्त (केंद्रीय) शुभंक संजीव की अदालत में हुई। मामला वर्ष 2024 में 8 अक्टूबर से 5 नवंबर तक की 28 दिनों की निलंबन अवधि से संबंधित है। सुनवाई के दौरान यूसिल प्रबंधन की ओर से महेश कुमार उपस्थित हुए, जबकि झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव सागर बेसरा और कर्मी अरुण बर्मा ने अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सहायक श्रमायुक्त ने यूसिल प्रबंधन को निलंबन अवधि में काटी गई राशि की वापसी के मुद्दे पर पुनर्विचार करने की सलाह देते हुए आगामी 15 सितंबर तक का समय दिया है।

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यूनियन ने भुगतान नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी

सुनवाई के बाद झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के संयुक्त सचिव सागर बेसरा ने कहा कि अरुण बर्मा के खिलाफ कथित रूप से झूठे आरोप लगाकर 28 दिनों के लिए निलंबन की कार्रवाई की गई थी और इस दौरान उनके वेतन से राशि काट ली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान कंपनी प्रबंधन ने स्टैंडिंग ऑर्डर और श्रम नियमों की अनदेखी की। सागर बेसरा के अनुसार, निलंबन भत्ते के रूप में काटी गई लगभग डेढ़ लाख रुपये की राशि की वापसी 15 सितंबर तक नहीं की जाती है तो यूनियन कंपनी प्रबंधन के खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई करेगी। साथ ही ब्याज सहित राशि वसूलने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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पुल धंसने से बढ़ी दुर्घटना की आशंका, प्रशासन से तत्काल मरम्मत और नए निर्माण की मांग जेबी लाइव, रिपोर्टर बहरागोड़ा

  • पुल धंसने से बढ़ी दुर्घटना की आशंका, प्रशासन से तत्काल मरम्मत और नए निर्माण की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड के पचंडो और रांगुनिया गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी और चिंता का कारण बन गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण पुल का एक हिस्सा धंस गया है, जिससे इसकी स्थिति बेहद जर्जर हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले दो वर्षों से पुल का कोई रखरखाव नहीं किया गया, जिसके कारण जलभराव और कटाव से यह लगभग एक फीट तक नीचे बैठ चुका है। पुल की खराब स्थिति से न केवल आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है, बल्कि पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले सीमावर्ती यात्रियों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों ने हादसे की आशंका जताते हुए उठाई कार्रवाई की मांग

ग्रामीण तापस पात्र, सुमन भुईया, सुकरा देहुरी, सोमेश सेनापति समेत अन्य लोगों ने बताया कि प्रतिदिन किसान, बुजुर्ग, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक इसी पुल से होकर गुजरते हैं। पुल की जर्जर स्थिति को देखते हुए कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर बारिश के दिनों में आवागमन और अधिक जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पुल का तत्काल निरीक्षण कर इसकी मरम्मत कराई जाए या फिर नए पुल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए। लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Chaibasa : पत्रकार से कथित गाली-गलौज और धमकी का मामला गरमाया, कार्रवाई की मांग तेज

NAMA के समर्थन के बाद पत्रकार आजाद हेम्ब्रम ने झामुमो नेतृत्व को सौंपा आवेदन, मुखिया पर लगाए गंभीर आरोप जेबी

  • NAMA के समर्थन के बाद पत्रकार आजाद हेम्ब्रम ने झामुमो नेतृत्व को सौंपा आवेदन, मुखिया पर लगाए गंभीर आरोप

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चाईबासा : चाईबासा जिले के गोइलकेरा प्रखंड अंतर्गत कायदा पंचायत की मुखिया एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष सोमवारी बाहन्दा पर स्थानीय पत्रकार आजाद सिंह हेम्ब्रम के साथ कथित रूप से फोन पर गाली-गलौज और धमकी देने के आरोपों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को लेकर पत्रकार संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। नेशनल आदिवासी मीडिया एसोसिएशन (NAMA) द्वारा पत्रकार के समर्थन में बैठक आयोजित किए जाने के बाद अब स्वयं पत्रकार आजाद हेम्ब्रम ने भी झामुमो के वरिष्ठ नेताओं को लिखित आवेदन देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

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चबूतरा निर्माण कार्य की खबर के बाद विवाद बढ़ने का दावा

