फोटो 1 पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मिर्गी की मरीज से पूछताछ करती दिल्ली के एम्स अस्पताल से आई डॉ ममता भूषण सिंह
डॉ ममता भूषण सिंह ने कहा – जन्म के समय बच्चे के देर से रोने पर भी दिख सकते हैं मिर्गी के लक्षण
झारखंड में मिर्गी मरीजों की बढ़ती संख्या बनी चिंता का विषय
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : झारखंड में मिर्गी रोगियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज से वंचित मरीजों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल की डॉक्टरों की टीम गुरुवार को पोटका पहुंची। झारखंड सरकार की पहल पर आयोजित इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग से जुड़ी वरिष्ठ चिकित्सक डॉ ममता भूषण सिंह के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोटका में मिर्गी रोगियों की जांच की। शिविर में पोटका, पटमदा, गोलमुरी सह जुगसलाई समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे सौ से अधिक मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली गई तथा उन्हें आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं। डॉक्टरों ने मरीजों और उनके परिजनों को मिर्गी बीमारी के लक्षण, बचाव और नियमित उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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ग्रामीण क्षेत्रों में मिर्गी मरीजों को मिल रही विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा

डॉ ममता भूषण सिंह ने बताया कि झारखंड में मिर्गी रोगियों के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण कई मरीज समय पर इलाज नहीं करा पाते हैं। उन्होंने कहा कि यह बीमारी पूरे देश में पाई जाती है और कई मामलों में यह वंशानुगत भी होती है। डॉ सिंह के अनुसार जन्म के समय नवजात शिशु के देर से रोने या आवाज निकलने में देरी होने पर भी मिर्गी के लक्षण पाए जा सकते हैं। इसके अलावा सिर पर गंभीर चोट, मस्तिष्क में गांठ या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण भी व्यक्ति मिर्गी का शिकार हो सकता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में मरीज के शरीर में अचानक ऐंठन होने लगती है, लेकिन नियमित दवा और सही डोज के जरिए इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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समय पर इलाज और दवा से नियंत्रित हो सकती है मिर्गी बीमारी
शिविर के दौरान विभिन्न प्रखंडों से आए कुल 144 मरीजों ने अपना पंजीकरण कराया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बहड़ागोड़ा में 104, चाकुलिया में 226, धालभूमगढ़ में 100, पोटका में 144, डुमरिया में 44, घाटशिला में 106, गोलमुरी सह जुगसलाई में 117, पटमदा में 234 तथा जमशेदपुर शहरी क्षेत्र में 138 मिर्गी मरीजों की पहचान की गई है। डॉ ममता भूषण सिंह ने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम और बेहतर उपचार के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया ताकि मरीज समय रहते इलाज करा सकें।























