पोटका में करोड़ों की लागत से बने स्वास्थ्य केंद्र की गुणवत्ता पर उठे सवाल, जांच और कार्रवाई की मांग तेज
एक साल के भीतर भवन में दिखने लगीं बड़ी दरारें
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : पोटका विधानसभा क्षेत्र में लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित स्वास्थ्य केंद्र की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2025 में निर्माण पूरा होने के बाद महज एक वर्ष के भीतर ही भवन की दीवारों और अन्य हिस्सों में बड़ी-बड़ी दरारें उभर आई हैं। स्थिति यह है कि स्वास्थ्य केंद्र का विधिवत सार्वजनिक उद्घाटन भी नहीं हो पाया है, लेकिन भवन की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े बजट से बने भवन में इतनी जल्दी दरारें आना निर्माण कार्य में गंभीर खामियों की ओर संकेत करता है। इससे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बनाए गए इस महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
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उद्घाटन प्रक्रिया और निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र भवन का निर्माण वर्ष 2025 में पूरा हुआ था। इसके बाद मार्च 2026 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से वहां कार्यरत चिकित्सकों की उपस्थिति में जल्दबाजी में उद्घाटन कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्घाटन कार्यक्रम में न तो क्षेत्रीय विधायक संजीव सरदार को आमंत्रित किया गया और न ही सांसद को सूचना दी गई। वहीं भवन की दीवारों में जगह-जगह दिखाई दे रही दरारों को छिपाने के लिए पेंट कराने की भी चर्चा है। हालांकि कई स्थानों पर दरारें इतनी गहरी हैं कि उन्होंने पेंट की परत तक को फाड़ दिया है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी प्रक्रिया पर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
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स्वास्थ्यकर्मियों में भवन सुरक्षा को लेकर चिंता
भवन की मौजूदा स्थिति को लेकर स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत नर्सों और एएनएम के बीच भी चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि रोजाना मरीजों की सेवा के दौरान भवन के भीतर काम करते समय असुरक्षा की भावना बनी रहती है। स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं, ऐसे में किसी भी प्रकार की संरचनात्मक कमजोरी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्वास्थ्यकर्मियों का मानना है कि भवन की स्थिति की तत्काल तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए ताकि संभावित खतरे का आकलन किया जा सके और समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
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जेएलकेएम ने उठाई स्वतंत्र जांच की मांग
स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा (जेएलकेएम) ने भी सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद भवन की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है। जेएलकेएम नेताओं का कहना है कि यदि निर्माण में किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार एजेंसी और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बावजूद अब तक किसी व्यापक जांच या जवाबदेही तय किए जाने की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
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विधायक के बयान के बाद और गहराए सवाल
मामले पर स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने कहा कि आचार संहिता लागू होने की संभावना को देखते हुए ठेकेदार द्वारा जल्दबाजी में आधारशिला रखकर निर्माण कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने दावा किया कि भवन में दरारें घटिया ईंटों के उपयोग के कारण आई हैं और उन्होंने इस संबंध में कार्रवाई की मांग भी की है। विधायक के इस बयान के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर संदेह था तो समय रहते निगरानी और जांच क्यों नहीं की गई। करीब 11 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्वास्थ्य केंद्र में इतनी जल्दी दरारें आना सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे भवन का स्वतंत्र तकनीकी और संरचनात्मक ऑडिट कराकर दोषियों की पहचान की जाए तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी संभावित हादसे को रोका जा सके।


























