चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतों पर विधायक सरयू राय ने केंद्र-राज्य सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
जमाखोरी और कार्टेल पर कार्रवाई का आग्रह, बाहरी राज्यों पर निर्भरता बढ़ा सकती है परेशानी
नई फसल आने से पहले दाम बढ़ना समझ से परे, बड़े बाजारों में नियमित निगरानी की जरूरत
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : चीनी और प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। रविवार को उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तथा राज्य के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को टैग करते हुए बाजार में बढ़ती महंगाई पर चिंता जताई। सरयू राय ने कहा कि चीनी और प्याज के व्यापार में कार्टेल तथा जमाखोरी की आशंका को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बाजार में कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को चीनी पुराने दर पर उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आम लोगों की रसोई पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
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झारखंड में पड़ सकता है कीमतों पर सीधा असर
सरयू राय ने कहा कि झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री अन्य राज्यों से आती है। ऐसे में उत्पादन क्षेत्रों और चीनी मिलों में कीमत बढ़ने का सीधा प्रभाव राज्य के थोक और खुदरा बाजारों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को कीमतों में उछाल आने का इंतजार करने के बजाय अभी से बाजार की निगरानी शुरू करनी चाहिए। थोक व्यापारियों, स्टॉकिस्टों और बड़े आपूर्तिकर्ताओं के पास उपलब्ध स्टॉक का आकलन कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कहीं कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतें बढ़ाने की कोशिश तो नहीं की जा रही है। उनके अनुसार समय रहते निगरानी व्यवस्था मजबूत करने से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
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चीनी मिलों के रेट पर उठाए सवाल
विधायक सरयू राय ने 22 अगस्त को उपलब्ध विभिन्न चीनी मिलों के रेट का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की कई सहकारी चीनी मिलों में चीनी का मूल्य ₹5,820 से ₹6,000 प्रति क्विंटल के बीच है, जबकि कुछ मिलों में यह ₹6,200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। वहीं महाराष्ट्र की चीनी मिलों में एम-30, एसएस-30 और एस-30 श्रेणी की चीनी की कीमतें ₹6,675 से ₹6,800 प्रति क्विंटल तक दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि मिल स्तर पर चीनी का मूल्य लगभग ₹67 से ₹68 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाना चिंताजनक संकेत है। राय ने सवाल उठाया कि जब गन्ने की नई फसल आने में केवल एक से डेढ़ माह का समय शेष है, तब अचानक कीमतों में इतनी तेजी का औचित्य क्या है। उन्होंने आशंका जताई कि इसके पीछे बाजार में कृत्रिम दबाव या कार्टेल की भूमिका हो सकती है।
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जमाखोरी पर कार्रवाई की मांग, स्टॉक सीमा की जांच कर सरकार करे हस्तक्षेप
सरयू राय ने कहा कि सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि चीनी मिलों, थोक व्यापारियों और बड़े स्टॉकिस्टों के पास वास्तविक स्टॉक कितना उपलब्ध है। यदि निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण पाया जाता है तो तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाजार में पर्याप्त आपूर्ति होने के बावजूद यदि कीमतें बढ़ रही हैं तो यह सामान्य स्थिति नहीं मानी जा सकती। सरकार को उपभोक्ताओं के हित में हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवश्यक वस्तुएं उचित मूल्य पर उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि महंगाई का सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ता है, इसलिए प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
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प्याज की बढ़ती कीमतों पर भी जताई चिंता
चीनी के साथ-साथ सरयू राय ने प्याज की बढ़ती कीमतों को भी गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और जमाखोरों की सक्रियता की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने नाफेड सहित संबंधित एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि बाजार में कीमत नियंत्रण के प्रयासों का प्रभाव दिखाई देना चाहिए। राय ने झारखंड सरकार से आग्रह किया कि जमशेदपुर, रांची, धनबाद सहित राज्य के प्रमुख बाजारों में चीनी और प्याज के स्टॉक तथा थोक कीमतों की नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि महंगाई का असर केवल घरेलू बजट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि होटल, मिठाई व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ता है। इसलिए सरकार को कार्टेल, कृत्रिम कमी और जमाखोरी के खिलाफ एक साथ प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।


