जानकारी के अनुसार, कायदा पंचायत के ग्राम पांता में 15वें वित्त आयोग की राशि से हुए चबूतरा निर्माण कार्य को लेकर पत्रकार आजाद हेम्ब्रम ने सवाल उठाए थे। उन्होंने निर्माण कार्य की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया और बाद में समाचार माध्यमों के जरिए भी मामला प्रकाशित किया। पत्रकार के लिखित आवेदन में कहा गया है कि जिस चबूतरे का निर्माण वर्ष 2026 में कराया गया, वह पूर्व में भी बन चुका था और उसके पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे थे। आवेदन के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी, गोइलकेरा को मौखिक शिकायत भी की थी। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को कथित अनियमितता से संबंधित खबर प्रसारित की गई।

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पत्रकार ने फोन पर अभद्र भाषा और धमकी देने का लगाया आरोप

पत्रकार आजाद हेम्ब्रम ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि खबर प्रकाशित होने के बाद उन्हें एक मोबाइल नंबर से फोन आया, जिसमें कथित तौर पर उनके और उनके परिवार के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान उन्हें डराने-धमकाने और मारपीट की चेतावनी भी दी गई। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस घटना से वे मानसिक रूप से आहत हुए हैं। हेम्ब्रम ने कहा कि एक पत्रकार के रूप में वे जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करने और जनता तथा प्रशासन के बीच सूचना का सेतु बनने का कार्य करते हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में पत्रकारों की भूमिका का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की धमकी स्वीकार्य नहीं है।

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NAMA ने पत्रकार के समर्थन में दिखाई एकजुटता

घटना के बाद नेशनल आदिवासी मीडिया एसोसिएशन (NAMA) की जिला स्तरीय बैठक चाईबासा में आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पत्रकार शामिल हुए। बैठक में संगठन ने पत्रकार आजाद हेम्ब्रम के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए कहा कि किसी विकास कार्य या सरकारी योजना की स्थिति को जनता के सामने लाना पत्रकारिता का दायित्व है। संगठन का कहना है कि यदि किसी खबर पर आपत्ति है तो उसका जवाब तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर दिया जाना चाहिए। NAMA ने संबंधित जनप्रतिनिधि से पत्रकार के प्रति कथित व्यवहार पर माफी मांगने की मांग की है। संगठन ने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मामले की स्वतंत्र पड़ताल की जाएगी।

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झामुमो नेतृत्व से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

पत्रकार आजाद हेम्ब्रम ने अपने आवेदन की प्रतिलिपि झामुमो की सांसद सह केंद्रीय महासचिव जोबा माझी, केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता विनोद पांडेय तथा मनोहरपुर विधायक जगत माझी को भी भेजी है। आवेदन में उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने और संबंधित पदाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाने की मांग की है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पत्रकारों की स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के बीच संवाद मर्यादित और सम्मानजनक होना चाहिए। अब सभी की निगाहें झामुमो नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं और आरोपों की जांच को लेकर क्या कदम उठाते हैं।

Manoharpur : एमएमडीआर के खिलाफ आंदोलन की तैयारी तेज, मनोहरपुर में झामुमो की बैठक संपन्न

7 सितंबर को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी जेबी लाइव, रिपोर्टर मनोहरपुर :

  • 7 सितंबर को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : मनोहरपुर वन विश्रामागार में बुधवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रखंड समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला परिषद उपाध्यक्ष सह प्रखंड अध्यक्ष रंजीत यादव ने की। बैठक में एमएमडीआर के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश तथा आगामी 7 सितंबर 2026 को प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित होने वाले धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संगठनात्मक रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। नेताओं ने कहा कि जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर पार्टी कार्यकर्ता एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत बनाएंगे।

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पंचायतों से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को सफल बनाने का लिया संकल्प

बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दिया गया। बैठक में बंधना उरांव, सावन धनवार, मुकेश रजक, संजय समद, बामिया मांझी, अजहर अली, सामुएल हेम्ब्रोम, लालसिंह चम्पिया, सौरसिंह चम्पिया, रीना देवी, राजेश कोड़ा, सुरेश बेसरा, लक्ष्मण सोय, दुबराज किंबो, फेलिक्स टोप्पो, अमित सोय, आशीष खलखो, अगस्तीन एक्का, विजय बारीक, सोमा सुरीन और राजधन तिर्की सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

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